सामाजिक विज्ञान शिक्षण से संबंधित समस्याएं

By Bhawna Singh|Updated : January 7th, 2021

In this article, we should read related to the Problem Related to Social Science Teaching, Important for the CTET Paper-1 & 2.

As we all know that in our society there are so many preconceptions related to social science content. The social study may be accepted as a non-scientific, non-utility, irrelevant, and ill-famed subject by society. It is considered that its content is very lengthy basically in history. It has very limited carrier options. So, we can say that social science teaching and learning affects a lot due to the various conceptions related to its subject matter or contents.

 

जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हमारे समाज में सामाजिक विज्ञान सामग्री से संबंधित कई पूर्व-धारणाएं हैं। सामाजिक अध्ययन को समाज द्वारा गैर-वैज्ञानिक, गैर-उपयोगिता, अप्रासंगिक और कम -प्रसिद्ध विषय के रूप में स्वीकार किया जा सकता है। ऐसा माना जाता है कि इसकी सामग्री मूल रूप से इतिहास में बहुत विस्‍तारित है। इसमें कैरियर विकल्‍प बहुत सीमित हैं। इसलिए, हम कह सकते हैं कि सामाजिक विज्ञान शिक्षण और अधिगम इसके विषय या सामग्रियों से संबंधित विभिन्न धारणाओं के कारण बहुत प्रभावित होता है।

सामाजिक विज्ञान शिक्षण और अधिगम की प्रक्रिया के दौरान चुनौतियां:

शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया के दौरान सामना की जाने वाली चुनौतियां निम्‍न हैं:

  1. उद्देश्य की अनिश्चितता से संबंधित समस्या: मूल्यांकन इस प्रकार से होना चाहिए जिसे व्यवहारिक शर्तों में स्पष्ट रूप से परिभाषित किया जा सके।
  2. निर्देशात्‍मक सामग्री से संबंधित समस्याएं: इसमें सामाजिक विज्ञान शिक्षण से संबंधित निर्देशात्‍मक सामग्री का अभाव है। संसाधनों की व्यवस्था करने हेतु स्कूलों की ओर से निपुण शिक्षकों के साथ-साथ व्यय की आवश्यकता होती है।
  3. प्रशिक्षित या अनुभवी शिक्षकों की अनुपलब्धता से संबंधित समस्याएं: गुणात्मक शिक्षा के लिए प्रशिक्षित और अनुभवी शिक्षकों की आवश्यकता होती है जो सामाजिक अध्ययन शिक्षण से संबंधित एक बड़ी समस्या है।
  4. सेवारत शिक्षकों के प्रशिक्षण से संबंधित समस्याएं: अपर्याप्त प्रशिक्षण सुविधाओं की कमी के कारण शिक्षक को खुद को अपग्रेड करने की समस्या का सामना करना पड़ता है जिसके परिणामस्वरूप सामाजिक विज्ञान शिक्षण में बाधा आती है।
  5. मूल्यांकन के अपर्याप्त उपकरणों से संबंधित समस्याएं: सामाजिक अध्ययन शिक्षण अधिगम की प्रक्रिया में मूल्यांकन के उचित उपकरणों की कमी होती है जिसका उपयोग छात्रों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करने हेतु किया जाता है।
  6. पुस्तकालय से संबंधित समस्याएं: पुस्‍तकालयों की कमी एक बड़ी समस्या है जो शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में बाधा उत्‍पन्‍न करती है। सामाजिक अध्ययन शिक्षण अधिगम प्रक्रिया में बहुत सी संदर्भ पुस्तकों की आवश्यकता होती है तथा उनकी अनुपलब्धता के कारण शिक्षण अधिगम प्रक्रिया पर बहुत प्रभाव पड़ता है।

सामाजिक विज्ञान के शिक्षण में दृष्टिकोण:

सामाजिक विज्ञान का मुख्य उद्देश्य बच्चे में नैतिक और मानसिक ऊर्जा को बढ़ावा देना है ताकि वह बच्चे को अपनी व्यक्तित्व से समझौता किए बिना समाज की विभिन्न शक्तियों के साथ स्वतंत्र रूप से सोचने और उनसे निपटने हेतु अनुकूल बना सकें। तथा इन लक्ष्यों को निम्नलिखित दृष्टिकोणों की सहायता से हासिल किया जा सकता है:

