द्वितीय विश्व युद्ध - किसके बीच हुआ था, परिणाम

By Trupti Thool|Updated : August 10th, 2022

द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45): विश्व ने दो महान युद्ध देखे, प्रथम विश्व युद्ध (1914-1918) और द्वितीय विश्व युद्ध (1939-45), जिसने वैश्विक राजनीति में दूरगामी परिवर्तन लाए। द्वितीय विश्व युद्ध को इतिहास का सबसे बड़ा संघर्ष माना जाता है। यह युद्ध लगभग छः वर्षों तक चला था। इस लेख में, आप जानेंगे: द्वितीय विश्व युद्ध परिचय, द्वितीय विश्वयुद्ध के कारण, युद्ध का कोर्स, नाजी प्रलय, द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम, औपनिवेशीकरण-भारत को स्वतंत्रता।                       

Table of Content

द्वितीय विश्व युद्ध - परिचय

  • विश्व युद्ध II, जिसे द्वितीय विश्व युद्ध भी कहा जाता है, छह वर्ष (1939–45) तक लड़ा गया था।
  • यह युद्ध धुरी राष्‍ट्रों (जर्मनी, इटली और जापान) और मित्र राष्ट्रों (फ्रांस, ग्रेट ब्रिटेन, संयुक्त राज्य अमेरिका, सोवियत संघ और, कुछ हद तक चीन) के बीच लड़ा गया था।
  • यह इतिहास में अब तक का सबसे रक्तरंजित और लंबे समय तक चला युद्ध था। युद्ध में चार करोड़ से अधिक लोग मारे गए, जो उस समय विश्व की जनसंख्या के लगभग 3 प्रतिशत के बराबर है। 

द्वितीय विश्व युद्ध के कारण

द्वितीय विश्व युद्ध के कई कारण थे। सबसे महत्वपूर्ण प्रथम विश्व युद्ध के बाद वर्साय की संधि का प्रभाव, वैश्विक आर्थिक महामंदी, तुष्टीकरण की विफलता, जर्मनी और जापान में सैन्यवाद का उदय और राष्ट्र संघ (लीग ऑफ नेशन) की विफलता है। 

वर्साय की संधि

  • प्रथम विश्व युद्ध के बाद, विजयी मित्र राष्ट्रों ने जर्मनी के भविष्य का फैसला करने के लिए बैठक की।
  • जर्मनी को वर्साय की संधि पर हस्ताक्षर करना पड़ा। उसे युद्ध के लिए अपराध स्वीकार करना पड़ा और भारी मुआवजे का भुगतान करना पड़ा। जर्मनी को अपना अधिकांश क्षेत्र गंवाना पड़ा और 100000 से बड़ी सेना रखने पर रोक लगा दी गई।
  • वर्साय की संधि ने जर्मनी को राजनीतिक, सैन्य और आर्थिक रूप से चूर-चूर दिया।
  • वह बदला लेना चाहता था और वह मित्र राष्‍ट्रों के साथ शक्ति परीक्षण को तैयार था।

आर्थिक महामंदी

  • महामंदी ने वर्ष 1929 में पूरी दुनिया को प्रभावित किया।
  • मंदी के दौरान, अर्थव्यवस्था संकुचित हो गई, व्यापार घट गया, व्यवसाय बंद हो गए, कीमतें गिर गईं, बैंक विफल हो गए और बेरोजगारी बढ़ गई।
  • जब अर्थव्यवस्था में मंदी होती है, तो नागरिक अपनी समस्याओं के समाधान के लिए एक मजबूत राजनीतिक नेतृत्व की तलाश करते हैं। वर्ष 1933 में जर्मनी का नेतृत्‍व संभालने के बाद, एडोल्फ हिटलर ने जर्मनी का खोया हुआ गौरवसंपत्‍ति और शक्ति वापस लौटाने का वादा किया
  • जर्मनी को पुन: एक महान राष्ट्र बनाने के उसके सपने ने कई जर्मनी नागरिकों को प्रेरित किया।
  • इसने प्रथम विश्‍व युद्ध के बाद हुए अपमान के कारण लगे घावों पर एक मलहम का काम किया। कई लोगों ने नाज़ीवाद का समर्थन किया क्योंकि इसने आर्थिक पतन से बाहर निकलने का रास्ता दिखाया। 

