महत्वपूर्ण लोकोक्तियाँ : भाग – 2

By Ashish Kumar|Updated : December 15th, 2021

प्रिय पाठकों,

शिक्षण परीक्षाओं में हिन्दी भाग से विभिन्न प्रश्न पूछे जाते है ये प्रश्न आप बहुत आसानी से हल कर सकते है यदि आप हिंदी भाषा से सम्बंधित विभिन्न टॉपिक के प्रश्नों का अभ्यास करे, हम हिंदी भाषा पर बहुत महत्वपूर्ण श्रृंखला की शुरुवात कर रहे है जो की आगामी TET, DSSSB और अन्य शिक्षण परीक्षाओ में बहुत ही सहायक होगी ।

 

महत्वपूर्ण लोकोक्तियां:

1. दोनों हाथों में लड्डू-(दोनों ओर लाभ)- महेंद्र को इधर उच्च पद मिल रहा था और उधर अमेरिका से वजीफा उसके तो दोनों हाथों में लड्डू थे।

2. नया नौ दिन पुराना सौ दिन-(नई वस्तुओं का विश्वास नहीं होता, पुरानी वस्तु टिकाऊ होती है)- अब भारतीय जनता का यह विश्वास है कि इस सरकार से तो पहली सरकार फिर भी अच्छी थी। नया नौ दिन, पुराना नौ दिन।

3. बगल में छुरी मुँह में राम-राम-(भीतर से शत्रुता और ऊपर से मीठी बातें)- साम्राज्यवादी आज भी कुछ राष्ट्रों को उन्नति की आशा दिलाकर उन्हें अपने अधीन रखना चाहते हैं, परन्तु अब सभी देश समझ गए हैं कि उनकी बगल में छुरी और मुँह में राम-राम है।

4. लातों के भूत बातों से नहीं मानते-(शरारती समझाने से वश में नहीं आते)- सलीम बड़ा शरारती है, पर उसके अब्बा उसे प्यार से समझाना चाहते हैं। किन्तु वे नहीं जानते कि लातों के भूत बातों से नहीं मानते।

5. सहज पके जो मीठा होय-(धीरे-धीरे किए जाने वाला कार्य स्थायी फलदायक होता है)- विनोबा भावे का विचार था कि भूमि सुधार धीरे-धीरे और शांतिपूर्वक लाना चाहिए क्योंकि सहज पके सो मीठा होय।

6. साँप मरे लाठी न टूटे-(हानि भी न हो और काम भी बन जाए)- घनश्याम को उसकी दुष्टता का ऐसा मजा चखाओ कि बदनामी भी न हो और उसे दंड भी मिल जाए। बस यही समझो कि साँप भी मर जाए और लाठी भी न टूटे।

7. अंत भला सो भला-(जिसका परिणाम अच्छा है, वह सर्वोत्तम है)- श्याम पढ़ने में कमजोर था, लेकिन परीक्षा का समय आते-आते पूरी तैयारी कर ली और परीक्षा प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण की। इसी को कहते हैं अंत भला सो भला।

8. चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए-(बहुत कंजूस होना)- महेंद्रपाल अपने बेटे को अच्छे कपड़े तक भी सिलवाकर नहीं देता। उसका तो यही सिद्धान्त है कि चमड़ी जाए पर दमड़ी न जाए।

9. सौ सुनार की एक लुहार की-(निर्बल की सैकड़ों चोटों की सबल एक ही चोट से मुकाबला कर देते है)- कौरवों ने भीम को बहुत तंग किया तो वह कौरवों को गदा से पीटने लगा-सौ सुनार की एक लुहार की।

10. सावन हरे न भादों सूखे-(सदैव एक-सी स्थिति में रहना)- गत चार वर्षों में हमारे वेतन व भत्ते में एक सौ रुपए की बढ़ोत्तरी हुई है। उधर 25 प्रतिशत दाम बढ़ गए हैं-भैया हमारी तो यही स्थिति रही है कि सावन हरे न भागों सूखे।

11. आ बैल मुझे मार = जान बूझकर लड़ाई मोल लेना

12. आगे नाथ न पीछे पगहा = पूर्ण रूप से आज़ाद होना

13. अपना हाथ जगन्नाथ = अपना किया हुआ काम लाभदायक होता है

14. अब पछताए होत क्या जब चिड़िया चुग गयी खेत = पहले सावधानी न बरतना और बाद में पछताना

15. आगे कुआँ पीछे खाई = सभी और से विपत्ति आना

16. ऊंची दूकान फीका पकवान = मात्र दिखावा

17. उल्टा चोर कोतवाल को डांटे = अपना दोष दूसरे के सर लगाना

18. उंगली पकड़कर पहुंचा पकड़ना = धीरे धीरे साहस बढ़ जाना

19. उलटे बांस बरेली को = विपरीत कार्य करना

20. उतर गयी लोई क्या करेगा कोई = इज्ज़त जाने पर डर कैसा

महत्वपूर्ण लोकोक्तियाँ भाग – 1 जरूर पढ़े

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