शिक्षा का अधिकार (RTE)

By Brajendra|Updated : October 27th, 2022

बच्चे किसी भी देश के सर्वोच्च संपत्ति हैं। वे भविष्य के संभावित मानव संसाधन है। शिक्षा एक आदमी के जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण है। इसलिए संविधान के 86 वें संशोधन अधिनियम 2002 के द्वारा भारतीय संविधान में अनुच्छेद 21(A) को जोड़कर शिक्षा को मौलिक अधिकार बना दिया गया है। जिसके तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान है।इस अधिकार को व्यवहारिक रूप देने के लिए संसद में निशुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा अधिनियम 2009 पारित किया। जो 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था।

शिक्षा का अधिकार (RTE): परिचय 

  • शिक्षा शुरू में जो एक संवैधानिक अधिकार था, अब एक मौलिक अधिकार है। संविधान के 86वें संशोधन अधिनियम 2002 द्वारा अनुच्छेद 21(A) जोड़ा गया था। जिसके अनुसार राज्य 6 से 14 वर्ष तक आयु के सभी बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करेगा।
  • भारत में शिक्षा का अधिकार’ संविधान के अनुच्छेद 21A के अंतर्गत मूल अधिकार के रूप में उल्लिखित है।
  • 2 दिसंबर, 2002 को संविधान में 86वाँ संशोधन किया गया था और इसके अनुच्छेद 21A के तहत शिक्षा को मौलिक अधिकार बना दिया गया था ।
  • इस मूल अधिकार के क्रियान्वयन हेतु वर्ष 2009 में नि:शुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम (Right of Children to Free and Compulsory Education-RTE Act) बनाया गया। जो 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था।

शिक्षा का अधिकार: शिक्षा के अधिकार का संवैधानिक सन्दर्भ

  • भारतीय संविधान के भाग- IV (DPSP) के अनुच्छेद 45 और अनुच्छेद 39 (f) में प्रावधान है कि राज्य सभी को समान और सुलभ शिक्षा का प्रावधान करेगा।
  • शिक्षा के अधिकार पर पहली आधिकारिक पहल वर्ष 1990 में राममूर्ति समिति की रिपोर्ट के साथ हुई थी।
  • वर्ष 1993 में उन्नीकृष्णन जेपी बनाम आंध्र प्रदेश राज्य और अन्य मामले में सर्वोच्च न्यायालय ने अपने ऐतिहासिक निर्णय में कहा था कि शिक्षा का अधिकार अनुच्छेद 21 के अंतर्गत एक मौलिक अधिकार है।
  • तपस मजूमदार समिति (1999) ने शिक्षा के अधिकार को अनुच्छेद 21(A) को शामिल करने की सिफारिश की थी।
  • वर्ष 2002 में 86वें संवैधानिक संशोधन से शिक्षा के अधिकार को संविधान के भाग- III में एक मौलिक अधिकार के तहत अनुच्छेद 21(A) में शामिल किया गया था।
  • जिसके तहत 6-14 वर्ष के बच्चों के लिये शिक्षा के अधिकार को एक मौलिक अधिकार बना दिया था।
  • इसके अनुपालन के लिए एक कानून शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 का प्रावधान किया गया। जो 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था।

