यूपीएससी (UPSC) कृषि वैकल्पिक विषय पाठ्यक्रम (Agriculture Optional Syllabus): अद्यतन पाठ्यक्रम की पीडीएफ डाउनलोड करें

By Shubhra Anand Jain|Updated : August 30th, 2022

यूपीएससी (UPSC) कृषि वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम या सिलेबस में उन विषयों को शामिल किया गया है जो अभ्यर्थियों को पारिस्थितिकी, कृषि विज्ञान, खरपतवार विज्ञान, कोशिका जीव विज्ञान और कई अन्य बुनियादी अवधारणाओं को समझने में मदद करेंगे। यदि अभ्यर्थी कृषि पृष्ठभूमि से है, तो उसे यूपीएससी कृषि सिलेबस को कवर करना बहुत ही सरल होगा।

अभ्यर्थी को यूपीएससी कृषि वैकल्पिक विषय के सिलेबस की पूरी संरचना की जानकारी होनी चाहिए, इससे अभ्यर्थी को परीक्षा में अच्छा स्कोर करने में मदद मिलेगी। आइए नीचे दिए गए यूपीएससी (UPSC) कृषि विषय के सिलेबस पर एक नजर डालते हैं।

Table of Content

यूपीएससी (UPSC) कृषि (Agriculture) विषय के सिलेबस का अवलोकन

अभ्यर्थी को UPSC कृषि वैकल्पिक विषय के सिलेबस एवं परीक्षा में प्रश्नपत्रों के बारे में पता होना चाहिए। संघ लोक सेवा आयोग की मुख्य परीक्षा में वैकल्पिक विषय के दो प्रश्न-पत्र या पेपर होते हैं- जैसे कि पेपर 1 और पेपर 2 । प्रत्येक पेपर के लिए निर्धारित अंक 250 हैं, इस प्रकार दोनों पेपरों के कुल अंकों का योग 500 होता हैं।

कृषि वैकल्पिक विषय के लिए UPSC सिलेबस

विषय / टॉपिक

UPSC कृषि सिलेबस पेपर 1

इकोलोजी

कृषि विज्ञान

खरपतवार विज्ञान

वानिकी

मृदा विज्ञान और पोषक तत्व प्रबंधन

मृदा और जल संरक्षण

कृषि अर्थशास्त्र

कृषि विस्तार

UPSC कृषि सिलेबस पेपर 2

कोशिका जीव विज्ञान

वनस्पति प्रजनन

बीज उत्पादन और प्रौद्योगिकी

वनस्पति फिजियोलॉजी

बागवानी और लैंडस्केप बागवानी

पौधा संरक्षण तकनीक

खाद्य उत्पादन और पोषण प्रबंधन

UPSC कृषि विषय के सिलेबस की पीडीएफ डाउनलोड करें

आप नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके सरलता से हिंदी और अंग्रेजी दोनों में UPSC कृषि विषय का सिलेबस डाउनलोड कर सकता है। इसके अतिरिक्त, आपको मुख्य परीक्षा के सिलेबस के बारे में पूरी तरह से पता होना चाहिए।

पेपर 1 के लिए UPSC कृषि विषय का पाठ्यक्रम

UPSC कृषि विषय का सिलेबस बहुत विस्तृत है और इसमें पेपर 1 में 6 विषय/टॉपिक हैं जिन्हें आगे उप-विषयों में विभाजित किया गया है।