  • समस्या आधारित अधिगम: समस्या आधारित अधिगम एक सक्रिय या आत्म-निर्देशित अधिगम प्रक्रिया है जहां छात्र सामूहिक रूप से छोटे समूहों में कार्य प्रदर्शन करते हैं। समस्या आधारित अधिगम छात्रों में हस्तांतरणीय कौशल विकसित करने में मदद करता है जिन्हें विभिन्न कौशल जैसे समस्या निवारण, महत्वपूर्ण सोच, भागीदारी में रखा जा सकता है।
  • सहयोगी अधिगम: इस प्रकार के अधिगम में छात्रों की सहयोग द्वारा सूचना या ज्ञान एकत्र करने, टीमों में कार्य करने, पुस्‍तकें, भोजन आदि साझा करने की सराहना की जानी चाहिए।
  • अनुभव -आधारित अधिगम: अनुभव आधारित अधिगम में शिक्षार्थियों के वास्तविक जीवन अनुभवों को पाठ्यपुस्तक सामग्री से संबद्ध होना चाहिए। इस विधि में छात्र ऐतिहासिक स्थानों या विभिन्न प्राकृतिक स्थलों, भूमिका निभाने, सर्वेक्षण इत्यादि जैसी क्षेत्रीय यात्रा जैसे विभिन्न स्रोतों के माध्यम से जानकारी या ज्ञान इकट्ठा करते हैं।
  • समुदाय -आधारित अधिगम: समुदाय आधारित अधिगम समाज में प्रचलित विभिन्न मुद्दों की दिशा में छात्रों को संवेदनशील बनाने का एक आवश्यक तरीका है। परियोजना आधारित परियोजनाएं और कार्यक्रम समुदाय -आधारित अधिगमों का सबसे अच्छा तरीका है।

टीम शिक्षण:

टीम शिक्षण संसाधनों, हितों और विशेषज्ञता को अनुकूलित करने के उद्देश्‍य से एक-साथ कार्य करने वाले शिक्षकों के समूह को संदर्भित करता है। शिक्षकों के लिए टीम शिक्षण बहुत उपयोगी होता है जब विशेष आवश्‍यकताओं वाले छात्रों को नियमित कक्षा में शिक्षित किया जाता है। शिक्षकों की ये टीम अपनी अंतर्दृष्टि साझा करती हैं और यहां तक कि एक-दूसरे के साथ वाद-विवाद भी करती हैं।

  • टीम शिक्षण के लिए योजना, कुशल प्रबंधन, खुले मस्तिष्क, कल्पना, रचनात्मकता और जोखिम परिवर्तन विफलताओं या विनम्रता की भी आवश्यकता होती है लेकिन परिणाम इसके अनुकूल हैं।
  • टीम शिक्षण में एक व्यक्तिगत शिक्षक के आत्म-मूल्यांकन की तुलना में शिक्षकों द्वारा किए गए मूल्यांकन अधिक संतुलित या अंतर्दृष्टिपूर्ण होंगे।

सामाजिक विज्ञान की पाठ्यचर्या और पाठ्यपुस्तक:

सामाजिक विज्ञान शिक्षण और अधिगम प्रक्रिया से संबंधित समस्याओं पर काबू पाने के उद्देश्‍य से सामाजिक विज्ञान का पाठ्यक्रम व्यापक होना चाहिए या छात्रों को समाज की समझ की महत्वपूर्ण सोच विकसित करने में सक्षम होना चाहिए। सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक और पाठ्यक्रम होना चाहिए :

  • व्‍यापक (कोम्‍प्रीहेंशि‍व) जिसमें शिक्षार्थियों के साथ-साथ शिक्षकों को नियंत्रण की निष्क्रिय या वर्तमान शक्तियों के बिना ज्ञान उत्‍पन्‍न करने में शामिल किया जाता है।
  • इस तरह से डिजाइन किया गया है जो छात्रों को वैज्ञानिक जांच की संभावना प्रदान करता है।
  • लिंग के आधार पर महिलाओं की संभावनाओं को ऐतिहासिक घटनाओं और समकालीन मुद्दों से संबंधित चर्चा का एक अभिन्न अंग बनाने के संदर्भ में संबोधित करने की आवश्यकता है।
  • सामाजिक विज्ञान के पाठ्यक्रम से पता चलता है कि महिलाएं भारतीय इतिहास के साथ-साथ वर्तमान स्थितियों में भी संघर्ष करती हैं।

धन्यवाद 

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