सूरदास को किस रस का सम्राट कहा गया है?

By Sakshi Yadav|Updated : September 2nd, 2022

सूरदास को वात्सल्य रस का सम्राट कहा गया है। उन्होंने वात्सल्य रस के साथ श्रृंगार और शान्त रसों के बारे में भी बताया है। "साहित्य लहरी' सूरदास की चर्चित लिखी रचना मानी जाती है। इसमें साहित्य लहरी के रचना-काल के सम्बन्ध में निम्न पद मिलता है -

मुनि पुनि के रस लेख ।

दसन गौरीनन्द को लिखि सुवल संवत् पेख ।।

रस क्या होता है?

रस मनुष्य के अंदर के भाव (Emotions) को कहते है। रस यानी हमारे अंदर छुपे हुए ऐसे भाव होते है जिन्हे हम हर दिन अलग अलग तरीके से व्यक्त करते रहते है। इन्ही रस के वजह से हर इंसान अपने अंदर के भाव को दुसरो के सामने रखता है जिससे सामनेवालों को पता चलता है असल में वह क्या कहना चाहता है या उसका उद्देश्य क्या है। 

Summary

सूरदास को किस रस का सम्राट कहा गया है?

रस हमारे अंदर के भाव को बताता है। सूरदास को 'वात्सल्य रस' का सम्राट कहा जाता है। वात्सल्य रस का स्थायी भाव वात्सल्यता (अनुराग) होता है माता का पुत्र के प्रति प्रेम, बड़ों का बच्चों के प्रति प्रेम, गुरुओं का शिष्य के प्रति प्रेम, बड़े भाई का छोटे भाई के प्रति प्रेम आदि का भाव स्नेह कहलाता है यही स्नेह का भाव परिपुष्ट होकर वात्सल्य रस कहलाता है।

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