कृषि विज्ञान - प्रश्न पत्र 1

  • पारिस्थितिकी एवं मानव के लिए उसकी प्रासंगिकता प्राकृतिक संसाधन, उनके अनुरक्षण का प्रबंध तथा संरक्षण, सस्य वितरण एवं उत्पादन के कारकों के रूप में भौतिक एवं सामाजिक पर्यावरण कृषि पारिस्थितिकी पर्यावरण के संकेतक के रूप में सस्य क्रम; पर्यावरण प्रदूषण एवं फसलों को होने वाले इससे संबंधित खतरे; पशु एवं मान, जलवायु परिवर्तन-अंतर्राष्ट्रीय अभिसमय एवं भूमंडलीय पहल, ग्रीन हाउस प्रभाव एवं भूमंडलीय तापन, पारितंत्र विश्लेषण के प्रगत उपकरण, सुदूर संवेदन एवं भौगोलिक सूचना प्रणालियां।
  • देश के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों में सस्य क्रम, सस्यक्रम में विस्थापन पर अधिक पैदावार वाली तथा अल्पावधि किस्मों का प्रभाव, विभिन्न सस्यन एवं कृषि प्रणालियों की संकल्पनाएं जैव एवं परिशुद्धता कृषि, महत्वपूर्ण अनाज, दलहन, तिलहन, रेशा, शर्करा, वाणिज्यिक एवं चार फसलों के उत्पादन हेतु पैकेज रीतियां।
  • विभिन्न प्रकार के वनरोपण जैसे कि सामाजिक वानिकी, कृषि वानिकी एवं प्राकृतिक वन की मुख्य विशेषताएं तथा विस्तार, वन पादपों का प्रसार, वनोत्पाद, कृषि वानिकी एवं मूल्य परिवर्धन; वन की वनस्पतियों और जंतुओं का संरक्षण
  • खरपतवार, उनकी विशेषताएं प्रकीर्णन तथा विभिन्न फसलों के साथ उनकी संबद्धता, उनका गुणन, खरपतवारों संबंधी जैव तथा रासायनिक नियंत्रण।
  • मृदा- भौतिक, रासायनिक तथा जैविक गुणधर्म, मृदा रचना के प्रक्रम तथा कारक, भारत की मृदाएं, मृदाओं के खनिज तथा कार्बनिक संघटक तथा मृदा उत्पादकता अनुरक्षण में उनकी भूमिका, पौधो के लिए आवश्यक पोषक तत्व तथा मृदाओं और पादपों के अन्य लाभकर तत्व मृदा उर्वरता, मृदा परीक्षण एवं संस्तावना के सिद्धांत, समाकलित पोषकतत्व प्रबंध जैव उर्वरक मृदा में नाइट्रोजन की हानि, जलमग्न धान मृदा में नाइट्रोजन उपयोग क्षमता मृदा में नाइट्रोजन योगिकीकरण, फासफोरस एवं पोटेशियम का दक्ष उपयोग, समस्याजनक मृदाएं तथा उनका सुधार, ग्रीन हाउस गैस उत्सर्जन को प्रभावी करने वाले मृदा कारक, मृदा संरक्षणः समाकलित जल विभाजन प्रबंधन, मृदा अपरदन एवं इसका प्रबंधन, वर्षाधीन कृषि और इसकी समस्याएं, वर्षा पोषित कृषि क्षेत्रों में कृषि उत्पादन में स्थिरता लाने की प्रौद्योगिकी।
  • सस्य उत्पादन से संबंधित जल उपयोग क्षमता, सिंचाई कार्यक्रम के मानदंड: सिंचाई जल की अपवाह हानि को कम करने की विधियण तथा साधन, ड्रिप तथा छिड़काव द्वारा सिंचाई, जलक्रांत मृदाओं से जलनिकास सिंचाई जल की गुणवत्ता, जल मृदा तथा जल प्रदूषण पर औद्योगिक बहिस्त्राव का प्रभाव, भारत में सिंचाई परियोजनाएं।
  • फार्म प्रबंधन, विस्तार, महत्व तथा विशेषताएं: फार्म आयोजना संसाधनों का इष्टतम उपयोग तथा बजटन, विभिन्न प्रकार की कृषि प्रणालियों का अर्थशास्त्र, विपणन प्रबंधन विकास की कार्यनीतिया । बाजार आसूचना; कीमत में उतार-चढ़ाव एव उनकी लागत कृषि अर्थव्यवस्था में सहकारी संस्थाओं की भूमिका, कृषि के प्रकार तथा प्रणालिया और उनको प्रभावन्ति करने वाले कारक: कृषि कीमत नीति, फसल बीमा I
  • कृषि विस्तार इसका महत्व और भूमिका, कृषि विस्तार कार्यक्रमों के मूल्यांकन की विधिया, सामाजिक आर्थिक सर्वेक्षण तथा छोटे बड़े और सीमांत कृषकों व भूमिहीन कृषि श्रमिकों की स्थिति, विस्तार कार्यकर्ताओं के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम, कृषि प्रौद्योगिकी के प्रसार में कृषि विज्ञान केन्द्रों की भूमिका, गैर सरकारी संगठन तथा ग्रामीण विकास के लिए स्व-सहायता उपागम।

