पर्यावरण और पारिस्थितिकी विज्ञान की मूलभूत शब्दावली (भाग – 1)

By Arpit Kumar Jain|Updated : March 20th, 2019

पर्यावरण और पारिस्थितिकी विज्ञान की मूलभूत शब्दावली (भाग – 1)

  1. अजैविक घटक : किसी पारिस्थितिकी तंत्र के मृत तथा अकार्बनिक घटकों को अजैविक घटक कहते हैं, जैसे मृदा, जल, वायु, सूर्य का प्रकाश आदि।
  2. सहजीविता (Amensalism) : यह दो प्रजातियों के बीच एक प्रकार का अंतरसंबंध है जिसमें एक प्रजाति को नुकसान होता है और दूसरी प्रजाति अप्रभावित रहती है। उदाहरण के लिए, पेनिसिलीन और जीवाणु।
  3. वायुमंडल : यह वायुमंडलीय गैसों, जल वाष्प, और निलंबित कणों का एक भौतिक मिश्रण है जो पृथ्वी को चारों ओर से घेरे रहता है। यह पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण के कारण सतह से जुड़ा रहता है।
  4. स्वपोषित (Autotrophs): वे जीव जो अकार्बनिक पदार्थों जैसे CO2 और जल से अपना भोजन स्वयं बनाते हैं, उन्हें स्वपोषित जीव कहते हैं। इन्हें प्राथमिक उत्पादक भी कहते हैं।
  5. स्व पारिस्थितिकी (Auto Ecology): किसी विशेष जीव अथवा प्रजाति का पर्यावरण के सापेक्ष अध्ययन को स्व पारिस्थितिकी अध्ययन माना जाता है।
  6. बेन्थिक जीव (Benthic Animals): जलीय श्रोतों के आधार में रहने वाले जीवों को बेन्थिक जीव कहते हैं।
  7. जैवसंग्रहण (Bioaccumulation):यह एक विशेष जीव के शरीर के भीतर विषाक्त तत्वों की एकाग्रता में वृद्धि की प्रक्रिया है (अर्थात यह संदर्भित करता है कि किसी तत्व ने पहली बार खाद्य श्रृंखला में कैसे प्रवेश किया) और सामान्य रूप से ऐसे प्रदूषकों की एकाग्रता वायु, जल आदि जैसे बाहरी वातावरण की तुलना में जीव के शरीर में अधिक हो जाती है। Biomagnification : जैव-प्रवर्धन को जैव प्रवर्धन के रूप में भी जाना जाता है; इसमें, विषाक्त पदार्थों की एकाग्रता क्रमिक ट्राफिक स्तरों पर बढ़ जाती है। यह इस कारण से है कि विषाक्त तत्वों को अवशोषित नहीं किया जा सकता है और साथ ही साथ वे लगातार उच्च ट्रॉफिक स्तर पर स्थानांतरित हो जाते हैं जिसके परिणामस्वरूप उच्च ट्रॉफिक स्तर पर विषाक्त पदार्थों का अधिक एकाग्रता होता है।
  8. जैव-भूरासायनिक चक्र (Bio-Geochemical Cycle): नाइट्रोजन, कार्बन जैसे महत्वपूर्ण तत्त्व जिस चक्रीय मार्ग से जीवों से पर्यावरण में और पर्यावरण से जीवों में स्थानांतरण करते हैं, उसे जैव-भूरासायनिक चक्र कहते हैं।
  9. बायोम : प्राकृतिक वन और घास के मैदान जो जलवायु प्रदेशों अथवा सूर्य, तापमान और वर्षा के वितरण से संबंधित होते हैं, बायोम कहलाते हैं।
  10. बायोमास : किसी जीव में एक समय पर उपस्थित जीवित पदार्थ की मात्रा को उस जीव का बायोमास कहते हैं।
  11. जैवमंडल (Biosphere) : यह पृथ्वी सतह पर उपस्थित सबसे बड़ा पारिस्थितिकी तंत्र है और इसकी उपस्थिति पृथ्वी पर तीनों मंडलों – वायुमंडल, जलमंडल और स्थलमंडल के बीच निरंतर परस्परता और अंतरनिर्भरता को दर्शाती है।
  12. जैविक घटक : किसी पारिस्थितिकी तंत्र के सजीव घटक उस पारिस्थितिकी तंत्र के जैविक घटकों का भाग होते हैं।
  13. ब्रूड पैरासिटिज़्म (Brood Parasitism): पक्षियों में एक विशेष प्रकार की परजीविता जिसमें परजीवी पक्षी अपने अंडे दूसरों के घोसलों में देते हैं और दूसरे पक्षी को अपने अंडे सेने देते हैं।