फासीवाद / कट्टर-राष्ट्रवाद का उदय

  • फासीवाद एक अत्‍यधिक रूढ़ि‍वादीसत्तावादी कट्टर-राष्ट्रवाद है जिसकी विशेषता तानाशाही शक्‍ति, विपक्ष का बलपूर्वक दमन और समाज तथा अर्थव्‍यवस्‍था का मजबूत संव्‍यूहन है, जो बीसवीं सदी की शुरुआत में यूरोप में प्रथम विश्‍व युद्ध के बाद सामने आया।
  • मुसोलिनी ने पहली बार इटली में फासीवाद की शुरुआत की।
  • एडोल्फ हिटलर ने जातीय शुद्धता के आधार पर फासीवाद का जर्मन संस्करण ‘नाजीवाद’ पेश किया। नाजीवाद न केवल जर्मन लोगों के लिए बल्कि पूरे यूरोप और दुनिया के कई अन्य हिस्सों के लिए विनाशकारी साबित हुआ।
  • प्रथम विश्‍व युद्ध के बाद, यूरोप में कई राजनीतिक आंदोलनों का उदय हुआ, जिसे फासीवाद नाम दिया गया।
  • अनेक देशों में लोकतंत्र-विरोधी सरकार के विकास के कारण द्वितीय विश्व युद्ध हुआ। 

जर्मन सैन्‍यवाद

  • हिटलर ने वर्साय संधि की निंदा की और शांति संधि की उपेक्षा करते हुए तत्‍काल जर्मनी की सेना और हथियारों को बढ़ाना शुरू कर दिया।
  • हालांकि ब्रिटेन और फ्रांस ने हिटलर के कार्यों पर विचार किया, उन्होंने प्रारंभ में सोचा था कि एक मजबूत जर्मनी रूस से साम्यवाद के प्रसार को रोक देगा।
  • वर्ष 1936 में हिटलर ने फासीवादी शक्तियों के साथ रोम-बर्लिन-टोक्यो धुरी राष्‍ट्र पर हस्ताक्षर किए। 

तुष्टिकरण की विफलता

  • तुष्टीकरण का अर्थ संघर्ष से बचने के लिए दूसरे राष्ट्र की मांगों पर सहमत होने की नीति थी।
  • ब्रिटेन और फ्रांस ने समझा कि वर्साय की संधि जर्मनी के लिए पक्षपाती थी और हिटलर की कार्यवाही स्‍वाभावी और न्यायसंगत थी।
  • म्यूनिख समझौते में, ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी को चेकोस्लोवाकिया के उत्तरी भाग में सुडेटेनलैंड को हड़पने की अनुमति दी, जहां जर्मन-भाषी रहते थे।
  • मार्च 1939 में, जर्मनी ने अपना वादा तोड़ दिया और पूरे चेकोस्लोवाकिया पर हमला कर दिया। हालांकि, इस स्‍थिति में सैन्य कार्यवाही करने के लिए न तो ब्रिटेन और न ही फ्रांस तैयार थे। 

जापानी सैन्‍यवाद

  • वर्ष 1931 में, जापानी अर्थव्यवस्था आर्थिक मंदी से बुरी तरह प्रभावित हुई थी। जापानी लोगों ने सरकार पर विश्वास खो दिया था और अपनी आर्थिक समस्याओं का उपाय खोजने के लिए सेना की ओर रुख किया।

राष्‍ट्र संघ की विफलता

राष्ट्र संघ की परिकल्पना सामूहिक सुरक्षा के साथ युद्ध को रोकने के लिए की गई थी। यह एक अच्छा विचार था, लेकिन अंततः असफलता में बदल गया।

