Day 6: Study Notes रीतिकाल: रीतिबद्ध कवि भाग 3

By Sakshi Ojha|Updated : July 24th, 2021

यूजीसी नेट परीक्षा के पेपर -2 हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण विषयों में से एक है हिंदी साहित्य का रीतिकाल। इस विषय की प्रभावी तैयारी के लिए, यहां यूजीसी नेट पेपर- 2 के लिए  हिंदी साहित्य का रीतिकाल के आवश्यक नोट्स कई भागों में उपलब्ध कराए जाएंगे। रीतिकाल (रीतिकाल की काव्य धाराएं) से सम्बंधित नोट्स इस लेख मे साझा किये जा रहे हैं। जो छात्र UGC NET 2021 की परीक्षा देने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए ये नोट्स प्रभावकारी साबित होंगे।      

  • भिखारीदास का रचनाकाल 1728-1750 ई० तक माना जाता है।
  • भिखारीदास की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं:

ग्रन्थ

वर्ष ई० 

विषय निरूपण

नाम कोश

1738

कोश ग्रन्थ

रस सारांश

1742

रस के भेदोपभेदों का वर्णन

छंदार्णव पिंगल

1742

छंदों का विस्तृत वर्णन

काव्य निर्णय

1746

काव्य के भेदोपभेदों का वर्णन

श्रृंगार निर्णय

1750

नायक नायिका भेद वर्णन

विष्णु पुराण भाषा

 

विष्णु पुराण का दोहा-चौपाई शैली में अनुवाद

शतरंजशतिका

 

शतरंज खेलने के तौर तरीकों का वर्णन

अमर कोश

 

संस्कृत के अमरकोश का पद्यानुवाद

  • जयपुर नरेश प्रताप सिंह ने पद्माकर भट्ट को 'कविराज शिरोमणि' की उपाधि दी। 
  • पद्माकर भट्ट की प्रमुख रचनाएँ निम्नलिखित हैं —

ग्रन्थ

विषय निरूपण

हिम्मत बहादुर विरुदावली

211 छंदों में हिम्मत बहादुर का शौर्य वर्णन (प्रबन्ध काव्य)

पद्माभरण

अलंकारों का वर्णन

जगद् विनोद

छह प्रकाश एवं 731 छंदों में नव रसों का विवेचन

प्रबोध पचासा

भक्ति निरूपण

गंगालहरी

संस्कृत कवि जगन्नाथ कृत 'गंगा लहरी' का पद्यानुवाद 

प्रताप सिंह विरुदावली

117 छन्दों में प्रताप सिंह का शौर्य वर्णन (प्रबन्ध काव्य)

कलिपच्चीसी

 

राम रसायन

वाल्मीकि के 'रामायण' का छायानुवाद

अलीजाह प्रकाश

महाराज ग्वालियर के नाम लिखा गया है।

  • पद्माकर भट्ट ने होली, फाग और त्योहारों का वर्णन पूरी तल्लीनता के साथ किया है।
  • भिखारीदास ने सर्वप्रथम हिन्दी काव्य-परम्परा, भाषा, छंद, तुक आदि पर विचार
  • माखन ने हिन्दी में सर्वप्रथम कुम्भक, हरिमालिका, मदनमोहन, सुरस, तरलगति, सदागति, सुबल, प्रवाह और गन्धार नामक मात्रिक छन्दों का निरूपण किया। 
  • हिन्दी में रीति का अर्थ 'काव्यरचना पद्धति' है किन्तु कहीं-कहीं इसे 'पंथ' से भी अभिहित किया गया है। 
  • कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
  1. केशवदास-  समुझेवाला बालकन वर्णन पंथ अगाध
  2. चिन्तामणि- रीति सु भाषा कवित की बरनत बुध अनुसार।
  3. मतिराम- सो विश्रब्ध नवोढ़ यो बरनत कवि रसरीति ।
  4. भूषण- सुकविन हूँ कछु कृपा, समुझि कविन को पंथ।
  5. देव- अपनी अपनी रीति के काव्य और कवि रीति ।
  6. सुरति मिश्र- वरनन मनरंजन जहाँ रीति अलौकिक होइ।
  7. निपुन कर्म कवि कौ जु तिहि काव्य कहत सब कोई ॥ 
  8. सोमनाथ- छंद रीति समुझे नहीं बिन पिंगल के ज्ञान। 
  9. भिखारीदास- (क) काव्य की रीति सिखी सुकवीन्ह सों ॥ (ख) अरु कछु मुक्तक रीति लखि, कहत एक उल्लास। 
  10. पद्माकर- ताही को रति कहत हैं, रस ग्रंथन की रीति ॥ 
  11. वेनी प्रवीन- या रस अरु नव तरंग में, नव रस रीतहिं देखि, अति प्रसन्न है ललनजी, कीन्हीं प्रीति विसेखि । 
  12. प्रताप साहि- कवित रीति कछु कहत है व्यंग्य अर्थ चित लाये ॥ 
  • डॉ० बच्चन सिंह ने लिखा है कि रीतिकालीन कवि 'कविता के सौदागर' थे। 
  • देव ने सुकवि को कविता का सौदागर कहा है।
  • रीति काव्य को 'यौवन की रमणीयता का काव्य' भी कहा जाता है। 
  • नलिन विलोचन शर्मा ने रीतिकालीन काव्य की आलोचना-पद्धति को "भारतीय मनीषा का ह्रास कालीन वर्गीकरण प्रेम" कहा है। 

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हमें आशा है कि आप सभी UGC NET परीक्षा 2021 के लिए पेपर -2 हिंदी, रीतिकाल (रीतिबद्ध कवि) से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु समझ गए होंगे। 

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Sakshi OjhaSakshi OjhaMember since Mar 2021
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