French Revolution-Causes and Consequences

By Sudheer Kumar K|Updated : December 26th, 2020

French Revolution: World History, UPSC IAS GS Mains Paper-I (Indian Heritage and Culture, History and Geography of the World and Society). In this article, you will learn about:

  1. Introduction to French Revolution
  2. Causes of French Revolution
  3. Outbreak of Revolution
  4. New Constitution
  5. French Republic
  6. Impact of the French Revolution
  7. Conclusion

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फ्रेंच क्रांति

1. परिचय

  • 17वीं और 18वीं शताब्दी के दौरान दार्शनिक और बौद्धिक आंदोलनों ने यूरोपीय समाज को प्रबुद्ध किया।
  • दार्शनिकों और बुद्धिजीवियों द्वारा प्रस्तावित विचारों ने लोगों को निरंकुश फ्रांसीसी सम्राट के खिलाफ विद्रोह के लिए उकसाया, जिसके फलस्वरूप 1789 में बैस्टिल के पतन के बाद फ्रांसीसी क्रांति हुई।
  • क्रांति ने सामंती समाज को समाप्त कर दिया और राजतंत्र के स्थान पर गणराज्य को स्थापित किया।

2. कारण

सामाजिक कारण :

  • 18वीं शताब्दी में, फ्रेंच/फ्रांसीसी राजनीति राजशाही और समाज में विभाजित थी, समाज तब सामंतवादी था।
  • समाज को तीन सम्पदाओं (वर्गों) में विभाजित किया गया था:
    1. पादरी या चर्च का पहला वर्ग
    2. कुलीनता (नोबेलिटी) का दूसरा वर्ग
    3. आम जनता या कॉमनर्स का तीसरा वर्ग (मध्यम वर्ग सहित सभी लोग) जैसे बड़े व्यापारी, वकील, किसान, शहर के श्रमिक और कारीगर आदि ।
  • प्रथम और द्वितीय वर्ग जन्म से सभी कर छूट सहित कई विशेषाधिकारों का आनंद लेता था, जबकि तीसरा वर्ग (मध्यम वर्ग) करों से अत्यतं परेशान था।
  • चर्च टिथ्स (करों का एक हिस्सा) इकट्ठा करते हैं और कुलीन लोग आम जनता से सामंती कर वसूलते थे।
  • मध्यम वर्ग का उदय (पूंजीपति वर्ग) - व्यापारी, वकील, अधिकारी, व्यवासायिक और व्यापारी सहित शिक्षित मध्यम वर्ग।
  • उनका मानना था कि किसी व्यक्ति की सामाजिक स्थिति उसकी योग्यता और उपलब्धि से निर्धारित होनी चाहिए।

आर्थिक कारण:

  • अत्याधिक जनसंख्या, वर्षों से खराब फसल की पैदावार, सूखे और मवेशियों की बीमारियों ने खाने की कीमतों में वृद्धि की।
  • कृषि की उपेक्षा और निम्न मजदूरी ने किसानों और शहरी गरीबों के बीच सामाजिक अशांति को बहुत बड़ा दिया। 

बौद्धिक और दार्शनिक :

इनकी शिक्षाओं और विचारो ने जनता को प्रेरित किया और विशेषकर मध्यम वर्ग का शिक्षित वर्ग।

  • वोल्टेयर: वह अंधविश्वासों के आलोचक थे और तर्क की सर्वोच्चता, यानी तर्कसंगतता की वकालत करते थे।
  • रूसो: उन्होंने कहा कि "मनुष्य स्वतंत्र पैदा होता है, लेकिन हर जगह वह जंजीरों में है"।
  • इन्होंने सामाजिक अनुबंध के सिद्धांत का प्रस्ताव रखा। उनके अनुसार, सामाजिक अनुबंध पर आधारित सरकार अपने सभी नागरिकों की स्वतंत्रत रखेगी।
  • मॉन्टेस्क्यू: इन्होंने अपनी पुस्तक "कानूनों की भावना" में विधानमंडल, कार्यकारी और न्यायपालिका के बीच शक्तियों के विभाजन के आधार पर एक लोकतांत्रिक सरकार की स्थापना की वकालत की।
  • जॉन लॉक: उन्होंने राजशाही (मोनार्क) के दैवीय अधिकार की अवधारणा का खंडन किया। 

इन विचारधाराओं का प्रभाव "स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व" के रूप में व्यक्त हुआ, जो बाद में फ्रांसीसी क्रांति के मार्गदर्शक सिद्धांत बन गए। 

राजनीतिक कारण :