विफलता के प्रमुख कारण:

  • कई देश संघ में शामिल नहीं हुए, उदाहरण- अमेरिका, मुख्य निर्माता, स्‍वयं शामिल नहीं हुआ।
  • संघ शक्तिहीन था और उसके पास सैन्य आक्रमण को रोकने के लिए कोई सेना नहीं थी जैसे कि इटली का अफ्रीका में इथियोपिया पर आक्रमण या जापान का चीन में मंचूरिया पर आक्रमण

द्वितीय विश्व युद्ध का क्रम

  • फ़ुहरर (एक जर्मन शब्‍द जिसका अर्थ है नाज़ी नेता) ने अपनी नजरें पोलैंड की ओर मोड़ लीं।
  • हिटलर पोलिश कॉरिडोर को वापस लेना चाहता था, जिसे जर्मनी प्रथम विश्‍व युद्ध के बाद पोलैंड से हार गया।
  • सोवियत संघ के हमले से बचने के लिए, जर्मनी ने पोलैंड को एक दूसरे के बीच विभाजित करने के लिए चुपचाप एक अनाक्रमण संधि पर हस्ताक्षर किए।
  • जर्मनी ने पोलैंड पर "लाइटनिंग युद्ध" नामक एक आश्चर्यजनक आक्रमण किया।
  • इस घटना के बाद, 3 सितंबर, 1939 को फ्रांस और ग्रेट ब्रिटेन ने जर्मनी के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया
  • बाद में हिटलर ने ब्रिटेन पर हमला करने हेतु नार्वे और डेनमार्क के तटों के किनारे नौसेना के अड्डों का निर्माण करने के लिए डेनमार्क और नॉर्वे पर हमला किया। 

फ्रांस का पतन

  • फ्रांस पर हमला करने की रणनीति के हिस्से के रूप में मई, 1940 में हिटलर ने हॉलैंडबेल्जियम और लक्ज़मबर्ग के माध्यम से एक नाटकीय मोड़ शुरू किया।
  • इस समय, जर्मनी की जीत को महसूस करते हुए, इटली (मुसोलिनी) जर्मन सेना में शामिल हो गया और फ्रांस को हरा दिया।
  • 22 जून, 1940 को फ्रांस ने आत्मसमर्पण कर दिया। जर्मन लोगों ने फ्रांस के उत्तरी भाग पर नियंत्रण कर लिया और उन्होंने दक्षिणी हिस्से को पेटेन के नेतृत्‍व वाली एक कठपुतली की सरकार पर छोड़ दिया। 

ब्रिटेन का युद्ध

  • फ्रांस के पतन के बाद, हिटलर ने अब ग्रेट ब्रिटेन के आक्रमण का मन बना लिया।
  • नए ब्रिटिश प्रधान मंत्री विंस्टन चर्चिल ने पहले ही घोषित कर दिया था कि ब्रिटेन कभी भी हार नहीं मानेगा। हिटलर ने ब्रिटिश रॉयल एयर फोर्स (RAF) पर प्रहार करने के लिए "ऑपरेशन सी लॉयन" की योजना बनाई।
  • यह लड़ाई 10 मई, 1941 तक एक वर्ष के लिए जारी रही। लेकिन ब्रिटिशों ने मजबूती से प्रतिरोध किया, और फिर हिटलर ने अपने हमलों को बंद करने का फैसला किया।
  • इसके बजाय, उसने पूर्वी यूरोप और भूमध्य सागर पर ध्यान केंद्रित किया। ब्रिटेन का युद्ध समाप्त हो चुका था। मित्र राष्ट्रों ने एक महत्वपूर्ण सबक सीखा कि हिटलर के तेज विकास को रोका जा सकता है।

उत्तरी अफ्रीका पर आक्रमण

  • मुसोलिनी ने अपना अगला कदम सितंबर 1940 में उठाया। उनका उद्देश्य ब्रिटिश-नियंत्रित मिस्र पर कब्‍जा करना था।
  • मिस्र की स्वेज नहर मध्य पूर्व के तेल क्षेत्रों तक पहुंचने का मुख्‍य मार्ग थी। 

