अनुवांशिकी के जनक कौन हैं?

By Raj Vimal|Updated : September 1st, 2022

अनुवांशिक के जनक ग्रेगर जान मेण्डल है। माता और पिता से अगली पीढ़ी को आसानी से संचरित होने वाले मौलिक गुण ही आनुवांशिक गुण कह जाते हैं। आनुवांशिक गुणों के अगली पीढ़ी में संचरण की प्रक्रिया और उसके कारणों का विस्तार से अध्ययन ही आनुवांशिकी कहलाता है। ग्रेगर जान मेंडल को अनुवांशिकी जनक को कहा जाता है।

अनुवांशिकता के नियम 

  1. इकाई का नियम - यह सबको पता होता है कि किसी जीव में अनेक व्यक्तिगत लक्षण होते हैं। हर प्राणी के प्रत्येक लक्षण स्वतंत्र होता है। हर एक ऐसे लक्षण को इकाई लक्षण कहते हैं। उदाहरण के लिए जैसे किसी पौधे या पेड़ का लंबा या बौना होना होता है। यह आनुवंशिकता का पहला नियम है।
  2. प्रभाविता का नियम - जब दो विपरीत एलील किसी जीवधारी में एक साथ आते हैं, तब उनमें से केवल एक बाहरी रुप से दिखाई पड़ता है और दूसरा दबा हुआ रहता है।
  3. पृथकरण का नियम - इस सिद्धांत को युग्मको कि शुद्धता का सिद्धांत भी कहा जाता है।

Summary

अनुवांशिकी के जनक कौन हैं?

ग्रेगर जान मेंडल अनुवांशिकी के जनक हैं। यह बायोलॉजी की वह शाखा है जिसमें अन्तर्गत आनुवंशिकता (हेरेडिटी) का अध्ययन किया जाता है। जब एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी में संचारित होने वाले लक्षण आनुवंशिक लक्षण कहलाते हैं।

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