CrPC की धारा 144: Download Study Notes PDF

By Abhishek Jain |Updated : May 4th, 2022

CrPC की धारा-144 भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता-1973 का एक महत्त्वपूर्ण प्रावधान है, जिसका प्रयोग 4 या 4 से अधिक लोगों की सभा को प्रतिबंधित करने, मोबाइल फोन कम्पनियों को किसी क्षेत्र में SMS या अन्य Message Services अथवा Internet को बंद करने के लिए किया जाता है।

हाल ही में उत्तराखंड के हरिद्वार ज़िला प्रशासन ने रुड़की शहर के पास CrPC की धारा 144 के तहत निषेधाज्ञा लागू की, जिसके कारण CrPC की धारा 144 एक बार फिर से चर्चा का मुख्य विषय बनी।

Table of Content

CrPC की धारा 144 क्या है?

  • CrPC की धारा 144 एक जिला-अधिकारी, उप-जिलाधिकारी या किसी अन्य प्राधिकरण को जिले में उत्पन्न हो रही अराजक स्थिति को सम्भालने के लिए अतिरिक्त शक्तियाँ प्रदान करती है जिसके द्वारा लोगों को अनावश्यक रूप से इकट्ठा होने इत्यादि के लिए प्रतिबंधित किया जा सकता है।
  • CrPC की धारा 144 उन उपद्रव या किसी घटना के संभावित खतरे के मामलों में लगायी जाती है जिसमें मानव जीवन को परेशानी या संपत्ति को क्षति पहुंचाने की संभावना होती है।
  • CrPC की धारा 144 किसी व्यक्ति विशेष, या किसी समूह विशेष या किसी क्षेत्र विशेष में भी लगायी जा सकती है।
  • CrPC की धारा 144 में उल्लेखित प्रावधान के अन्तर्गत किसी के आवागमन को भी अस्थाई तौर पर रोका जा सकता है।

CrPC की धारा 144 की विशेषताएँ

CrPC की धारा 144 की निम्नलिखित विशेषताएँ है-

  • CrPC की धारा 144 दिये गए क्षेत्राधिकार में किसी भी प्रकार के हथियार रखने या ले जाने पर प्रतिबंध लगाती है।
  • CrPC की धारा 144 के उल्लंघन के लिये अधिकतम दंड 3 वर्ष है।
  • CrPC की धारा 144 के अंतर्गत पारित आदेश के अनुसार, जिस क्षेत्र में CrPC की धारा 144 को लागू किया गया है उस क्षेत्र में जनता की आवाजाही नहीं होगी और सभी शिक्षण संस्थान बंद रहेंगे।
  • साथ ही CrPC की धारा 144 के अंतर्गत पारित आदेश के अनुसार संचालन की अवधि के दौरान किसी भी प्रकार की जनसभा या रैलियां करने पर पूर्ण रोक होती है।
  • CrPC की धारा 144 अधिकारियों को क्षेत्र विशेष में इंटरनेट एक्सेस को बंद करने का अधिकार भी देता है।
  • CrPC की धारा 144 का अंतिम उद्देश्य उन क्षेत्रों में शांति और व्यवस्था बनाए रखना है जहाँ देनिक गतिविधयों को बाधित करने से परेशानी हो सकती है।
  • इस अवधि में मजिस्ट्रेट के किसी आदेश की समीक्षा या उसके विरूद्ध कोई उपचार भी स्वयं मजिस्ट्रेट द्वारा ही संभव हे।

CrPC की धारा 144 के आदेश की अवधि:

  • CrPC की धारा 144 के तहत कोई भी आदेश 2 महीने से अधिक की अवधि के लिये लागू नहीं हो सकता है।
  • राज्य सरकार के विवेक के अनुसार CrPC की धारा 144 की वैधता को 2 और महीनों के लिये बढ़ाया जा सकता है जिसकी वैधता अधिकतम 6 महीने तक हो सकती है।

CrPC की धारा 144 के लागू होने पर नागरिकों को प्राप्त मूल अधिकार पर प्रभाव

CrPC की धारा 144 के लागू होने की अवस्था में पीड़ित व्यक्ति अनुच्छेद-226 के अन्तर्गत उच्च न्यायालय या अनुच्छेद-32 के अन्तर्गत उच्चतम न्यायालय जाकर अपने मूल-अधिकारों को पुनः लागू करने की माँग कर सकता है, परन्तु यदि ऐसा कोई भी अधिकार लोक व्यवस्था या सुरक्षा के विरूद्ध है तो उच्च और उच्चतम न्यायालय दोनों ही वृहद हितों को ही प्राथमिकता देती है।

CrPC की धारा 144 पर सर्वोच्च न्यायालय के विभिन्न निर्णय

  • 1967 में डा0 राम मनोहर लोहिया मामले में उच्चतम न्यायालय ने यह निर्णय दिया कि लोकतन्त्र तब तक सुरक्षित नहीं रह सकता जब तक नागरिकों के एक वर्ग को लोक-व्यवस्था को अस्थिर करने की, व उसे हानि पहुँचाने की खुली छूट मिली रहती हो, अर्थात उच्चतम न्यायालय ने व्यक्तिगत हितों से ऊपर समाज के हितों को प्राथमिकता दी व लोकतन्त्र के संरक्षण के लिए CrPC की धारा 144 में उल्लेखित प्रावधानों पर सहमति जताई।
  • मधु लिमये बनाम उप-जिलाधिकारी मामले में 1970 में भी न्यायालय ने CrPC की धारा 144 में उल्लेखित प्रावधानों का समर्थन किया, इस मामले में तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश एम- हिदायतुल्लाह की अध्यक्षता वाली सात न्यायाधीशों की पीठ ने भी CrPC की धारा 144 की संवैधानिकता को सही बताया।
  • उच्चतम न्यायालय ने 2012 में रामलीला मैदान में सोते हुए लोगों पर CrPC की धारा 144 के प्रयोग को अनुचित ठहराते हुए CrPC की धारा 144 के उचित व संयमित उपयोग पर बल दिया जिससे व्यक्तिगत हितों व सामाजिक हितों के मध्य एक संतुलन स्थापित किया जा सके।

CrPC की धारा 144 पीडीएफ डाउनलोड

इस लेख में आपको आपकी सुविधा के लिए CrPC की धारा 144  लेख से संबंधित सभी जानकारी तथा नोट्स PDF के रूप में प्रदान की जा रही है जिससे आप अपनी तैयारी को और बेहतर तरीके से जारी रख सकते है इस लेख की PDF अभी डाउनलोड करे।

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FAQs

  • CrPC की धारा 144 के अंतर्गत CrPC की फुल फॉर्म भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता है।

  • According to Section 144 of CrPC, the full form of CrPC is “The Code of Criminal Procedure”.

  • हाँ, CrPC की धारा 144 के अंतर्गत किसी व्यक्ति की आवाजाही को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।

  • CrPC की धारा 144 के अर्न्तगत पारित किया गया कोई भी आदेश, इसको जारी करने की तिथि से लेकर 2 माह तक ही बना रह सकता है, परन्तु विशेष परिस्थितियों में राज्य सरकार इस अवधि को 6 माह तक बढ़ा सकती है।

  • CrPC की धारा 144 का मुख्य उद्देश्य समाज में शांति बनाये रखना और लोकतन्त्र का संरक्षण करना है।

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