गोल्डन फाइबर किसे कहा जाता है?

By Sakshi Yadav|Updated : August 24th, 2022

गोल्डन फाइबर जूट को कहा जाता है। इसे गोल्डन फाइबर इसलिए कहते क्योंकि यह सबसे सस्ता, किफायती और 100% बायोडिग्रेडेबल फाइबर होता है। इसे सेल्यूलोज और लिग्निन संयंत्र सामग्री से बनाते है। जूट उत्पादन के लिए सबसे ज्यादा उपजाऊ क्षेत्र भारत और बांग्लादेश को माना जाता है।

  • जूट के पौधे को जलोढ़ मिट्टी और खड़े पानी में उगाया जाता है। इसे उगने के लिए मानसून का मौसम सबसे सही होता है क्योकि मानसून की जलवायु जूट (गर्म और गीला) उगाने के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करती है।
  • जुटे की अच्छी खेती के लिए 20 से 40 डिग्री सेल्सियस (68-104 डिग्री फारेनहाइट) का तापमान और 70% -80% की सापेक्ष आर्द्रता जरूरी है। जूट उत्पादन के लिए शीतल जल आवश्यक है।
  • जूट का व्यापार सबसे ज्यादा दक्षिण एशिया में होता है, वही भारत और बांग्लादेश जूट के प्राथमिक उत्पादक हैं। अधिकांश जूट का उपयोग टिकाऊ पैकेजिंग के लिए किया जाता है जैसे की कॉफी बैग, बोरी और फर्श की चटाई।

Summary

गोल्डन फाइबर किसे कहा जाता है?

जूट को गोल्डन फाइबर कहा जाता है। जूट अपनी लंबाई और सस्तेपन के कारण गोल्डन फाइबर के नाम से जाना जाता है। इसका इस्तमाल चटाई, सुतली,रस्सी और चीनी के साथ मिश्रित जूट हवाई जहाज के हिस्से के उत्पादन में उपयोग किया जाता है।

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