बाल्कन में युद्ध

  • अप्रैल 1941 में, हिटलर ने यूगोस्लाविया और यूनान दोनों पर विजय प्राप्त की।
  • यूनान में, नाजियों ने एक्रोपोलिस पर स्वास्तिक बनाकर अपनी विजय का जश्न मनाया।

पर्ल हार्बर पर अचानक हमला

  • अमेरिका आर्थिक मंदी से गुजरने के कारण प्रारंभ में युद्ध में शामिल होने को लेकर संशय में था।
  • 4 सितंबर, 1941 को एक जर्मन यू-बोट ने अचानक अटलांटिक में एक अमेरिकी डि‍स्‍ट्रॉयर पर गोलीबारी की। अमेरिकी राष्ट्रपति रूजवेल्ट ने नौसेना के कमांडरों को इसका जवाब देने का आदेश दिया।
  • लेकिन, जापानियों ने पूरे अमेरिकी प्रशांत बेड़े पर हमला किया और उसे तबाह कर दिया।
  • पर्ल हार्बर पर बमबारी के बाद, जापानी सेना ने पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र में गुआम और वेक द्वीप पर कब्‍जा कर लिया। उन्होंने इसके बाद फिलीपींस पर हमला किया।
  • जापानियों ने भी ब्रिटिशों को मारा, हांगकांग पर कब्‍जा कर लिया और मलाया पर आक्रमण किया। 

अमेरिका का युद्ध में प्रवेश

  • पर्ल हार्बर के विनाश का बदला लेने के लिए, अमेरिका ने युद्ध में प्रवेश किया जिसने मित्र राष्ट्रों के मनोबल और ताकत को बढ़ाया।
  • अमेरिका ने मिडवे की लड़ाई में जापानी समुद्री पर्यटन और करियर को नष्ट कर दिया। इसने युद्ध का रुख जापान के खिलाफ कर दिया।
  • मित्र राष्‍ट्रों ने नाजी प्रलय - यहूदियों का सामूहिक संहार - के बारे में भी विचार किया और कड़ी कार्यवाही करने का वचन दिया।

second world war

मित्र राष्‍ट्रों की विजय

  • वर्ष 1942 के मध्य तक जर्मनी की जीत काफी धीमी हो गई।
  • मित्र राष्ट्रों ने महसूस किया कि धुरी राष्‍ट्रों को पराजित करने के लिए संपूर्ण युद्ध हेतु संगठित होना आवश्यक था।
  • कूट-नाम ऑपरेशन ओवरलॉर्डनॉरमैंडी का आक्रमण इतिहास का सबसे बड़ा भूमि और समुद्री आक्रमण था। 6 जून, 1944 का दिन आक्रमण के आरंभ का दिन चुना गया, जिसे डी-डे कहा जाता था।
  • मित्र राष्ट्रों ने पेरिस में विजयी मार्च किया। सितंबर तक, उन्होंने फ्रांस, बेल्जियम, लक्ज़मबर्ग और अधिकांश नीदरलैंड्स को मुक्त कर दिया था। फिर उन्होंने जर्मनी पर नजर डाली।
  • बुल्‍गे की लड़ाई में, मित्र राष्‍ट्रों की सेनाओं ने पश्चिम से जर्मन सैनिकों को, पूर्व से सोवियत संघ को प्रेरित किया।

जर्मनी का बिना शर्त आत्मसमर्पण

  • अंत में जर्मनी ने स्टेलिनग्राद में सोवियत संघ के सामने आत्मसमर्पण कर दिया, जो युद्ध का निर्णायक मोड़ बना।
  • 25 अप्रैल, 1945 तक, सोवियत ने बर्लिन को घेर लिया था, क्योंकि उनके तोपखाने ने शहर पर गोलाबारी शुरू कर दी थी।
  • हिटलर ने अपनी हार मान ली और आत्महत्या कर ली।
  • 7 मई, 1945 को जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण कर दिया। 8 मई को, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य मित्र राष्‍ट्रों ने वी-ई डे – विक्‍ट्री इन यूरोप डे का जश्न मनाया। अंत में यूरोप में युद्ध समाप्त हो गया। 

