ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में शिक्षा संबंधी सुधार

By Hemant Kumar|Updated : June 29th, 2020

ब्रिटिश काल के दौरान शिक्षा पर यूपीएससी के लिए महत्वपूर्ण नोट्स पढ़ें। इसके अलावा, यहां हिंदी और अंग्रेजी में ब्रिटिश नियम पीडीएफ नोट्स के दौरान शैक्षिक विकास डाउनलोड करें।

ब्रिटिश शासन के दौरान शैक्षिक सुधार भारत के विकास के लिए नियत नहीं थे, लेकिन भारतीयों ने इसका इस्तेमाल अपनी आजादी के लिए लड़ने के लिए अपने लाभ के लिए किया है। यह देखा गया है कि हर साल, यूपीएससी / राज्य पीसीएस परीक्षा में 1-2 प्रश्न औपनिवेशिक अवधि के दौरान शैक्षिक विकास से होते हैं। अंग्रेजों द्वारा किए गए सभी शिक्षा सुधारों की विस्तृत सूची इस प्रकार है।

ब्रिटिश शासन के दौरान भारत में शिक्षा संबंधी सुधार: 

कंपनी के शासन में व्यक्‍तिगत प्रयास

·        मुस्लिम नियमों और रीति-रिवाजों का अध्ययन करने के लिए वर्ष 1781 में वारेन हेस्टिंग्स ने कलकत्‍ता मदरसे की स्थापना की थी।

·        हिंदू कानूनों और दर्शनशास्‍त्रों के लिए जोनाथन डंकन ने वर्ष 1791 में बनारस में संस्कृत विद्यापीठ की स्थापना की।

·        कंपनी के लोक सेवकों के प्रशिक्षण के लिए वेलेस्‍ली द्वारा वर्ष 1800 में फोर्ट विलियम कॉलेज की स्थापना की गई थी। (इसे वर्ष 1802 में बंद कर दिया गया था)।

चार्टर एक्‍ट, 1813

·        भारत में शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए कंपनी द्वारा 1 लाख रुपये खर्च किए जाने थे।

लॉर्ड मैकाले का घोषणा पत्र, 1835

·        प्राच्‍य- आंग्‍लिक विवाद के मध्‍य में, मैकाले ने बाद के दृष्‍टिकोण का समर्थन किया।

·        अंग्रेजी भाषा को शिक्षा के एकमात्र माध्यम के रूप में चुना गया था।

·        सरकार ने पश्‍चिमी विज्ञान और साहित्य को पढ़ाने के लिए सीमित संसाधनों को खर्च करने का फैसला किया।

उन्होंने सामूहिक शिक्षा के बजाय 'शिक्षा के अधोमुखी निस्‍यंदन सिद्धांत' को अपनाया।

नोट: 'शिक्षा के अधोमुखी निस्‍यंदन सिद्धांत का अर्थ है कुछ उच्च और मध्यम-वर्ग के लोगों को पढ़ाना जिससे दुभाषियों का जन्‍म होगा जो अंततः जन साधारण तक पहुंचेगा। हालांकि, यह सिद्धांत अंग्रेजों की परिकल्पना के विपरीत बुरी तरह विफल रहा, लेकिन इसने आधुनिक प्रबुद्ध वर्ग के विकास में मदद की जिन्होंने स्वतंत्रता के संघर्ष को आकार दिया।

वुड का आदेश पत्र, 1854

·        इसे "भारत में अंग्रेजी शिक्षा के मैग्ना कार्टा" के रूप में भी जाना जाता है।

·        इसने 'शिक्षा के अधोमुखी निस्‍यंदन सिद्धांत' को अस्वीकार कर दिया।

·        इसने उच्च शिक्षा के लिए अंग्रेजी और विद्यालय स्‍तर पर मातृ भाषा की सिफारिश की।

·        धर्मनिरपेक्ष शिक्षा।

·        निजी उद्यमों को प्रोत्साहित किया।

हण्‍टर शिक्षा आयोग, 1882-83

·        इसका उद्देश्य वुड के आदेश पत्र का आकलन करना था।

·        इसने शिक्षा को बेहतर बनाने में राज्य की भूमिका पर विशेष जोर दिया।

·        स्थानीय निकायों (जिला और नगरपालिका बोर्ड) को नियंत्रण हस्तांतरित करने का समर्थ किया।

रेले कमीशन, 1902

भारत में विश्‍वविद्यालयों के प्रदर्शन की समीक्षा करना।

भारतीय विश्‍वविद्यालय अधिनियम, 1904

रेले आयोग की सिफारिश पर, निम्‍नलिखित के लिए अधिनियम प्रदान किया गया:

·        विश्‍वविद्यालयों पर अधिक नियंत्रण

·        विश्‍वविद्यालयों को शोध और अध्ययन के लिए उचित महत्व दिया गया।

·        मित्रों (फेलो) की संख्या कम हो गई।

·        निजी कॉलेज संबद्धता के लिए नियम सख्त किए गए।

गोपाल कृष्ण गोखले ने इस कदम को "पश्‍चगामी उपाय" कहा।

शिक्षा नीति पर सरकार का प्रस्‍ताव, 1913

·        सरकार ने अनिवार्य शिक्षा का उत्‍तरदायित्‍व लेने से इनकार कर दिया।

·        इसने प्रांतीय सरकार से भी ऐसा करने का आग्रह किया।

·        यहां तक ​​कि निजी संस्‍थानों को भी प्रोत्साहित किया गया।

सैडलर विश्‍वविद्यालय आयोग, 1917-19

आयोग की स्थापना कलकत्‍ता विश्‍वविद्यालय की समीक्षा के लिए की गई थी जो बाद में सभी विश्‍वविद्यालयों में विस्तारित हो गया।

·        12 + 3 कार्यक्रम (12 वर्ष की स्कूली शिक्षा और 3 वर्ष की डिग्री)

·        माध्यमिक और इंटरमीडिएट शिक्षा का एक अलग बोर्ड स्थापित किया जाना था।

·        इसने महिला शिक्षा, प्रायौगिक विज्ञान और तकनीकी शिक्षा, शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर दिया।

हार्टोग समिति, 1929

·        प्राथमिक शिक्षा पर जोर दिया।

·        कई स्कूलों और कॉलेजों में शिक्षा की गुणवत्‍ता को प्राथमिकता दी गई।

·        प्रवेश अत्यधिक प्रतिबंधित थे।

वर्धा बेसिक शिक्षा योजना (1937)

जाकिर हुसैन समिति ने बुनियादी (बेसिक) शिक्षा के लिए इस राष्‍ट्रीय योजना को तैयार किया।

मुख्य सिद्धांत 'कार्य करके सीखना'।

धर्मनिरपेक्ष दृष्‍टिकोण।

स्कूली शिक्षा के पहले सात वर्ष मातृभाषा के माध्‍यम से और 8वीं के बाद अंग्रेजी के माध्यम से।

 

सारजेंट शिक्षा योजना, 1944

सारजेंट ब्रिटिश सरकार का शैक्षिक सलाहकार था।

उन्होंने अनेक सुधारों का समर्थन किया और भारतीय शिक्षा व्‍यवस्‍था को 40 वर्षों में इंग्लैंड के समकक्ष बनाने का लक्ष्य रखा। लेकिन इसे लागू करने के लिए कार्यप्रणाली का बहुत अभाव था। यह सरकार का केवल दिखावटी प्रेम था।


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