चीनी यात्री फाह्यान किसके समय भारत आये थे?

By K Balaji|Updated : January 18th, 2023

चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान पांचवीं शताब्दी में चीनी यात्री फाह्यान भारत आये थे। उन्होंने पांचवीं शताब्दी की शुरुआत में भारत का दौरा किया और उत्तर पश्चिम से यहां प्रवेश किया और पाटलिपुत्र पहुंचे। यहाँ, एक महायान मठ में, उन्हें विनय पिटक की एक प्रति मिली, जिसमें संस्कृत में लिखे महासांघिक नियम थे। इसलिए, वह लगभग तीन वर्षों तक पाटलिपुत्र में रहे, संस्कृत सीखी और विनय नियम लिखे।

फाह्यान की भारत यात्रा

फाहियान, जिसे फैक्सियन भी कहा जाता है, एक चीनी बौद्ध सन्यासी था, जो चंद्रगुप्त द्वितीय के शासन के दौरान भारत आया था। बौद्ध धर्म और बौद्ध ग्रंथों का अध्ययन करने के लिए उन्होंने सिर्फ भारत के अलावा कई अन्य एशियाई देशों की यात्रा की। वह एक व्यापारी जहाज पर चीन लौटा, जिस पर वह अपनी यात्रा समाप्त करने के बाद ताम्रलिप्ति के बंदरगाह पर चढ़ा था।

पाटलिपुत्र शहर में, फा-हियान ने लगभग तीन साल संस्कृत का अध्ययन किया। वह भारत को एक सक्षम नेता के साथ एक शांतिपूर्ण राष्ट्र के रूप में वर्णित करता है।

  • फाह्यान, भारत बौद्ध धर्मग्रंथों की प्रामाणिक प्रतियों की तलाश और बौद्ध किंवदंतियों, मठों और मंदिरों के बारे में जानकारी लेने आये थे।
  • अपनी यात्रा पूरी करने के बाद, फाह्यान एक व्यापारी जहाज पर वापस गए थे जिसपर वो ताम्रलिप्ति के बंदरगाह से सवार हुए थे।
  • अपनी यात्रा पर उन्होंने एक पुस्तक भी लिखी थी।
  • वह आधुनिक नेपाल में गौतम बुद्ध के जन्मस्थान लुंबिनी की तीर्थयात्रा के लिए सबसे अधिक जाने जाते थे।
  • फा-हेन चीन से भारत आने वाले पहले यात्री थे। उन्होंने पाटलिपुत्र शहर में लगभग तीन वर्षों तक संस्कृत भाषा का अध्ययन किया।
  • उन्होंने भारत में बौद्ध धर्म की संस्कृति और गुप्त साम्राज्य के अपने सभी अनुभवों को अपनी एक पुस्तक 'बौद्धिक साम्राज्यों का रिकॉर्ड' में लिखा था। उसके अलवा फाह्यान कई देशों का भूगोल और इतिहास भी उस पुस्तक में लिखा था।

Summary:

चीनी यात्री फाह्यान किसके समय भारत आये थे?

फाह्यान चंद्रगुप्त द्वितीय के शासनकाल के दौरान एक धार्मिक मिशन पर भारत आया थे। फाह्यान एक चीनी तीर्थयात्री थे। उन्होंने चीन से भारत तक पैदल यात्रा की और समुद्री मार्ग से वापस लौट कर गए थे। ऐसा कहा जाता है कि वह 10 साल तक भारत में रहे थे।

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