योग्यतम की अतिजीविता का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया था?

By Raj Vimal|Updated : September 9th, 2022

योग्यतम की अतिजीविता (survival of the fittest) का सिद्धांत वैज्ञानिक हरबर्ट स्पेंसर ने दिया। योग्यतम की अतिजीविता सिद्दांत के अनुसार वह जीव जो इस वातावरण में रहने के योग्य हैं, वह रहते हैं और जो योग्य नहीं हैं वह विलुप्त हो जाते हैं। उदाहरण के लिए मछलियों की संख्या ज्यादा नहीं होती है, क्योंकि वातावरण कि स्थिति के अनुसार उनकी उम्र तुरंत पूरी हो जाती है। इस सिद्धांत को बाद में चार्ल्स डार्विन ने प्रकृतिक चयनवाद में स्पष्ट किया।

चार्ल्स डार्विन का जन्म 12 फरवरी 1809 को हुआ था। उनका नाम मानव के विकास के लिए हुई शोधो से जोड़ा जाता है। उन्होंने ऐसे कई सिद्धांत विश्व को बताये जिसका उपयोग हमने मनुष्यों के विकास चक्र को समझने के लिए किया है। हालाँकि इनके दिए मानव विकास के सिद्धांत को बाद में कई वैज्ञानिकों ने गलत बताया और उन्होंने इसके अलग अलग कारण बताये हैं। 

Summary

योग्यतम की अतिजीविता का सिद्धांत किसने प्रतिपादित किया था?

वैज्ञानिक हरबर्ट स्पेंसर ने योग्यतम की अतिजीविता का सिद्धांत प्रतिपादित किया था। यह सिद्धांत आगे जाकर डार्विन ने स्पष्ट किया है। इसके अनुसार किसी जीव के जीवित रहने की क्षमता पर्यावरण के स्थिति पर निर्भर करती है।

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