  • राजा (मोनार्क), लुई सोलहवें और उनकी पत्नी की असाधारण जीवनशैली, लंबे समय तक युद्ध और ब्रिटेन के खिलाफ अमेरिकी युद्ध को वित्तीय सहायता ने वित्तीय संसाधनों को समाप्त कर दिया, जिससे देश दिवालिया हो गया।
  • प्रशासन के खर्च को पूरा करने और सेना को बनाए रखने के लिए, लुई सोलहवें ने नए करों को लगाने के लिए एस्टेट्स जनरल को आदेश दिया।
  • प्रत्येक एस्टेट में एक वोट था। पादरी और नोबेल के 300 प्रतिनिधि और आम जनता (कॉमनर्स) के 600 प्रतिनिधि थे।
  • तीसरी एस्टेट (तीसरे वर्ग) ने "एक सदस्य, एक वोट" की मांग की, यानी पहले दो वर्गों (सम्पदाओं) द्वारा प्राप्त विशेष विशेषाधिकारों का उन्मूलन।
  • कराधान/करो में समानता की मांग की।

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3. क्रांति का प्रकोप

  • एक बार जब समानता की उनकी मांग को खारिज कर दिया गया, तो तीसरा वर्ग विरोध में विधानसभा से बाहर निकल गया।
  • और तीसरे वर्ग के प्रतिनिधियों ने टेनिस कोर्ट में इकट्ठा होकर और खुद को नेशनल असेंबली (राष्ट्रीय सभा) घोषित कर दिया और सम्राट से संप्रभु सत्ता पर कब्जा कर लिया।
  • ख़राब फसल के कारण विद्रोह का जन्म हुआ और बैस्टिल प्रिजन किले को नष्ट कर दिया।

4. नया संविधान

  • लुईस XVI ने जून 1791 में वर्साइल में नेशनल असेंबली द्वारा तैयार संविधान को मान्यता दी।
  • ऐतिहासिक फ्रांसीसी दस्तावेज, जो अमेरिकी स्वतंत्रता की घोषणा से प्रभावित था, ने ‘मनुष्य और नागरिकों के अधिकारों की घोषणा’ को अपनाया। इसे बाद में 1791 के फ्रांसीसी संविधान में प्रस्तावना के रूप में अपनाया गया।

5. फ्रांसीसी गणराज्य

  • लुईस XVI के प्रशिया के राजा के साथ गुप्त वार्ता में प्रवेश करने के बाद, नेशनल असेंबली ने प्रशिया और ऑस्ट्रिया के खिलाफ युद्ध की घोषणा की।
  • आतंक और विद्रोह और नेपोलियन युद्धों का शासन जो पंद्रह वर्षों तक चला और इसके परिणामस्वरूप फ्रांसीसी गणराज्य का गठन हुआ।

6. फ्रांसीसी क्रांति का परिणाम

  • टिथ्स और सामंती व्यवस्था को समाप्त कर दिया गया
  • सभी पुरुषों में समानता
  • लोगों की संप्रभुता
  • स्वतंत्रता, सुरक्षा, संपत्ति का अधिकार
  • शिक्षा का अधिकार, भाषण की स्वतंत्रता, सूचित करना, गरीबों को सार्वजनिक सहायता का अधिकार
  • यातना और संपत्ति, सरफडॉम (गुलामी) पर प्रतिबंध
  • अपनी सरकार चुनने के लिए लोगों के अधिकार की मान्यता
  • सार्वजनिक कार्यालयों में रोजगार के लिए सभी नागरिकों की पात्रता।
  • गैर-उचित वर्गों को वोट से वंचित करना
  • उदारवाद और राष्ट्रवाद के नए विचार
  • फ्रांस ने सरकार, प्रशासन, सैन्य, समाज और संस्कृति में पूर्ण परिवर्तन देखा।

7. निष्कर्ष

  • फ्रांस से राष्ट्रवाद के विचार ने कई यूरोपीय देशों जैसे इटली और जर्मनी, दक्षिण और मध्य अमेरिका और रूसी क्रांति के देशों को प्रभावित किया।
  • फ्रांसीसी क्रांति की विरासत, अर्थात स्वतंत्रता और लोकतांत्रिक अधिकार, लोकतांत्रिक आंदोलनों और आधुनिक राज्य के गठन के लिए मील के पत्थर बन गए।
  • भारतीय सुधारवादी जैसे राजा राम मोहन राय और अन्य स्वतंत्रता के आदर्शों और लोकतांत्रिक अधिकारों से प्रेरित थे। हमारी प्रस्तावना में स्वाधीनता, समानता और बंधुत्व के आदर्श फ्रांसीसी प्रस्तावना से प्रेरित थे।

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