जापान का आत्मसमर्पण

  • यद्यपि यूरोप में युद्ध समाप्त हो गया था, लेकिन मित्र राष्ट्र अभी भी प्रशांत क्षेत्र में जापान से लड़ रहे थे।
  • राष्ट्रपति ट्रूमैन समझ गए कि जापानि‍यों के आक्रमण से मित्र राष्ट्रों को आधा मिलियन आबादी की जनहानि हो सकती है।
  • ट्रूमैन ने परमाणु बम, या A-बम नामक एक नए शक्तिशाली हथियार का उपयोग करके युद्ध को जल्‍दी से जल्‍दी समाप्‍त करने का फैसला किया।
  • प्रारंभ में ट्रूमैन ने जापानियों को आत्मसमर्पण करने की चेतावनी दी, लेकिन जापान ने इसकी परवाह नहीं की।
  • 6 अगस्त, 1945 को अमेरिका ने हिरोशिमा पर परमाणु बम गिराया।
  • जापानी ने अभी भी युद्ध जारी रखा और फिर 9 अगस्त को नागासाकी पर दूसरा बम गिराया गया।
  • जापान द्वारा 2 सितंबर, 1945 को आत्मसमर्पण करने के बाद युद्ध समाप्त हो गया। 

द्वितीय विश्व युद्ध के परिणाम

  • द्वितीय विश्व युद्ध में यूरोप, एशिया और अफ्रीका में लाखों की संख्‍या में जनहानि हुई और अरबों डॉलर का नुकसान हुआ। युद्ध ने वैश्विक शासन के लिए एक एजेंडा निर्धारित किया।
  • जापान में विसैन्‍यीकरण और एक नए संविधान को अपनाना।
  • साम्यवाद का उदय: युद्ध के बाद, साम्‍यवादी पक्षों ने बदलाव का वादा किया, और लोग सुनने को तैयार थे। फ्रांस और इटली दोनों में, कम्युनिस्ट दलों की सदस्यता बढ़ गई। हालांकि, बाद में इसमें कमी आई। 

नई महाशक्‍तिों का उदय

युद्ध में अपनी सैन्य ताकत दिखाने के बाद, अमेरिका और सोवियत संघ दो महाशक्तियां बन गए थे। ग्रेट ब्रिटेन और फ्रांस ने अपना स्थान खो दिया।

युद्ध के बाद पुनर्निर्माण - नए आर्थिक संगठनों की उत्‍पत्‍ति

  • नेताओं ने व्यापार और आर्थिक संबंधों के दायरे में सहमति से निर्णय लेने और सहयोग के भाव के आधार पर एक युद्धोत्‍तर आर्थिक व्‍यवस्‍था स्थापित करने का इरादा किया।
  • जुलाई 1944 में ब्रेटन वुड्स, न्यू हैम्पशायर, अमेरिका में आयोजित ब्रेटन वुड्स सम्मेलन में 43 देशों की बैठक में विश्व बैंक और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की स्थापना की गई।
  • मित्र राष्‍ट्रों के नेताओं, विशेष रूप से अमेरिका और ब्रिटेन ने, यह महसूस किया कि पिछली वैश्विक आर्थिक मंदी और व्यापार संघर्षों के अस्थिर प्रभावों को दूर करने के लिए एक बहुपक्षीय ढांचे की आवश्यकता थी।
  • उनका मानना ​​था कि अंतर्राष्ट्रीय शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए वैश्विक आर्थिक संपर्क आवश्यक था।