  14. मांसाहारी – भोजन और ऊर्जा के लिए शाकाहारी अथवा प्राथमिक उत्पादकों पर निर्भर रहने वाले जीवों को मांसाहारी जीव कहा जाता है।
  15. जलवायु परिवर्तन: मौसम तथा जलवायु में अनिश्चित, परिवर्तनीय अथवा अप्रत्याशित प्रकार के बदलाव को जलवायु परिवर्तन कहते हैं।
  16. चरमोत्कर्ष (Climax) : यह उत्तरवर्तन की प्रक्रिया का अंतिम चरण है। वह प्रजाति जिस पर प्रक्रिया पूरी होती है उसे चरमोत्कर्ष समुदाय कहा जाता है।
  17. सह-विलुप्ति: यह वह स्थिति है जिसमें किसी प्रजाति के विलुप्त होने पर, उससे जुड़ी अथवा उस पर आश्रित जीव अथवा वनस्पति भी विलुप्त हो जाती है।
  18. कम्पोस्टिंग: वायुवीय परिस्थितियों (ऑक्सीजन की उपस्थिति में) जैविक अपशिष्ट पदार्थों के अपघटन को कम्पोस्टिंग के नाम से जाना जाता है।
  19. परजीविता : दो प्रजातियों के बीच इस प्रकार का परस्पर संबंध कि एक जीव लाभान्वित होता है और दूसरे जीव पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। उदाहरण के लिए, एपिफाइट और आम, व्हेल की पिछले भाग में बार्नेसल्स का बढ़ना।
  20. प्रतिस्पर्धा : दो प्रजातियों के बीच एक प्रकार का परस्पर संबंध जिसमें दोनों ही प्रजातियों पर नकारात्मक असर पड़ता है। उदाहरण के लिए, पौधे और शाकाहारी जीव।
  21. संरक्षण : प्राकृतिक संसाधनों (जीवित और मृत दोनों) का बुद्धिमत्तापूर्वक प्रयोग जिससे उन्हें गायब होने, व्यर्थ होने अथवा विलुप्त होने से बचाया जा सके।
  22. क्रायोस्फीयर (Cryosphere): पृथ्वी की सतह पर बर्फ और ग्लेशियर द्वारा घिरे हुए क्षेत्रफल को क्रायोस्फीयर कहते हैं।
  23. डेट्रीवोरस : वे सूक्ष्मजीव जो डेट्रियस का अपघटन करते हैं, डेट्रिवोरस कहलाते हैं।
  24. अपघटक : बैक्टीरिया, कवक जैसे जीव जो मृत पौधों और जीवों के जैविक अपघटन में शामिल होते हैं, अपघटक कहलाते हैं।
  25. पर्णपाती : वे पेड़ जो एक निश्चित समय के लिए अपनी पत्तियां गिरा देती हैं।
  26. जनसंरचना (Demography): मानवों की जनसंख्या के आकार का सांख्यिकीय अध्ययन।
  27. डी.डी.टी. (DDT): कृषि उपयोगों में कीटनाशकों के रूप में प्रयोग होने वाला जैविक क्लोरीन रसायन। अब, इसके प्रयोग ने जैवसंग्रहण के कारण समस्या खड़ी कर दी है।
  28. पारिस्थितिकी अध्ययन (Ecology): जीवित जीवों के अपने परिवेश के साथ ही वातावरण के साथ संबंध के वैज्ञानिक अध्ययन को पारिस्थितिकी कहते हैं। ए. जी. तान्सले ने पारिस्थितिकी की अवधारणा प्रस्तुत की थी।
  29. पर्यावरण : किसी जीव के अस्तित्व को उसके जीवनभर प्रत्यक्ष अथवा प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित करने वाले घटक पर्यावरण का निर्माण करते हैं।
  30. पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem): किसी क्षेत्र के जैविक तथा अजैविक घटकों के बीच द्रव्यमान और ऊर्जा के प्रवाह को सुनिश्चित करने वाले संबंध और अंतरनिर्भरता को पारिस्थितिकी तंत्र कहते हैं।
  31. पारिस्थितिकी सेवाएं : पारिस्थितिकी तंत्र द्वारा दी गई आर्थिक, पर्यावरणीय और सौंदर्य वस्तुओं तथा सेवाओं की व्यापक श्रृंखला को पारिस्थितिकी सेवाएं कहा जाता है।
