पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहा जाता है?

By Raj Vimal|Updated : August 12th, 2022

पृथ्वी सौरमंडल का तीसरा ग्रह है, जो सूर्य से लगभग 151.59 मिलियन किलोमीटर दूर है। इसके लगभग 66% भाग पर पानी है, जिसका कारण बड़े समुद्र, नदियाँ और जलाशय हैं। पृथ्वी के जलाशयों का रंग नीला है और अन्तरिक्ष से देखने पर पृथ्वी का रंग नीला प्रतीत होता है। यही इसके नीले ग्रह होने का कारण है।

पृथ्वी के नीले दिखने का वैज्ञानिक कारण

यहाँ आप जानते हैं कि सूर्यकिरणें सात अलग रंगों से मिलकर बनी हैं। यह रंग हैं हरा, पीला, बैंगनी, नीला, आसमानी, नारंगी, और लाल। इनमें से कम तरंगदैर्ध्य वाले रंग के प्रकाश किरणों का फैलाव वायुंडल में अधिक होता है, जैसे कि बैंगनी, नीला, और आसमानी। वहीँ बड़ी तरंगदैर्ध्य वाले प्रकाश किरणें वातावरण में कम फैलती हैं और अधिक दूरी तय कर लेती हैं, जैसे कि लाल नारंगी पीला।

जब सूर्य की किरणें, पृथ्वी के वायुमंडल में आती हैं, तब वातावरण में मौजूद कण, सूरज की किरणों को प्रकीर्णन कर के सात रंगों में बांटकर में फैला देते हैं। यही कारण है कि कम तरंगदैर्ध्य वाला नीला रंग पुरे वातावरण में फ़ैल जाता है, जिससे अन्तरिक्ष से पृथ्वी नीला दिखाई देता है।

Summary

पृथ्वी को नीला ग्रह क्यों कहा जाता है?

पृथ्वी के धरातल का दो तिहाई हिस्सा महासागरों से भरा हुआ है। इन महासागरों के जल के कारण अंतरिक्ष से पृथ्वी नीले रंग की दिखाई देती है। यही कारण है, पृथ्वी को नीला ग्रह कहा जाता है।

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