UNO का गठन

  • यद्यपि राष्ट्र संघ (लीग ऑफ नेशन्‍स) युद्ध को रोकने में विफल रहा, लेकिन इसने अंतर्राष्ट्रीय शांति बनाए रखने के लिए एक मजबूत बहुपक्षीय संस्था स्‍थापित करने की शर्त रखी।
  • प्रमुख विकास UNO का गठन था।
  • युद्ध के दौरान, रूजवेल्ट और चर्चिल ने 9 अगस्त, 1941 को न्यूफाउंडलैंड के किनारे एक युद्धपोत पर गुप्त रूप से मुलाकात की और एक संयुक्त घोषणा पत्र अटलांटिक चार्टर जारी किया।
  • चार्टर ने देशों के बीच मुक्त व्यापार और जनता द्वारा अपनी सरकार चुनने के अधिकार का समर्थन किया।
  • यह बाद में द्वितीय विश्व युद्ध के अंत में मित्र राष्ट्र की शांति योजना बनीं। इसके फलस्‍वरूप यूएन चार्टर लिखा गया।
  • देशों ने मूलभूत मानवाधिकारों में, मनुष्‍यों की गरिमा और मूल्‍यों में, पुरुषों तथा महिलाओं और बड़े तथा छोटे राष्ट्रों के समान अधिकारों में विश्वास की पुष्टि करने का वचन दिया।
  • संयुक्त राष्ट्र का लक्ष्य ग्रह पर शांति, गरिमा और समानता सुनिश्चित करना है।

शीत युद्ध

  • पूर्वी यूरोप में युद्ध के बाद के सोवियत विस्तारवाद ने दुनिया को नियंत्रित करने की एक रूसी योजना ने अमेरिका की परेशानियों को बढ़ा दिया।
  • इस बीच, सोवियत संघ ने अमेरिकी अधिकारियों की लड़ाकू बयानबाजी, हथियारों के निर्माण और अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के लिए हस्तक्षेप करने वाले दृष्टिकोण का विरोध किया।
  • अमेरिका ने USSR की विस्तारक प्रवृत्तियों को नियंत्रित करने के लिए "नियंत्रण रणनीति" का पालन किया।
  • हालांकि, इससे अमेरिका और USSR द्वारा हथियारों के निर्माण में अनोखी वृद्धि हुई।
  • युद्ध में मित्र राष्ट्रों की जीत ने शीत युद्ध और आज के शीत-युद्धोत्‍तर विश्व दोनों की स्थितियां कायम कर दी।

उपनिवेशवाद का अंत

  • युद्ध समाप्त होने के तुरंत बाद, ब्रिटेन और फ्रांस के सामने कई तरह के घरेलू और बाहरी दबाव सामने आए। वे अब अपने-अपने उपनिवेशों पर पकड़ कायम नहीं रख सके।
  • एशियाई और अफ्रीकी उपनिवेशों में उपनिवेशवाद का अंत शुरू हो गया। कई उपनिवेश स्‍वतंत्र हो गए।

भारत की स्वतंत्रता

  • द्वितीय विश्व युद्ध ने ब्रिटिश साम्राज्य को भारी नुकसान पहुंचाया था। ग्रेट ब्रिटेन ने अरबों पाउंड खर्च किए थे और वे अब अपनी विश्व शक्ति का सथान हासिल करने में मदद के लिए अपने उपनिवेशों की ओर देख रहे थे।
  • ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ दुनिया भर के उपनिवेशों का दबाव बढ़ गया। क्योंकि, अंग्रेजों ने यूरोप में जर्मनी के उपनिवेशों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी, लेकिन दुनिया भर में ब्रिटेन ने इसे जारी रखा था।
  • भारत में, महात्मा गांधी ने अंग्रेजों के खिलाफ इस समय भारत छोड़ो आंदोलन शुरू किया था।
  • युद्ध के बाद, ब्रिटेन में लेबर पार्टी सत्ता में आई जिसने भारत को स्वतंत्रता का समर्थन किया।
  • भारत को 15 अगस्त, 1947 को स्वतंत्रता मिली।

 यह भी पढ़ें: प्रथम विश्व युद्ध (WWI)

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