पेपर 2 के लिए UPSC कृषि विषय का पाठ्यक्रम (Agriculture Optional Syllabus)

यूपीएससी (UPSC) कृषि वैकल्पिक विषय के सिलेबस के पेपर 2 में कुल 6 विषय/टॉपिक हैं जिन्हें आगे उप-विषयों में विभाजित किया गया है।

प्रश्न पत्र 2

  • कोशिका संरचना, प्रकार्य एवं कोशिका चक्र, आनुवंशिक उत्पादन का संश्लेषण, संरचना तथा प्रकार्य, आनुवंशिकता के नियम, गुणवत्ता संरचना, गुणसूत्र विपयन सहलग्नता एवं जीन विनिमय एवं पुर्नयोजन प्रजनन में उनकी सार्थकता बहुगुणिता सुगुणित तथा असुगुणित, उत्परिवर्तन एवं सस्य सुधार में उनकी भूमिका वंशागतित्व, बंध्यता तथा असंयोज्यता वर्गीकरण तथा सस्य सुधार में उनका अनुप्रयोग, कोशिका द्रव्यी वंशागति, लिंग सहलग्न, लिंग प्रभावित तथा लिंग सीमित लक्षण I
  • पादप प्रजनन का इतिहास, जनन की विधियां स्वनिशेचन तथा संस्करण प्रविधियां, सस्य पादप का उदगम, विकास एवं उपजाया जाना, उदगम केन्द्र समजात श्रेणी का नियम सस्य आनुवंशिक संसाधन-संरक्षण तथा उपयोग: सस्य पादपों का सुधार आणविक सूचक एवं पादप सुधार में उनका अनुप्रयोग, शुद्ध वंशक्रम वरण वंशावली समूह तथा पुनरावर्ती वरण: संयोजी क्षमता पादप प्रजनन में इसका महत्व, संकर ओज एवं उसका उपयोग काय संस्करण, रोग एवं पीड़क प्रतिरोध के लिए प्रजनन।
  • अंतराजातीय तथा अंतरावंशीय सकरण की भूमिका, सस्य सुधार में आनुवंशिक इंजीनियरी एवं जैव प्रौद्योगिकी की भूमिका आनुवंशिकता, रूपा तरित सस्य पादप I
  • बीज उत्पादन एवं प्रसंसकरण प्रौद्योगिकिया, बीज प्रमाणन बीज परीक्षण एवं भंडारण डीएनए फिंगर प्रिंटिंग एवं बीज पंजीकरण, बीज उत्पादन एवं विपणन में सहकारी एवं निजी स्रोतों की भूमिका बौदधिक संपदा अधिकार संबंधी मामले।
  • पादप पोषण पोषक तत्वों के अवशोषण, स्थानांतरण एवं उपापचय के संदर्भ में पादप कार्यिकी के सिद्धांत, मृदा जल पादप संबंध।
  • प्रकिण्व एवं पादप-वर्णक, प्रकाश संश्लेषण-आधुनिक सकल्पनाएं और इसके प्रक्रम को प्रभावित करने वाले कारक, आक्सी व अनाक्सी स्वशन, C3, C4 एवं CAM क्रियाविधिया, कार्बोहाइट्रेट प्रोटीन एवं वसा उपापचय वृद्धि एवं परिवर्धन, दीप्ति कालिता एवं वसतीकरण, पादप वृद्धि उपादान एवं संस्य उत्पादन में इनकी भूमिका, बीज परिवर्धन एवं अन ुकरण की कार्यिकी प्रसूप्ति प्रतिबल, कार्यिकी वात प्रवाह, लवण एवं जल प्रतिबल, प्रमुख फल, बागान, फसल, सब्जिया, मसाले एवं पुष्पी फसल प्रमुख बागवानी फसलों की पैकेज की रीतिया, संरक्षित कृषि एवं उच्च तकनीकी बागवानी, तुडाई के बाद की प्रौद्योगिकी एवं फल व सब्जियों का मूल्यवर्धन भूसुदर्शनीकरण एवं वाणिज्यिक पुष्प कृषिः औषधीय एवं एरोमेटिक पौधे, मानव पोषण में फलों व सब्जियों की भूमिका, पीड़कों एवं फसल, सब्जियाँ, फलोद्यानों एवं बागान फसलों के रोगों का निदान एवं उनका आर्थिक महत्व पौडको एवं रोगों का वर्गीकरण एवं उनका प्रबंधन पीड़कों एवं रोगों का जीव वैज्ञानिक रोकथाम: जानपदिक रोग विज्ञान एवं प्रमुख फसलों को पीड़कों व रोगों का पूर्वानुमान, पादप संगरोध उपाय, पीड़क नाशक, उनका सूत्रण एवं कार्य प्रकार I
  • भारत में खाद्य उत्पादन एवं उपभोग की प्रवृत्तिया, खाद्य सुरक्षा एवं जनसंख्या वृद्धि-दृष्टि 2020 अन्य अधिशेष के कारण, राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय खादय नीतियां, अधिप्राप्ति वितरण की बाध्यताएं, खाद्यानों की उपलब्धता, खाद्य पर प्रतिव्यक्ति व्यय गरीबी की प्रवृत्तिया जन वितरण प्रणाली तथा गरीबी की रेखा के नीचे की जनसंख्या लक्ष्योन्मुखी जन वितरण प्रणाली (PDS) भूमंडलीकरण के संदर्भ में नीति कार्यान्वयन प्रक्रम बाध्यताए: खादय उत्पादन का राष्ट्रीय आहार, दिशा-निर्देश एवं खाद्य उपभोग प्रवृत्ति से संबंध क्षुधाशमन के लिए खायाधारित आहार उपागम पोषक तत्वों की न्यूनता सूक्ष्म पोषक तत्व न्यूनता, प्रोटीन ऊर्जा कुपोषण या प्रोटीन कैलोरी कुपोषण (PEM या PCM). महिलाओं और बच्चों की कार्यक्षमता के संदर्भ में सूक्ष्म पोषण तत्व न्यूनता एवं मानव संसाधन विकास, खाद्यान्न उत्पादकता एवं खादय सुरक्षा I

