महत्वपूर्ण लोकोक्तियाँ : भाग – 1

By Arpit Kumar Jain|Updated : December 14th, 2021

प्रिय पाठकों,

DSSSB, TET और अन्य शिक्षण परीक्षाओं में हिन्दी भाग से विभिन्न प्रश्न पूछे जाते है ये प्रश्न आप बहुत आसानी से हल कर सकते है यदि आप हिंदी भाषा से सम्बंधित विभिन्न टॉपिक के प्रश्नों का अभ्यास करे, हम हिंदी भाषा पर बहुत महत्वपूर्ण श्रृंखला की शुरुवात कर रहे है जो की आगामी TET, DSSSB और अन्य शिक्षण परीक्षाओ में बहुत ही सहायक होगी ।

 

महत्वपूर्ण लोकोक्तियाँ:

1. अधजल गगरी छलकत जाए - (कम गुण वाला व्यक्ति दिखावा बहुत करता है) - श्याम बातें तो ऐसी करता है जैसे हर विषय में मास्टर हो, वास्तव में उसे किसी विषय का भी पूरा ज्ञान नहीं-अधजल गगरी छलकत जाए।

2. अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गई खेत - (समय निकल जाने पर पछताने से क्या लाभ) - सारा साल तुमने पुस्तकें खोलकर नहीं देखीं। अब पछताए होत क्या, जब चिड़ियाँ चुग गई खेत।

3. आम के आम गुठलियों के दाम - (दुगुना लाभ) - हिन्दी पढ़ने से एक तो आप नई भाषा सीखकर नौकरी पर पदोन्नति कर सकते हैं, दूसरे हिन्दी के उच्च साहित्य का रसास्वादन कर सकते हैं, इसे कहते हैं-आम के आम गुठलियों के दाम।

4. ऊँची दुकान फीका पकवान - (केवल ऊपरी दिखावा करना) - कनॉटप्लेस के अनेक स्टोर बड़े प्रसिद्ध है, पर सब घटिया दर्जे का माल बेचते हैं। सच है, ऊँची दुकान फीका पकवान।

5. घर का भेदी लंका ढाए  -(आपसी फूट के कारण भेद खोलना) - कई व्यक्ति पहले कांग्रेस में थे, अब जनता (एस) पार्टी में मिलकर काग्रेंस की बुराई करते हैं। सच है, घर का भेदी लंका ढाए।

6. जिसकी लाठी उसकी भैंस - (शक्तिशाली की विजय होती है) - अंग्रेजों ने सेना के बल पर बंगाल पर अधिकार कर लिया था-जिसकी लाठी उसकी भैंस।

7. जल में रहकर मगर से वैर - (किसी के आश्रय में रहकर उससे शत्रुता मोल लेना) - जो भारत में रहकर विदेशों का गुणगान करते हैं, उनके लिए वही कहावत है कि जल में रहकर मगर से वैर।

8. थोथा चना बाजे घना - (जिसमें सत नहीं होता वह दिखावा करता है) - गजेंद्र ने अभी दसवीं की परीक्षा पास की है, और आलोचना अपने बड़े-बड़े गुरुजनों की करता है। थोथा चना बाजे घना।

9. दूध का दूध पानी का पानी - (सच और झूठ का ठीक फैसला) - सरपंच ने दूध का दूध,पानी का पानी कर दिखाया, असली दोषी मंगू को ही दंड मिला।

10. दूर के ढोल सुहावने - (जो चीजें दूर से अच्छी लगती हों) - उनके मसूरी वाले बंगले की बहुत प्रशंसा सुनते थे किन्तु वहाँ दुर्गंध के मारे तंग आकर हमारे मुख से निकल ही गया-दूर के ढोल सुहावने।

11. न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी - (कारण के नष्ट होने पर कार्य न होना) - सारा दिन लड़के आमों के लिए पत्थर मारते रहते थे। हमने आँगन में से आम का वृक्ष की कटवा दिया। न रहेगा बाँस, न बजेगी बाँसुरी।

12. नाच न जाने आँगन टेढ़ा-(काम करना नहीं आना और बहाने बनाना)- जब रवींद्र ने कहा कि कोई गीत सुनाइए, तो सुनील बोला, ‘आज समय नहीं है’। फिर किसी दिन कहा तो कहने लगा, ‘आज मूड नहीं है’। सच है, नाच न जाने आँगन टेढ़ा।

13. बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख- (माँगे बिना अच्छी वस्तु की प्राप्ति हो जाती है, माँगने पर साधारण भी नहीं मिलती) - अध्यापकों ने माँगों के लिए हड़ताल कर दी, पर उन्हें क्या मिला ? इनसे तो बैक कर्मचारी अच्छे रहे, उनका भत्ता बढ़ा दिया गया। बिन माँगे मोती मिले, माँगे मिले न भीख।

14. मान न मान मैं तेरा मेहमान-(जबरदस्ती किसी का मेहमान बनना)- एक अमेरिकन कहने लगा, मैं एक मास आपके पास रहकर आपके रहन-सहन का अध्ययन करूँगा। मैंने मन में कहा, अजब आदमी है, मान न मान मैं तेरा मेहमान।

15. मन चंगा तो कठौती में गंगा-(यदि मन पवित्र है तो घर ही तीर्थ है) - भैया रामेश्वरम जाकर क्या करोगे ? घर पर ही ईशस्तुति करो। मन चंगा तो कठौती में गंगा।

 

 

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