सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी से जुड़े आम मिथक

By Saroj Singh|Updated : May 13th, 2020

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (CSE) को पूर्णतःसम्पन्न होने में पूरा एक वर्ष लग जाता है, इसे तीन अत्यंत प्रतिस्पर्धी चरणों में विभाजित किया गया है, जिसमें किसी भी स्तर पर कोई भी एक चीज गलत हो सकती है, जो किसी की विफलता का कारण बन सकती है। कभी-कभी कुछ आम मिथक, जो एक प्रतिभागी को प्रभावित करते हैं, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी को बहुत कठिन बना देते हैं। इन मिथकों की वास्तविकता की जांच जल्द से जल्द करना बहुत जरूरी है। हालाँकि मिथक बदलते रहते हैं और पुराने मिथक के टूटने के बाद नए नए मिथक उभर आते हैं।

सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी से जुड़े आम मिथक

इस लेख में, हम यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा-2020 की तैयारी के विषय में आम मिथकों से पर्दा उठाना चाहते हैं। हम इन मिथकों को एक-एक करके तोड़ेंगे, ताकि लक्ष्य पर केंद्रित प्रतिभागी अपनी तैयारी की गति को बढ़ा सके।

इन मिथकों से बचने और चयन की संभावनाओं को बढ़ाने की कोशिश करें!

मिथक 1: यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा सबसे कठिन परीक्षा है (जिसे सभी परीक्षाओं की माता माना जाता है)

यह गलत है!

अक्सर, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को न केवल भारत में बल्कि दुनिया में सबसे कठिन परीक्षा के रूप में उल्लिखित किया जाता है। यह सच नहीं है, भारत में ही अन्य बहुत कठिन परीक्षाएं आयोजित की जाती हैं। जैसे कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा, जेईई आदि बहुत कठिन परीक्षाएं हैं, जो एक विशेष विषय से जुड़े छात्रों के लिए आयोजित होती हैं। दूसरी ओर यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा विषय, पृष्ठभूमि के दृष्टिकोण से सभी के लिए खुली है। यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को सबसे कठिन परीक्षा के रूप में जाना जाता है क्योंकि परीक्षा चक्र को पूरा होने में एक साल का समय लगता है, जिसमें विभिन्न चरण शामिल होते हैं, जिससे यह परीक्षा चुनौतीपूर्ण हो जाती है और इसके लिए बहुत धैर्य की आवश्यकता होती है।

यदि सही रणनीति और दिशानिर्देश का पालन किया जाता है, तो इस परीक्षा को उत्तीर्ण किया जा सकता है और कई उम्मीदवार इसमें बेहद अच्छी रैंक पा सकते हैं।

मिथक 2: प्रतिभागी को अपनी शिक्षा के दौरान टॉपर होना जरुरी है:

हालांकि एक टॉपर होने से इसमें थोड़ी मदद मिलती है, लेकिन यह इस परीक्षा में सफलता की गारंटी नहीं देता है। इसके लिए सामान्य जागरूकता, तार्किक क्षमता और अच्छे लेखन कौशल की आवश्यकता है। यदि आप इन गुणों को विकसित कर सकते हैं, तो आप कक्षा दसवीं या बारहवीं को द्वितीय श्रेणी से उत्तीर्ण करने पर भी इस परीक्षा को पास कर सकते हैं। हां, आपको साक्षात्कार में यह समझाना पड़ सकता है कि आपने अपनी पढ़ाई के दौरान कम स्कोर क्यों बनाया है, लेकिन यदि आपके पास कोई वैध कारण है तो यह आपके विरुद्ध नहीं जायेगा।

मिथक 3: कोचिंग संस्थान की मदद के बिना कोई भी परीक्षा उत्तीर्ण नहीं कर सकता

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा में पास होने के लिए ’कोचिंग’ एक ज़रूरी पूर्व-आवश्यकता नहीं है। इस परीक्षा में सफल होने के लिए, 'सही मार्गदर्शन' प्रमुख है!

