विशेषण के कितने भेद होते हैं?

By Raj Vimal|Updated : August 12th, 2022

हिंदी व्याकरण में विशेषण एक बड़ा अहम भाग है। व्याकरण की परिभाषा के अनुसार, किसी भी संख्या या सर्वनाम की विशेषता बताने वाले शब्दों को विशेषण कहते हैं। जैसे हरा करेला तो इसमें विशेषण है, हरा। विशेषण के चार भेद होते हैं। इनके नाम निम्नलिखित हैं।

  • गुणवाचक विशेषण
  • संख्यावाचक विशेषण
  • परिणामवाचक विशेषण
  • संकेतवाचक विशेषण

यहाँ अलग-अलग विशेषण विभन्न समय पर इस्तेमाल किये जाते हैं, जिनका उपयोग का भाव केवल संज्ञा की विशेषता बताना है। आइये विशेषण के भेद के बारे में जानते हैं।

विशेषण के प्रकार

  1. गुणवाचक विशेषण - जो शब्द किसी संज्ञा या सर्वनाम के दशा, भाव, गुण, आकार, दोष, रंग, स्थान आदि की विशेषता बताते हैं, उन्हें गुणवाचक विशेषण कहते है। उदहारण के लिए - सफ़ेद गाय, गोरा चेहरा, बुरा व्यक्ति आदि।
  2. संख्यावाचक विशेषण - जिस विशेषण से किसी संख्या का बोध हो उसे संख्यावाचक विशेषण कहते हैं। उदहारण के लिए - कक्षा में 500 विद्यार्थी हैं।
  3. परिणामवाचक विशेषण - जिस शब्द से किसी वस्तु की नाप-तौल का बोध हो, उसे परिमाणवाचक विशेषण कहते हैं। उदाहारण के लिए - मुझे 2 लीटर दूध की आवश्यकता है।
  4. संकेतवाचक विशेषण - जो शब्द किसी संज्ञा के पहले जुड़कर उसकी तरफ संकेत करते हैं, उसे सार्वनामिक या संकेतवाचक विशेषण कहते हैं। उदहारण के लिए - मेरी कलम, तुम्हारी गाड़ी आदि।

Summary

विशेषण के कितने भेद होते हैं?

विशेषण के चार प्रकार होते हैं। उनके नाम हैं गुणवाचक विशेषण, परिणामवाचक, संख्यावाचक विशेषण, और संकेतवाचक विशेषण। यह अलग अलग वाक्यों भाव स्पष्ट करने के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं।

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