लोक सेवा आयोग - Public Service Commission in Hindi

By Brajendra|Updated : October 20th, 2022

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 312 (Article 312) के तहत, एक या एक से अधिक अखिल भारतीय सेवाएंँ बनाने का अधिकार भारतीय संसद (राज्यसभा) को प्राप्त है। अखिल भारतीय सेवाओं में संघ लोक सेवा आयोग ( Union Public Service Commission- UPSC) द्वारा भर्ती की जाती है। जबकि राज्य स्तर पर प्रशासनिक सेवाओं में भर्ती राज्य लोक सेवा आयोग (State Public Service Commission- SPSC) द्वारा भर्ती की जाती है। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) भारत में केंद्रीय भर्ती एजेंसी है। जबकि राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC) राज्य स्तर पर कार्य करने वाली एजेंसी है।

लोक सेवा आयोग - संघ, राज्य एवं संयुक्त

  • सर्वप्रथम भारत में लोक सेवा आयोग (PSC) की स्थापना भारत शासन अधिनियम 1919 के तहत ली आयोग की सिफारिश पर अक्टूबर 1926 को हुई थी।
  • भारत शासन अधिनियम 1935 में प्रावधान था कि संघ के लिए अलग से संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की स्थापना की जाएगी।
  • भारत की स्वतंत्रता के बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत 1 अक्टूबर 1950 को लोक आयोग की स्थापना की गई थी। इसे संवैधानिक दर्जा देने के साथ-साथ स्वतंत्रता प्रदान की गयी कि यह बिना किसी दबाव के योग्य सिविल सेवकों की भर्ती क़रे। और इस लोक सेवा आयोग को 'संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)' नाम दिया गया था। 
  • भारतीय संविधान के भाग 14 में अनुच्छेद 315 से अनुच्छेद 323 के तक लोक सेवा आयोग के सम्बन्ध में प्रावधान किये गए हैं।
  • लोक सेवा आयोग तीन प्रकार के होते हैं :
    1. संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)
    2. राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC)
    3. संयुक्त लोक सेवा आयोग (CPSC)

लोक सेवा आयोग से सम्बंधित अनुच्छेद (315 - 323)

  • अनुच्छेद 315: लोक सेवा आयोग (Public Service Commissions- PSC) का गठन।
  • अनुच्छेद 316: लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति एवं कार्यकाल।
  • अनुच्छेद 317: लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों को हटाना और निलंबित करना।
  • अनुच्छेद 318: लोक आयोग के सदस्यों और कर्मचारियों की सेवा की शर्तों हेतु नियम बनाने की शक्ति।
  • अनुच्छेद 319: लोक आयोग के सदस्यों द्वारा सदस्य न रहने पर पद धारण करने का प्रतिषेध।
  • अनुच्छेद 320: लोक सेवा आयोगों के कार्यों का वर्णन।
  • अनुच्छेद 321: लोक सेवा आयोगों के कार्यों का विस्तार करने की शक्ति।
  • अनुच्छेद 322: लोक सेवा आयोगों के व्यय।
  • अनुच्छेद 323: लोक सेवा आयोगों की रिपोर्ट।

अनुच्छेद- 315 भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315 के तहत निम्न प्रावधान किये गए हैं :
1. अनुच्छेद के उपबंधों के अधीन रहते हुए, संघ के लिए एक लोक सेवा आयोग और प्रत्येक राज्य के लिए एक लोक सेवा आयोग होगा।
2. दो या अधिक राज्य यह करार कर सकेंगे कि राज्यों के उस समूह के लिए एक ही लोक सेवा आयोग होगा और यदि इस आशय का संकल्प उन राज्यों में से प्रत्येक राज्य के विधान-मंडल के सदन द्वारा या जहाँ दो सदन हैं वहाँ प्रत्येक सदन द्वारा पारित कर दिया जाता है तो संसद उन राज्यों की आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए विधि द्वारा संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग की (जिसे इस अध्याय में संयुक्त आयोग कहा गया है) नियुक्ति का उपबंध कर सकेगी।
3. पूर्वोक्त प्रकार की किसी विधि में ऐसे आनुषंगिक और पारिणामिक उपबंध हो सकेंगे जो उस विधि के प्रयोजनों को प्रभावी करने के लिए आवश्यक या वांछनीय हों।
4. यदि किसी राज्य का राज्यपाल संघ लोक सेवा आयोग से ऐसा करने का अनुरोध करता है तो वह राष्ट्रपति के अनुमोदन से उस राज्य की सभी या किन्हीं आवश्यकताओं की पूर्ति करने के लिए सहमत हो सकेगा।
5. इस संविधान में, जब तक कि संदर्भ से अन्यथा अपेक्षित न हो संघ लोक सेवा आयोग या किसी राज्य लोक सेवा आयोग के प्रति निर्देशों का यह अर्थ लगाया जाएगा कि वे ऐसे आयोग के प्रति निर्देश हैं जो प्रश्नगत किसी विशिष्ट विषय के संबंध में, यथास्थिति, संघ की या राज्य की आवश्यकताओं की पूर्ति करता है।

