अनुच्छेद 243 (Article 243 in Hindi) - परिभाषाएँ

By Brajendra|Updated : August 16th, 2022

अनुच्छेद 243: स्थानीय स्वशासन, स्थनीय स्वशासन एक ऐसी व्यवस्था है जो समस्त कार्यों को स्थानीय स्तर पर संपन्न करती है। भारत में 'स्थनीय स्वशासन' का जनक लार्ड रिपन को माना जाता है।

अनुच्छेद 243: स्थानीय स्वशासन

संविधान के भाग 4 में राज्य के नीति निर्देशक तत्वों के अंतर्गत अनुच्छेद 40 में राज्य को पंचायती राज व्यवस्था को लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।
अनुच्छेद 40: स्वशासन हेतु ग्राम पंचायतों गठन

  • भारत में 'स्थनीय स्वशासन' का जनक लार्ड रिपन को माना जाता है।
  • भारत में पंचायती राज व्यवस्था का शुभारंभ 2 अक्टूबर 1959 को भारत के प्रथम प्रधानमंत्री जबाहर लाल नेहरू द्वारा राजस्थान के नागौर जिले से हुआ।
  • 73 वां संविधान संशोधन द्वारा पंचायती राज संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया है।
  • 73 वां संविधान संशोधन (1992) , जो कि 24 अप्रैल, 1993 से भारत में लागू हुआ , पंचायती राज से संबंधित है।
  • मध्यप्रदेश में 30 दिसंबर 1993 को पंचायती राज अधिनियम विधानसभा में रखा गया व 25 जनवरी 1994 को पारित किया गया और 20 अगस्त 1994 को लागू किया गया।
  • 73 वां संविधान संशोधन द्वारा संविधान के भाग – 9 में अनुच्छेद 243 के अंतर्गत 243(A) से 243(O) तक अनुच्छेद जोडे गए , तथा 11वीं अनुसूची जोडी गई , जिस में कुल 29 बिषय हैं जिन पर पंचायतें कानून बना सकती हैं।
  • नगरों में स्थानीय स्वशासन को मजबूत करने व उसे सक्रिय बनाने के लिए 1992 में संविधान का 74 वाँ संविधान संशोधन संसद द्वारा पारित कर एक कानून बनाया गया जो 1 जून 1993 से लागू हुआ। इस कानून के तहत शहरी निकायों में तीन तरह की संस्थाएं कार्य करेगी।
  • 74वां संविधान संशोधन द्वारा नगरीय संस्थाओं को संवैधानिक दर्जा दिया गया है।
  • 74वें संविधान संशोधन द्वारा संविधान में भाग 9(A)जोड़ा गया, जिसका शीर्षक नगरीय निकाय रखा गया। जिसके अंतर्गत 243(P) से 243(ZG) तक अनुच्छेद जोडे गए , तथा 12वीं अनुसूची जोडी गई , जिस में कुल 11 बिषय हैं, जिन पर नगरीय निकाय कानून बना सकती हैं।

पंचायती राज से संबंधित महत्वपूर्ण अनुच्छेद

अनुच्छेद 243 - परिभाषाएँ

अनुच्छेद 243 क (A) - ग्रामसभा

अनुच्छेद 243 ख (B) -  ग्राम पंचायतों का गठन 

अनुच्छेद 243 ग (C) - पंचायतों की संरचना 

अनुच्छेद 243 घ (D) - स्थानों का आरक्षण

अनुच्छेद 243 ङ (E) - पंचायतों की कार्यकाल 

अनुच्छेद 243 च (F) - सदस्यता के लिए अयोग्यताएँ 

अनुच्छेद 243 छ (G) - पंचायतों की शक्तियाँ , प्राधिकार और उत्तरदायित्व

अनुच्छेद 243 ज (H) - पंचायतों द्वारा कर लगाने की शक्तियाँ और उनकी निधियाँ 

अनुच्छेद 243 झ (I) - वित्तीय स्थिति के पुनर्विलोकन के लिए वित्त आयोग का गठन 

अनुच्छेद 243 ञ (J)  - पंचायतों की लेखाओं की संपरीक्षा 

अनुच्छेद 243 ट (K) - पंचायतों के लिए निर्वाचन

अनुच्छेद 243 ठ (L) - संघ राज्यों क्षेत्रों को लागू होना 

अनुच्छेद 243 ड (M) - इस भाग का कतिपय क्षेत्रों को लागू न होना

अनुच्छेद 243 ढ (N) - विद्यमान विधियों और पंचायतों का बना रहना

अनुच्छेद 243 ण (O) - निर्वाचन सम्बन्धी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्णन  

नगरीय निकाय से संबंधित महत्वपूर्ण अनुच्छेद

अनुच्छेद 243 त (P) - परिभाषा 

अनुच्छेद 243 थ (Q) - नगर पालिकाओं का गठन 

अनुच्छेद 243 द (R) - नगर पालिकाओं की संरचना 

अनुच्छेद 243 ध (S) - वार्ड समितियों आदि का गठन और संरचना 

अनुच्छेद 243 न (T) - स्थानों का आरक्षण 

अनुच्छेद 243 प (U)- नगर पालिकाओं की अवधि आदि 

अनुच्छेद 243 फ (V) - सदस्यता के लिए निरर्हताएँ 

अनुच्छेद 243 ब (W) - नगरपालिकाओं आदि की शक्तियाँ , प्राधिकार और उत्तदायित्व 

अनुच्छेद 243 भ (X) - नगरपालिकाओं द्वारा कर अधिरोपित करने की शक्ति और उनकी निधियाँ 

अनुच्छेद 243 म (Y)- वित्त आयोग 

अनुच्छेद 243 य (Z) - नगरपालिकाओं के लेखाओं की संपरीक्षा 

अनुच्छेद 243 य क (ZA) - नगरपालिकाओं के लिए निर्वाचन 

अनुच्छेद 243 य ख (ZB) - संघ राज्य क्षेत्रों का लागू होना 

अनुच्छेद 243 य ग (ZC) - इस भाग का कतिपय क्षेत्रों को लागू न होना 

अनुच्छेद 243 य घ (ZD)- ज़िला योजना के लिए समिति 

अनुच्छेद 243 य ङ (ZE) - महानगर योजना के लिए समिति 

अनुच्छेद 243 य च (ZF) - विद्यमान विधियों पर नगर पालिकाओं का बना रहना 

अनुच्छेद 243 य छ(ZG) - निर्वाचन सम्बन्धी मामलों में न्यायालयों के हस्तक्षेप का वर्णन

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