यूपीएससी (UPSC) कृषि वैकल्पिक विषय का सिलेबस- तैयारी के लिए टिप्स

यूपीएससी (UPSC) कृषि वैकल्पिक विषय के संपूर्ण सिलेबस को कवर करने के लिए नीचे दिए गए कुछ सुझावों का पालन कर आप रणनीतिक रूप से अपनी तैयारी को आगे बढ़ा सकते हैं।

  • सिलेबस को अच्छे से समझना

UPSC कृषि विषय के पूरे सिलेबस को समझना और उसका विश्लेषण करना अनिवार्य है। यदि आप इस परीक्षा में उत्कृष्ट करना चाहते हैं, तो आपको अपने सिलेबस के बारे में पूरी जानकारी होनी चाहिए।

  • परीक्षा की तैयारी के लिए अच्छी पुस्तकों का चयन करें

अभ्यर्थी को अपनी परीक्षा की तैयारी के लिए सर्वश्रेष्ठ पुस्तकों का चयन करना चाहिए। कृषि विस्तार शिक्षा, आनुवंशिकी, कृषि विज्ञान, बागवानी का परिचय, पादप प्रजनन और ऐसी बहुत सी पुस्तकें परीक्षा की तैयारी के लिए अच्छी हैं।

  • परीक्षा के लिए एक अध्ययन योजना तैयार करें

अध्ययन योजना परीक्षा की तैयारी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। प्रत्येक अभ्यर्थी को अपने लिए एक अध्ययन योजना बनानी चाहिए ताकि वे परीक्षा में अच्छे अंक प्राप्त कर सकें। आपको मासिक, साप्ताहिक, दैनिक रूप से एक रणनीति योजना बनानी चाहिए और उसका सख्ती से पालन करना चाहिए।

  • महत्वपूर्ण विषयों को सिलेबस से अलग करें

महत्वपूर्ण विषयों को हमेशा अलग रखें और उन पर छोटे-छोटे नोट्स बनाएं; और उन्हें नियमित रूप से याद करें। विभिन्न विषयों के वेटेज का पता लगाने के लिए आप प्रश्न पत्रों को हल कर सकते हैं।

  • पिछले वर्षों के प्रश्नपत्रों को हल करें

अपने पूरे सिलेबस को पूरा करने के बाद, आपको पिछले वर्ष के प्रश्नपत्रो को हल करना चाहिए, जिससे आपको अपने कमजोर और मजबूत पक्षों का पता चल सके और फिर आप उसके अनुसार तैयारी कर सकें।

