अनुच्छेद 76 (Article 76 in Hindi) भारत का महान्यायवादी (Attorney General of India)

By Brajendra|Updated : August 18th, 2022

अनुच्छेद 76 (Article 76) में भारत के महान्यायवादी (Attorney General of India) के पद का प्रावधान है। भारत का महान्यायवादी संघीय कार्यपालिका का एक महत्त्वपूर्ण अंग है। महान्यायवादी भारत सरकार का मुख्य कानूनी सलाहकार तथा उच्चतम न्यायालय में भारत सरकार का प्रमुख वकील होता है।

अनुच्छेद 76: भारत का महान्यायवादी (Attorney General of India)

  • संविधान के अनुच्छेद 76 में महान्यायवादी (Attorney General) के पद का प्रावधान है।
  • महान्यायवादी भारत का प्रथम विधि अधिकारी और भारत सरकार का कानूनी सलाहकार होता है।
  • राष्ट्रपति, उच्चतम न्यायालय का न्यायाधीश नियुक्त होने के लिए अर्हित किसी व्यक्ति को भारत का महान्यायवादी नियुक्त करेगा।
  • महान्यायवादी का यह कर्तव्य होगा कि वह भारत सरकार को विधि संबंधी ऐसे विषयों पर सलाह दे और विधिक स्वरूप के ऐसे अन्य कर्तव्यों का पालन करे जो राष्ट्रपति उसको समय-समय पर निर्देशित करे या सौंपे और उन कृत्यों का निर्वहन करे जो उसको इस संविधान अथवा तत्समय प्रवृत्त किसी अन्य विधि द्वारा या उसके अधीन प्रदान किए गए हों।
  • महान्यायवादी को अपने कर्तव्यों के पालन में भारत के राज्यक्षेत्र में सभी न्यायालयों में सुनवाई का अधिकार रखता है।
  • महान्यायवादी को संसद की सभी प्रक्रियाओं में बोलने और भागीदारी करने का अधिकार है, लेकिन वह किसी भी संसदीय प्रक्रिया में वोट नहीं कर सकता। वह संसद का सदस्य नहीं होता, परंतु उसे भी वह विशेषाधिकार एवं उन्मुक्तियाँ प्राप्त होती हैं जो एक संसद के सदस्य को प्राप्त होती हैं।
  • इस प्रकार महान्यायवादी संघीय कार्यपालिका का एक प्रमुख अंग है, लेकिन भारत में सरकार बदल जाने पर या अन्य किसी कारण से सरकार के अस्तित्व में न रहने पर महान्यायवादी द्वारा त्यागपत्र देने की परम्परा है।
  • महान्यायवादी, राष्ट्रपति के प्रसादपर्यंत पद धारण करेगा और ऐसा पारिश्रमिक प्राप्त करेगा जो राष्ट्रपति निर्धारित करेगा।
  • भारत के प्रथम महान्यायवादी M. C. सीतलवाड़ थे और वर्तमान महान्यायवादी आर. वेंकटरमणी हैं।

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