न्यूलैंड का अष्टक नियम क्या है?

By Raj Vimal|Updated : September 6th, 2022

न्यूलैंड का अष्टक नियम - साल 1864 में वैज्ञानिक जॉन एलेक्जैंडर न्यूलैंडस ने जब रासयनिक तत्वों को बढ़ते क्रम में उनके परमाणु भार के अनुसार व्यवस्थित किया, तब उन्हें समझ आया की हर 8वां तत्व पहले तत्व के अनुसार ही गुण रखता है। आसन भाषा में कहें तो, न्यूलैंड के अष्टक नियम के अनुसार हर आठवां तत्व पहले तत्व के गुणधर्म के बराबर है।

न्यूलैंड का अष्टक नियम, दोष

उन्होंने इस नियम को संगीत के सप्तक सुरों की तरह अष्टक नियम नाम दिया, क्योंकि यह संगीत के तरह ही हर आठवां सुर, पहले सुर की पुनरावृति जैसा प्रतीत होता है। तब से यह न्यूलैंड का अष्टक नियम ( Newlands’ Law of Octaves) कहा जाता है। उदाहरण के लिए पहला तत्व लिथियम (Li) के गुण आठवें तत्व सोडियम (Na) के सामान है।

न्यूलैंड के अष्टक नियम का दोष - इस नियम का सबसे बड़ा दोष यह है कि यह केवल कैल्सियम (Ca) तक ही काम करता है। कैल्सियम का परमाणु द्रव्यमान करीब 40 है। इसके बाद के तत्व इस नियम से वर्गीकृत नहीं किये जा सकते हैं।

Summary

न्यूलैंड का अष्टक नियम क्या है?

रसायनशास्त्र में परमाणु भार के अनुसार बढ़ते क्रम में सजाने पर हर पहले तत्व और आठवें तत्व का गुण सामान होता है, यही न्यूलैंड का अष्टक नियम है। हालाँकि इस नियम के कुछ दोष भी हैं।

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