UPSC कृषि वैकल्पिक विषय के सिलेबस के लिए बुकलिस्ट

UPSC कृषि वैकल्पिक विषय के सिलेबस की तैयारी के लिए कुछ किताबें नीचे दी गई हैं।

महत्वपूर्ण पुस्तकें

प्रकाशक का नाम

कृषि विस्तार शिक्षा की मूल बातें

यु. ब्रामन

कृषि सांख्यिकी की पाठ्यपुस्तक

आर. रंगास्वामी

कृषि विज्ञान

येलामांडा रेड्डी

कीट विज्ञान

वसंत राज और डेविड

जेनेटिक्स

बी.डी.सिंह

कृषि की हैंडबुक

आईसीएआर

बागवानी का परिचय

कुमार

फिजियोलॉजी

पांडे और सिंघा

प्लांट ब्रीडिंग

बी.डी. सिंह

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FAQs on यूपीएससी कृषि वैकल्पिक विषय पाठ्यक्रम

  • यूपीएससी के कृषि पाठ्यक्रम में शामिल विषय इस प्रकार हैं : पारिस्थितिकी, कृषि विज्ञान, खरपतवार विज्ञान, कोशिका जीव विज्ञान, पादप प्रजनन, पादप संरक्षण तकनीक और भी बहुत कुछ।

  • हां, उम्मीदवार आपके स्नातक की पढ़ाई के साथ-साथ कृषि के लिए यूपीएससी पाठ्यक्रम को स्वतंत्र रूप से पूरा कर सकते हैं। यदि आप दोनों परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं, तो आपको मुख्य नोट्स बनाना, अध्ययन कार्यक्रम तैयार करना और परीक्षा में अच्छा स्कोर करने के लिए संपूर्ण पाठ्यक्रम का ठीक से विश्लेषण करना जैसे महत्वपूर्ण चरणों को पूरा करना होगा। यदि आप दोनों परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं तो आपको अतिरिक्त समय देना होगा और प्रयास करना होगा।

  • यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा पाठ्यक्रम के पर्यावरण और भूगोल खंड में, पारिस्थितिकी, मिट्टी, कृषि पैटर्न और प्रथाओं जैसे विषयों की मूल विषयों में संबंधित प्रश्न पूछे जाते हैं।

  • कृषि में कई विषयों का सामान्य अध्ययन के प्रश्नपत्रों के साथ सीधा ओवरलैप होता है, ऐसा विशेष तौर पर भूगोल और अर्थव्यवस्था में होता है। इस तरह, यूपीएससी मुख्य पाठ्यक्रम की तैयारी आसानी से की जा सकती है क्योंकि कृषि पाठ्यक्रम और सामान्य अध्ययन मुख्य परीक्षा पाठ्यक्रम के बीच कई विषय ओवरलैप होते हैं।

  • वनस्पति विज्ञान एक मुख्य विज्ञान विषय है और यूपीएससी में वनस्पति विज्ञान एक वैकल्पिक विषय के रूप में भी उपलब्ध है। हालांकि, यूपीएससी कृषि वैकल्पिक पाठ्यक्रम का प्रश्नपत्र 2 यूपीएससी के वनस्पति विज्ञान पाठ्यक्रम के समान है। किसी एक को चुनने के लिए आपको दोनों विषयों का विश्लेषण करना होगा। यदि कुशलता से तैयारी की जाए, तो कृषि पाठ्यक्रम को आसानी से कवर किया जा सकता है।

  • यूपीएससी परीक्षा की तैयारी के लिए आपको अध्ययन के लिए योजना बनानी होगी। आपको अपना पूरा पाठ्यक्रम समाप्त करना होगा और जिन महत्वपूर्ण विषयों के लिए अतिरिक्त समय और प्रयास की आवश्यकता होगी उन पर विशेष ध्यान देना होगा। यदि आप ठीक से तैयारी करें तो आप यूपीएससी कृषि पाठ्यक्रम को 6 महीने में आसानी से पूरा कर सकते हैं।

  • आप यूपीएससी की आधिकारिक वेबसाइट से यूपीएससी कृषि पाठ्यक्रम को आसानी से डाउनलोड कर सकते हैं। उम्मीदवारों को यूपीएससी कृषि के पाठ्यक्रम को डाउनलोड करने के लिए लिंक दिया गया है।

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