राजस्थान में लोकायुक्त का कार्यकाल कितना होता है?

By Sakshi Yadav|Updated : August 24th, 2022

राजस्थान में लोकायुक्त का कार्यकाल पांच वर्ष का होता है। राजस्थान लोकायुक्त राज्य के संसदीय लोकपाल होते है। यह एक उच्च स्तरीय पदाधिकारी है, जिनका मुख़्य काम मंत्री, विधायक, प्रशासन और लोक सेवक के दुरुपयोग और भ्रष्टाचार से संबंधित मुद्दों पर जनता की शिकायतों को दूर करना होता है।

  • यह पहली बार राजस्थान लोकायुक्त और उप लोकायुक्त अधिनियम के तहत गठित किया गया था, और भारत के राष्ट्रपति द्वारा इसकी अनुमति दी गई थी। ये अधिनियम साल 2013 में संसद में पारित हुआ और 16 जनवरी,2014 को लागू हो गया था। इस कानून के पारित होने के बाद सभी राज्य को एक वर्ष के अंदर अपना लोकायुक्त नियुक्त करना ज़रूरी था। 
  • किसी भी राज्य का लोकायुक्त को राज्य के मुख्यमंत्री, विधानसभा के अध्यक्ष, विपक्ष के नेता, विधान परिषद के अध्यक्ष और विधान परिषद के विपक्ष के नेता की समिति से राय लेने के बाद राज्यपाल द्वारा नियुक्त किया जाता है। 
  • संविधान के अनुच्छेद 236 के खंड (बी) के अनुसार उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश, न्यायाधीश या न्यायिक सेवा के सदस्य ही राजस्थान में लोकायुक्त का कार्यकाल संभल सकते है। 

Summary

राजस्थान में लोकायुक्त का कार्यकाल कितना होता है?

राजस्थान राज्य में लोकायुक्त का कार्यकाल पांच साल का होता है। लोकायुक्त का काम राजनेताओं और अधिकारियों के खिलाफ सार्वजनिक शिकायतों का समाधान करना होता है। श्री आई डी दुआ राजस्थान के पहले लोकायुक्त बने थे।

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