  32. इकोटोन (Ecotone) : दो अथवा दो से अधिक विविध पारिस्थितिकी तंत्र के बीच मेल के क्षेत्र को इकोटोन कहा जाता है। उदाहरण के लिए, एस्चुरी और घास के मैदान इत्यादि।
  33. इकोटाइप (Ecotype): पौधा अथवा जीव प्रजाति जो किसी खास आवास की स्थानीय वातावरणीय परिस्थितियों के अनुकूल होती है।
  34. इकोक्लाइन (Ecocline): एक पारिस्थितिकी तंत्र से दूसरे पारिस्थितिकी तंत्र में अस्पष्ट अंतर वाली पर्यावरणीय प्रवणता के साथ प्रजातियों के संघटन में धीरे-धीरे और सतत परिवर्तन को इकोक्लाइन कहते हैं।
  35. इकोलॉजिकल नीस: किसी पारिस्थितिकी तंत्र के जीव द्वारा निभायी गई मुख्य तथा पारिस्थितिकी भूमिका को कहते हैं। यह किसी जीव के उसके पर्यावरण में सभी जैविक और अजैविक घटकों के साथ सभी संबंधों के योग होता है।
  36. पारिस्थितिकी उत्तरवर्तन: यह किसी दिए गए क्षेत्र में प्रजातियों के संघटन में धीरे-धीरे और स्पष्ट रूप से प्रत्याशित परिवर्तन होता है।
  37. इकोफीन : किसी विशेष आवास में समान प्रकार के जीनोटाइप परंतु भिन्न फीनोटाइप गुण रखने वाली जनसंख्या को इकोफीन कहते हैं।
  38. पारिस्थितिकी दक्षता/10% नियम : एक पोषण स्तर से दूसरे पोषण स्तर में द्रव्यमान और ऊर्जा के हस्तांतरण की दर पिछले स्तर के मात्र 10% के बराबर होती है। इसे 10% ऊर्जा नियम कहते हैं जो किसी पारिस्थितिकी तंत्र में पारिस्थितिकी दक्षता को दर्शाती है।
  39. पारिस्थितिकी पदचिह्न: यह प्राकृतिक और पर्यावरणीय संसाधनों के प्रयोग तथा दोहन की पर्यावरण की धारणीय क्षमता अथवा पर्यावरणीय की पुनः उत्पन्न करने की क्षमता के सापेक्ष दर्शाता है।
  40. स्वदेशी जैवविविधता : किसी क्षेत्र की जैवविविधता पृथ्वी के सतह पर सीमित वितरण वाली किसी खास और विशेष भौगोलिक परिस्थितियों से जुड़ी होती है, उसे स्वदेशी जैवविविधता कहते हैं।
  41. यूट्रोफिकेशन : जल में नाइट्रेट और फॉस्फेट के अत्यधिक सांद्रता के कारण जल स्त्रोतों के अधिक उपजाऊता से शैवालों का फैलना यूट्रोफिकेशन कहलाता है।
  42. यूरीफेजिक जीव : वे पौधे और जीव जिनकी भोजन के प्रति सहनशीलता की विस्तृत सीमा होती हे, उसे यूरीफेजिक कहते हैं।
  43. यूरीथर्मल जीव: वे पौधे और जीव जिनकी तापमान के प्रति सहनशीलता की विस्तृत सीमा होती हे, उसे यूरीथर्मल जीव कहते हैं।
  44. यूरोहाइड्रिक जीव : वे पौधे और जीव जिनकी जल के प्रति सहनशीलता की विस्तृत सीमा होती हे, उसे यूरोहाइड्रिक कहते हैं।
  45. ई.आई.ए. : पर्यावरण पर विकासात्मक परियोजनाओं के कारण होने वाले प्रभावों का विश्लेषण पर्यावरण प्रभाव मूल्यांकन (EIA) कहलाता है।
  46. बाह्य-सितु संरक्षण : जब किसी प्रजाति को उसके प्राकृतिक आवास की सीमा के बाहर संरक्षित किया जाता है, तो इसे बाह्य-सितु संरक्षण कहते हैं। उदाहरण के लिए, चिड़ियाघर, वनस्पति, बागों में संरक्षण।
  47. फ्लोरा (Flora): किसी क्षेत्र के पादप समुदाय को उस क्षेत्र का फ्लोरा कहते हैं।
  48. फॉना (Fauna): किसी क्षेत्र के पशु समुदाय को उस क्षेत्र का फॉना कहते हैं।
  49. खाद्य श्रृंखला : किसी पारिस्थितिकी तंत्र में द्रव्यमान और ऊर्जा के रैखिक और अनुक्रमिक प्रवाह को खाद्या श्रृंखला कहते हैं।

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