कोचिंग आमतौर पर “क्या करना है और क्या नहीं” बताकर आपकी तैयारी को सही दिशा देने में मदद करती है!’ इसके अलावा किसी विशेष विषय में कैसे और कहाँ रुकना है, यह जानना सिलेबस को प्रभावी रूप से कवर करने के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। हम जिस तरह की दुनिया में रह रहे हैं, उसके आसपास मौजूद जानकारी का कोई अंत नहीं है। इसलिए, कोचिंग संस्थान समय बचाने में मदद करते हैं और सही अध्ययन रणनीति के बारे में बेहतर मार्गदर्शन प्रदान करते हैं। एक बार यदि प्रतिभागी अध्ययन के उद्देश्यों को लेकर स्पष्ट हो जाता है, तो वह सेल्फ-स्टडी या एक कोचिंग संस्थान से जुड़ने के बीच निर्णय कर सकता है।

नोट: मेंटर असिस्टेंस: यदि किसी के पास कोई भी मेंटर है, जैसे कि सीनियर, पूर्व छात्र या एक शिक्षक जो यूपीएससी की पूरी प्रक्रिया से परिचित है और एक कोचिंग संस्थान की तरह आपका मार्गदर्शन करने में सक्षम है।

मिथक 4. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा को क्रैक करने के लिए दो से तीन साल की तैयारी की आवश्यकता होती है

लेकिन यह एकमात्र नियम नहीं है!

परीक्षा को पास करने के लिए आवश्यक वर्षों की संख्या प्रतिभागी पर निर्भर करती है। कंटेंट के हिसाब से एक वर्ष पर्याप्त है। फोकस या तैयारी की दिशा के हिसाब से यह भिन्न-भिन्न हो सकता है। बहुत कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि प्रतिभागी कितना गंभीर और ईमानदार है और तैयारी के दौरान वह किस तरह के लोगों से घिरा रहता है।

मिथक 5. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी के लिए हर रोज 14 घंटे से अधिक अध्ययन की आवश्यकता होती है

नहीं, ऐसा कोई तय नियम नहीं है! घंटों की बजाय अध्ययन की गुणवत्ता मायने रखती है। हां, यह सच है कि किसी को सिलेबस में वर्णित विषयों के बारे में लगभग सबकुछ जानने की जरूरत है, फिर भी विषय की बेहतर समझ और परीक्षा में उसका समझ का सही इस्तेमाल ही सफलता दिला सकता है।

हर किसी की सीखने की क्षमता अलग होती है; कोई एक टॉपिक को एक घंटे में समझ सकता है जबकि दूसरे के लिए यह पर्याप्त नहीं हो सकता है। वैचारिक स्पष्टता के साथ सिलेबस को प्रभावी ढंग से कवर किया जाना चाहिए, ताकि प्रीलिम्स में उसका उपयोग किया जा सके और मुख्य परीक्षा में उसे अभिव्यक्त किया जा सके। इसलिए पढ़ाई के घंटों की संख्या प्रतिभागी की सीखने और समझने की गति पर निर्भर करती है।

मिथक 6. सिलेबस का पूरा कवरेज बेहद आवश्यक है

यह सच नहीं है!

कई अभ्यर्थी सिलेबस को पूरा नहीं कर पाते, फिर भी परीक्षा में पास हो जाते हैं। सिलेबस के स्टेटिक भाग को कवर करना बहुत महत्वपूर्ण है। सबसे पहले, इसमें से प्रश्न पूछे जाते हैं। दूसरा, यह आत्मविश्वास देता है, जैसे कि परीक्षा में कुछ भी पूछे जाने पर मुख्य परीक्षा में उचित उत्तर लिखा जा सकता है। इसके अलावा, प्रारंभिक परीक्षा पास करने के लिए स्टेटिक जानकारी बहुत महत्वपूर्ण है।

 

मिथक 7. कम से कम 2-3 समाचार पत्र पढ़ना अनिवार्य है

यह सच नहीं है!

इस परीक्षा के सभी चरणों में क्लीयर करने के लिए समाचार पत्र पढ़ना आवश्यक है: प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार, लेकिन इसके लिए 2-3 समाचार पत्र पढ़ने की आवश्यकता नहीं है।

  • कोई भी मानक राष्ट्रीय समाचार पत्र- द हिंदू या इंडियन एक्सप्रेस, सूचना का एक अच्छा स्रोत माना जाता है। इनमें से कोई भी चुन सकता है।
  • कुछ सरकारी पत्रिकाओं और वेबसाइटों को भी कवर किया जा सकता है उदा. पत्रिकाएं जैसे- योजना, कुरुक्षेत्र, तथा वेबसाइट जैसे-पीआईबी, पीआरएस, नीति आयोग और कुछ महत्वपूर्ण मंत्रालय

 

मिथक 8. यूपीएससी सीएसई की तैयारी के लिए सामाजिक दूरी आवश्यक है

पूर्ण अलगाव से बचा जाना चाहिए!