शिक्षा का अधिकार: शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009

  • शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE Act), 2009 का प्रावधान किया गया। जो 1 अप्रैल 2010 से लागू हुआ था।
  • शिक्षा का अधिकार(RTE) अधिनियम का उद्देश्य 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को अनिवार्य एवं निशुल्क प्राथमिक शिक्षा प्रदान करना है।
  • अधिनियम की धारा 12 (1) (C) में कहा गया है कि गैर-अल्पसंख्यक निजी गैर-सहायता प्राप्त स्कूल आर्थिक रूप से कमज़ोर और वंचित पृष्ठभूमि के बच्चों के लिये प्रवेश स्तर ग्रेड में कम- से-कम 25% सीटें आरक्षित करें।
  • यह अधिनियम विद्यालय न जाने वाले बच्चे के लिये एक उपयुक्त आयु से संबंधित कक्षा में भर्ती करने का प्रावधान भी करता है।
  • यह अधिनियम केंद्र और राज्य सरकारों के बीच वित्तीय एवं अन्य ज़िम्मेदारियों को साझा करने के बारे में भी जानकारी देता है।
  • यह अधिनियम छात्र-शिक्षक अनुपात, भवन और बुनियादी ढाँचा, स्कूल-कार्य दिवस, शिक्षकों के लिये कार्यावधि से संबंधित मानदंडों और मानकों का प्रावधान करता है।
  • इस अधिनियम में गैर-शैक्षणिक कार्यों जैसे-स्थानीय जनगणना, स्थानीय प्राधिकरण, राज्य विधानसभाओं और संसद के चुनावों तथा आपदा राहत के अलावा अन्य कार्यों में शिक्षकों की तैनाती का प्रावधान करता है।
  • यह अपेक्षित प्रविष्टि और शैक्षणिक योग्यता के अनुसार शिक्षकों की नियुक्ति का प्रावधान करता है।
  • बच्चों के माता-पिता को 9वीं कक्षा के बाद निजी स्कूलों में अत्यधिक फीस चुकानी पड़ती है, जिसे वे वहन नहीं कर सकते। कक्षा 8 के बाद बिना मान्यता प्राप्त निजी स्कूल से सरकारी स्कूल में बदलाव से बच्चों की मनःस्थिति और शिक्षा प्रभावित हो सकती है और इस प्रकार आरटीई के लाभों का विस्तार शिक्षा में निरंतरता को सुनिश्चित करने के लिए EWS के लिये कक्षा 8 से ऊपर RTE के तहत मुफ्त शिक्षा के लिये प्रावधान करता है।
  • 103वें संवैधानिक संशोधन अधिनियम ने अनुच्छेद 15 और 16 में संशोधन करके आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्गों (EWS) के लिये शिक्षा संस्थानों, नौकरियों और दाखिले में आर्थिक आरक्षण (10% कोटा) की शुरुआत की थी ।इस संशोधन के माध्यम से अनुच्छेद 15 (6) और अनुच्छेद 16 (6) जोड़ा गया था। 
  • उच्च शिक्षा में आर्थिक रूप से कमज़ोर वर्ग के लिये आरक्षण: अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामाजिक और शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिये बनाई गई 50% आरक्षण की नीति में कवर नहीं हुए गरीबों के कल्याण को बढ़ावा देने के लिये लागू की गई थी।
    यह समाज के EWS वर्ग को आरक्षण प्रदान करने के लिये केंद्र और राज्यों दोनों को सक्षम बनाता है।

शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम, 2009 अधिनियम निम्नलिखित का निषेध करता है:
1. शारीरिक दंड और मानसिक उत्पीड़न।
2. बच्चों के प्रवेश के लिये स्क्रीनिंग प्रक्रिया।
3. प्रति व्यक्ति शुल्क।
4. शिक्षकों द्वारा निजी ट्यूशन।
5. बिना मान्यता प्राप्त विद्यालय।

शिक्षा का अधिकार पर स्टडी नोट्स - Download PDF

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भारतीय संविधान के अन्य महत्वपूर्ण अनुच्छेद:

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FAQs

  • संविधान के 86 वें संशोधन अधिनियम 2002 के द्वारा भारतीय संविधान में अनुच्छेद 21(A) को जोड़कर शिक्षा को मौलिक अधिकार बना दिया गया है। जिसके तहत 6 से 14 वर्ष की आयु के सभी बच्चों को निशुल्क और अनिवार्य शिक्षा प्रदान करने का प्रावधान है। 

  • शिक्षा शुरू में जो एक संवैधानिक अधिकार था, अब एक मौलिक अधिकार है। संविधान के 86वें संशोधन अधिनियम 2002 द्वारा अनुच्छेद 21(A) जोड़ा गया था। जिसके अनुसार राज्य 6 से 14 वर्ष तक आयु के सभी बच्चों को नि:शुल्क एवं अनिवार्य शिक्षा का प्रावधान करेगा।

  • 12 दिसंबर 2002 को भारत की संसद द्वारा भारतीय संविधान में 86 वां संशोधन किया गया और इसके अनुच्छेद 21(A) को संशोधित करके शिक्षा को 6 से 14 वर्ष के बच्चों के लिए मौलिक अधिकार बना दिया गया था। बच्चों के लिए मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिनियम 1 अप्रैल 2010 को पूर्ण रूप से लागू हुआ।

  • शिक्षा के अधिकार पर कानूनी मानकों में दो व्यापक घटक शामिल हैं: समानता और गैर-भेदभाव के आधार पर शिक्षा तक सभी की पहुंच में वृद्धि, और शिक्षा के प्रकार (सार्वजनिक/निजी संस्थानों) और सामग्री (धार्मिक और नैतिक) को चुनने की स्वतंत्रता।

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