भारत के संविधान पर अध्ययन नोट्स

By Bhawna Singh|Updated : June 16th, 2021

Constitution of India

In this article, we should read related to the Constitution of India, formation of the Constitution Assembly, Constituent Assembly Members, Features of Indian Constitution & Drafting Committee Members Important for the CTET Paper-2.

Formation of Constitution Assembly:

M.N. Roy had given the idea of a constitution in India in 1934. He was a pioneer of the communist movement in India. In 1934 Indian National Congress demanded a constituent assembly to frame the constitution of India. in 1938 Jawahar Lal Nehru announced that the constitution of India was made by the constituent assembly without any external interference and this demand was accepted by the British Parliament in 1940 which was known as August Offer.

In 1942 under Cripps India Mission Sir Stafford Cripps announced that Constituent Assembly will be set up, but it was set up after the Second World War. And finally, in 1946 under the Cabinet Mission Plan constituent assembly of India was set up by Cripps Lawrence and Alexander.

संविधान सभा का गठन:

एम.एन. रॉय ने 1934 में भारत में संविधान का विचार दिया था। वह भारत में साम्‍यवादी आंदोलन के अग्रणी थे। 1934 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस ने भारत के संविधान को बनाने के लिए एक संविधान सभा की मांग की। 1938 में जवाहर लाल नेहरू ने घोषणा की कि भारत का संविधान बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के संविधान सभा द्वारा बनाया गया था और इस मांग को ब्रिटिश संसद ने 1940 में स्वीकार कर लिया था जिसे अगस्त प्रस्ताव के रूप में जाना गया।

1942 में क्रिप्स इंडिया मिशन के तहत सर स्ट्रैफ़ोर्ड क्रिप्स ने घोषणा की कि संविधान सभा की स्थापना की जाएगी, लेकिन इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद स्थापित किया गया था। और अंतत:, 1946 में भारत के कैबिनेट मिशन प्लान के तहत क्रिप्प लॉरेंस और अलेक्जेंडर द्वारा विधानसभा का गठन किया गया।

संविधान सभा के सदस्य:

महात्मा गांधी और एम.ए. जिन्ना को छोड़कर भारत की सभी महत्वपूर्ण हस्तियों को संविधान सभा में शामिल किया गया था। 9 दिसंबर, 1946 को संविधान सभा की पहली बैठक डॉ. सच्चिदानंद सिन्हा के नेतृत्व में हुई। बाद में, उन्हें डॉ. राजेंद्र प्रसाद द्वारा संविधान सभा के स्थायी अध्यक्ष के रूप में और एच.सी. मुखर्जी को संविधान सभा के उपाध्यक्ष के रूप में प्रतिस्थापित कर दिया गया। श्री बी.एन. राव को संविधान सभा का सलाहकार के रूप में नियुक्त किया गया था। डॉ. भीम राव अंबेड़कर भारतीय संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे।

  • संविधान सभा ने 4 नवंबर, 1948, 15 नवंबर, 1948 और 14, नवंबर 1949 को संविधान के तीन मसौदे पेश किए। भारी संख्या में बदलावों के बाद संविधान सभा ने 26 नवंबर, 1949 को संविधान को स्वीकार किया।
  • संविधान सभा का अंतिम सत्र 24 जनवरी, 1950 को आयोजित किया गया था जहाँ डॉ. राजेंद्र प्रसाद को भारत के राष्ट्रपति के रूप में चुना गया था; विधानसभा के कुल सदस्यों में से 284 सदस्यों ने संविधान की आधिकारिक प्रतियों पर हस्ताक्षर किए।
  • संविधान के शेष प्रावधान 26 जनवरी, 1950 को लागू हुए और इसके प्रारंभ की तिथि को गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया गया।
  • संविधान सभा को संविधान बनाने में 2 वर्ष, 11 महीने और 18 दिन का समय लगा और संविधान बनाने की लागत लगभग 64 लाख रुपये थी।
  • डॉ. बी.आर. अम्बेड़कर ने एक प्रमुख भूमिका निभाई और वे संविधान की प्रारूप समिति के अध्यक्ष थे, इसीलिए उन्हें भारतीय संविधान के जनक के रूप में भी जाना जाता है।

भारतीय संविधान की विशेषताएं:

  • भारत का संविधान हमारे देश का एक कानूनी दस्तावेज है जिसकी सहायता से हमारे देश के मामलों का प्रबंधन किया जाता है। यह एक दस्तावेज है जो हमारे देश के भीतर सीमित सरकार और लोकतांत्रिक शासन के सिद्धांत को स्थापित करता है।
  • भारतीय संविधान की प्रकृति अर्ध-संघीय है अर्थात् सामान्य परिस्थितियों में अधिक संघीय और कम एकात्मक है यह संघीय है लेकिन अनुच्छेद 352 के तहत राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा के दौरान संविधान की प्रकृति एकात्मक हो जाती है।
  • भारत का संविधान दुनिया के इतिहास में सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें एक प्रस्तावना, 395 अनुच्‍छेद, 22 भाग और 8 अनुसूचियां हैं, हालांकि वर्तमान में इसमें लगभग 465 अनुच्‍छेद, 25 भाग, 12 अनुसूचियां और 100 से अधिक संशोधन शामिल हैं।
  • भारतीय संविधान एक एकल दस्तावेज है जिसमें मौलिक अधिकार, मौलिक कर्तव्य और निर्देश सिद्धांत शामिल हैं।
  • भारतीय संविधान प्रकृति में कठोर या लचीला दोनों का संयोजन है। लचीले अर्थों में, इसके कुछ हिस्सों को साधारण बहुमत पर इसके द्वारा संशोधित किया जा सकता है और इसके कुछ हिस्सों (कठोर) को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होती है और राज्य विधानसभाओं के एक आधे से कम की आवश्‍यकता नहीं होती है।
  • भारतीय संविधान प्रकृति में स्‍वतंत्र तथा निष्‍पक्ष है।

प्रारूप समिति के सदस्य:

प्रारूप समिति की स्थापना 29 अगस्त, 1947 को की गई थी। इस समिति का मुख्य उद्देश्य नए संविधान के प्रारूप की तैयारी था। प्रारूप समिति में सात सदस्य शामिल हैं।

1. डॉ. भीमराव अम्बेड़कर (संविधान के जनक)

2. एन. गोपाला स्वामी अय्यर

3. अल्लादी कृष्णस्वामी अय्यर

4. सैयद मोहम्मद सादुल्लाह

5. डॉ. के.एम. मुंशी

6. एन. माधव राव (बी.एल. मित्रा की जगह)

7. टी.टी. कृष्णमाचारी (डी.पी. खेतान की जगह)

मसौदा तैयार करने में प्रारूप समिति को छह महीने से भी कम समय लगा।

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Sahi Prep hai toh Life Set hai!

byjusexamprep

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FAQs

  • Bhimrao Ambedkar is the Father of Constitution. He was a social reformer and a Dalit icon who spoke out against the inequality, discrimination faced by the members of his community.

  • 60 questions will be asked from SST Subject.

  • The nature of the Indian Constitution is Quasi-federal i.e. most of it is federal and less unitary in nature. During the normal circumstances, it is federal but during the proclamation of National Emergency under article 352, the nature of the constitution becomes unitary in nature.


  • India’s Constitution is the longest written constitution in the history of the world having a Preamble, 395 Articles, 22 Parts, and 8 Schedules although presently it has around 465 Articles, 25 parts, 12 Schedules, and more than 100 Amendment.


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