संघ लोक सेवा आयोग (UPSC)

  • संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) भारत के संविधान के अनुच्छेद 315 के अन्तर्गत स्थापित एक संवैधानिक निकाय है जो भारत सरकार के लोकसेवा के पदाधिकारियों की नियुक्ति के लिए परीक्षाओं का संचालन करता है।
  • यूपीएससी (UPSC) में एक अध्यक्ष और दस सदस्य होते हैं।
  • नियुक्ति: UPSC के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की जाती है।
  • कार्यालय: UPSC का कोई भी सदस्य छह साल की अवधि के लिये या 65 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले पूरा हो, पद पर बना रहता है।
  • त्यागपत्र: संघ लोक सेवा आयोग का कोई सदस्य भारत के राष्ट्रपति को लिखित त्यागपत्र देकर अपने पद को त्याग सकता है।
  • सदस्यों का निलंबन: संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को भारत के राष्ट्रपति के आदेश से ही उसके पद से हटाया जा सकता है। राष्ट्रपति अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को उसके कार्यालय पूर्ण होने से पूर्व भी निलंबित कर सकता है, जिसके संबंध में सर्वोच्च न्यायालय का संदर्भ दिया गया है।
  • पद से हटाना: UPSC के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को निम्न आधारों पर पद से हटाया जा सकता है यदि वह:
    1. कार्यकाल के दौरान दिवालिया हो गया हो।
    2. अपने कार्यकाल के दौरान कार्यालय के कर्तव्यों के बाहर किसी अन्य रोजगार में संलग्न हो।
    3. राष्ट्रपति की राय में मानसिक या शरीर की दुर्बलता के कारण पद पर बने रहने के योग्य न हो।
  • सेवा की शर्तों के लिए भारत के राष्ट्रपति की शक्ति:
    राष्ट्रपति आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तें निर्धारित करता है।
    आयोग के कर्मचारियों की संख्या और उनकी सेवा शर्तों के संबंध में प्रावधान करता है।
  • शक्तियों पर प्रतिबंध: UPSC के सदस्यों की सेवा शर्तों में नियुक्ति के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकता है। किसी राज्य का विधानमंडल संघ लोक सेवा आयोग या SPSC द्वारा संघ या राज्य की सेवाओं के संबंध में और कानून अथवा किसी सार्वजनिक संस्था द्वारा गठित किसी भी स्थानीय प्राधिकरण या अन्य निकाय कॉर्पोरेट की सेवाओं के संबंध में अतिरिक्त कार्यों के अभ्यास के हेतु प्रावधान कर सकता है।
  • वेतन एवं भत्ते: आयोग के सदस्यों या कर्मचारियों के वेतन, भत्ते और पेंशन सहित UPSC का खर्च भारत की संचित निधि (Consolidated Fund of India) से दिया जाता है।
  • वार्षिक रिपोर्ट: UPSC आयोग द्वारा किये गए कार्यों की एक वार्षिक रिपोर्ट भारत के राष्ट्रपति को प्रस्तुत करता है।

राज्य लोक सेवा आयोग (SPSC)

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315(1) के अनुसार राज्य में सिविल सेवकों की भर्ती के लिए राज्य लोक सेवा आयोग के गठन का प्रावधान है।
  • राज्य लोक सेवा आयोग में एक अध्यक्ष व कुछ अन्य सदस्य होते हैं।
  • नियुक्ति: SPSC के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति संबंधित राज्य के राज्यपाल द्वारा की जाती है।
  • कार्यकाल: SPSC के सदस्य छह साल की अवधि के लिये या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, पद पर रहते हैं।
  • त्यागपत्र: राज्य लोक सेवा आयोग का कोई भी सदस्य राज्य के राज्यपाल को लिखित रूप में अपना त्यागपत्र देता है।
  • सदस्यों का निलंबन: SPSC के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को भारत के राष्ट्रपति के आदेश द्वारा ही उनके कार्यालय से हटाया जाएगा।
  • राज्य का राज्यपाल अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को उसके कार्यालय से निलंबित कर सकता है, जिसके संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्देश दिया गया है।
  • सदस्यों को हटाने की शर्तें UPSC के सदस्यों के हटाने के समान ही हैं।
  • सेवा शर्तों के मामले में राज्यों के राज्यपाल वहीँ कर्तव्यों का पालन करते हैं जो UPSC के मामले में भारत के राष्ट्रपति द्वारा किये जाते हैं।
  • शक्ति पर प्रतिबंध: SPSC के सदस्य की सेवा शर्तों में उसकी नियुक्ति के बाद किसी भी प्रकार का संशोधन नहीं किया जा सकता है।
  • वेतन एवं भत्ते: SPSC के सभी खर्च राज्य की संचित निधि पर भारित होते हैं।
  • वार्षिक रिपोर्ट: SPSC अपने कार्य की वार्षिक रिपोर्ट राज्य के राज्यपाल के समक्ष प्रस्तुत करता है।

संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (CPSC)

  • भारतीय संविधान के अनुच्छेद 315(2) के अनुसार, दो या दो से अधिक राज्यों की आपसी सहमति से राज्यों के उस समूह के लिये एक लोक सेवा आयोग का गठन किया जा सकता है।
  • संसद कानून द्वारा संयुक्त राज्य लोक सेवा आयोग (Combine State Public Service Commission- CPSC) का गठन सकती है।
  • नियुक्ति: भारतीय संविधान के अनुच्छेद 316 के अनुसार CPSC के अध्यक्ष और अन्य सदस्यों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति द्वारा की की जाती है।
  • कार्यकाल: अध्यक्ष और सदस्य छह वर्ष की अवधि या 62 वर्ष की आयु तक, जो भी पहले हो, पद पर बने रहते हैं।
  • त्यागपत्र: अनुच्छेद 317 के तहत CPSC का कोई भी सदस्य भारत के राष्ट्रपति को लिखित रूप में अपना त्यागपत्र दे सकता है।
    सर्वोच्च न्यायालय द्वारा संदर्भ दिये जाने के बाद राष्ट्रपति को आयोग के अध्यक्ष या किसी अन्य सदस्य को उसके कार्यालय से निलंबित करने का अधिकार प्राप्त है।
  • शक्तियाँ: अनुच्छेद 318 के अनुसार भारत के राष्ट्रपति को निम्नलिखित अधिकार प्राप्त हैं:
    आयोग के सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा की शर्तें निर्धारित करने से संबंधित।
    सदस्यों की संख्या और उनकी सेवा शर्तों के संबंध में प्रावधान करने से संबंधित।
  • वार्षिक रिपोर्ट: अनुच्छेद 323 के अनुसार, CPSC अपनी वार्षिक रिपोर्ट उन राज्यों के राज्यपालों के समक्ष प्रस्तुत करता है, जिन्होंने मिलकर आयोग का गठन किया है।

लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष और सदस्यों की पुनर्नियुक्ति की पात्रता

  • UPSC का अध्यक्ष भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन किसी अन्य पद पर कार्य हेतु अपात्र होगा।
  • UPSC का सदस्य, UPSC या SPSC के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति का पात्र होगा।
  • SPSC के अध्यक्ष UPSC के अध्यक्ष या अन्य सदस्य या किसी अन्य SPSC के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के पात्र होंगे।
  • SPSC के सदस्य UPSC के अध्यक्ष या अन्य सदस्य या किसी अन्य SPSC के अध्यक्ष के रूप में नियुक्ति के पात्र होंगे।

लोक सेवा आयोग के कार्य:

  • संघ और राज्यों के लिए सिविल सेवकों की नियुक्ति के लिए भर्ती परीक्षाओं का आयोजन करवाना।
  • यूपीएससी राज्यों को उनके अनुरोध पर किसी भी सेवा हेतु संयुक्त भर्ती योजना तैयार करने और संचालन करने में मदद करना।
  • लोक सेवा आयोग का यह कर्तव्य है कि वह भारत के राष्ट्रपति या राज्य के राज्यपाल द्वारा उन्हें भेजे गए किसी भी मामले पर सलाह दे।
  • UPSC और SPSC निम्नलिखित मामलों पर विचार विमर्श कर सकते हैं :
    1. सिविल सेवाओं और सिविल पदों हेतु भर्ती के तरीकों से संबंधित सभी मामलों पर।
    2. उम्मीदवारों की उपयुक्तता के आधार पर सिविल सेवाओं और पदों पर नियुक्ति करने तथा एक सेवा से दूसरी सेवा में पदोन्नति और स्थानांतरण में।
    3. भारत सरकार या किसी राज्य की सरकार के अधीन सेवारत व्यक्ति को प्रभावित करने से संबंधित सभी अनुशासनात्मक मामलों पर।

लोक सेवा आयोग - Download PDF

उम्मीदवार नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करके लोक सेवा आयोग नोट्स हिंदी में डाउनलोड कर सकते हैं। 

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FAQs

  • राज्य लोक सेवा आयोग में एक अध्यक्ष व कुछ अन्य सदस्य होते हैं, जिन्हें राज्य का राज्यपाल नियुक्त करता है।

  • यूपीएससी में एक अध्यक्ष और दस सदस्य होते हैं। संघ लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति भारत का राष्ट्रपति करता है। 

  •  लोक सेवा आयोग सरकार के लिए कार्मिकों की नियुक्ति संबंधी परीक्षा आयोजित कराता है। यह आयोग सरकार को नियुक्ति प्रणाली से संबंधित मामलों में सलाह देता है। यह आयोग सरकार में प्रत्यक्षतः अथवा पदोन्नति के माध्यम से होने वाली नियुक्तियों के संबंध में भी सरकार को सलाह देता है।

  • सर्वप्रथम भारत में लोक सेवा आयोग (PSC) की स्थापना भारत शासन अधिनियम 1919 के तहत ली आयोग की सिफारिश पर अक्टूबर 1926 को हुई थी।


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