कई प्रतिभागी तैयारी के दौरान अपने आप को बिल्कुल अलग-थलग रखना शुरू कर देते हैं और अपने आसपास की दुनिया के साथ उनका संपर्क बेहद सीमित हो जाता है। याद रखें, आईएएस, आईपीएस या आईएफएस के रूप में नौकरी की भूमिका के लिए आपको अपने परिवेश के बारे में पता होना चाहिए। एक सिविल सेवक की पूरी नौकरी की भूमिका उसके आसपास की जागरूकता से संबंधित है। चयन के बाद समाज और लोगों के लिए काम करने की जरूरत है। यूपीएससी भी किसी ऐसे व्यक्ति की तलाश में रहती है जो अपने परिवेश के प्रति जागरूक हो।

सोशल मीडिया के बारे में चयनात्मक होना उचित है। हालांकि सोशल मीडिया पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग नहीं की जाती है, लेकिन समाज से संबंधित एक दबाव वाले मुद्दे पर एक राय बनाने या उस पर राय बनाने के दौरान व्याकुलता से बचने की सलाह दी जाती है। रचनात्मक रूप से उनका उपयोग करने में चयनात्मक और सावधान रहना जरुरी है, एक न्यूज़ वेबसाइट और अन्य प्रेरक चैनलों से लाभ उठाया जा सकता है।

मिथक 9. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के उम्मीदवारों को दुनिया के हर विषय/ टॉपिक के बारे में सब कुछ पता होना चाहिए।

नहीं, ये सही नहीं है।

चूंकि यह एक सामान्यज्ञ परीक्षा है, इसलिए उन्हें आम तौर पर अच्छी तरह से पढ़ा जाना चाहिए, जिसमें मुद्दों के प्रति संतुलित दृष्टिकोण होता है। इसके अलावा, परीक्षा का पाठ्यक्रम बहुत बड़ा है, जिसमें कई विषयों को शामिल किया गया है। इसलिए, एक IAS का प्रतिभागी आमतौर पर दूसरों की तुलना में बहुत अधिक जागरूक होता है। जो आवश्यक है वह विषय की सामान्य समझ और वैचारिक स्पष्टता रखता है।

विशेषज्ञ बनने के लिए रटना नहीं है। परीक्षा में किसी विषय में एक विशेषज्ञ होने की आवश्यकता नहीं होती है, बल्कि, उम्मीदवारों को सामान्य जागरूकता और विश्लेषणात्मक कौशल होना चाहिए।

मिथक 10. प्रीलिम्स या प्रारंभिक परीक्षा, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा का सबसे कठिन चरण है

कुछ हद तक यह सही है!

यह सबसे कठिन चरणों में से एक है, केवल इसलिए नहीं कि इस चरण में प्रतिभागियों की संख्या अधिक होती है। लेकिन इसलिए भी कि इस चरण में बहुत सारे तथ्यों को याद रखने की ज़रूरत होती है। योजनाओं, कानूनों, मुद्दों आदि से संबंधित विभिन्न तथ्यों को याद रखने के साथ-साथ परीक्षा हॉल में आपकी मनःस्थिति भी इस चरण को पार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। किसी भी जानकारी को यदि गलत रूप में समझकर गलत विकल्प पर टिक कर दिया जाता है, तो नकारात्मक अंकन के कारण वह उस प्रश्न को जोखिम भरा बना देती है। प्रीलिम्स परीक्षा में प्रश्नों के प्रारूप में 'समझ और व्याख्या' की ओर थोड़ा झुकाव है।

इसलिए, न केवल तथ्यों की बल्कि विषयों की वैचारिक स्पष्टता भी बहुत महत्वपूर्ण है।

मिथक 11. किसी को प्रीलिम्स क्लियर करने के लिए 90 से अधिक प्रश्नों को अटेम्प्ट करने का प्रयास करना चाहिए

यह सच नहीं है।

सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि प्रश्नों का कितना सही अटेम्प्ट किया गया है। सटीकता के % द्वारा प्रश्नों की संख्या को आंकने की आवश्यकता है। जिनकी सटीकता अच्छी है, वे कम संख्या में प्रश्न अटेम्प्ट कर सकते हैं और जिनकी सटीकता कम है, वे अधिक संख्या में प्रश्न अटेम्प्ट कर सकते हैं।

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Kajal Sharma
Bilkul sahi batayi h sari batein isme
Heena Mohni
Very nice sir thanks sir
Neha Singh

Neha SinghApr 5, 2022

Thanku sir
Sonu Yadav

Sonu YadavApr 16, 2022

Thanks sir
Asha Sahani

Asha SahaniMay 19, 2022

Thanku sir
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