प्रथम अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी सम्मलेन कब और कहाँ हुआ था?

By K Balaji|Updated : December 26th, 2022

प्रथम अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी सम्मलेन रियो डी जेनेरो में 3 से 14 जून 1992 में हुआ था। इस सम्मेलन में 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। इस विश्व प्रसिद्ध सम्मेलन को पर्यावरण और विकास पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन या रियो सम्मेलन के नाम से भी जाना जाता है। स्टॉकहोम सम्मेलन की 20वीं वर्षगांठ पर पहला पृथ्वी शिखर सम्मेलन हुआ। इसका मुख्य लक्ष्य भविष्य की पर्यावरण संबंधी चिंताओं पर चर्चा करना और उन्हें दूर करने के लिए एक ठोस योजना विकसित करना था। यह पहला अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन था जिसमें दुनिया भर के देश पर्यावरण के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए एकत्रित हुए थे।

प्रथम अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी सम्मलेन

अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी सम्मलेन रियो डी जेनेरो में 3 से 14 जून,1992 में हुआ था| यह समिट एक बड़ी बैठक थी जहां दुनिया भर के लोग पर्यावरण के बारे में बात करने के लिए एक साथ आए थे। रियो शिखर सम्मेलन पर्यावरण के मुद्दों पर चर्चा करने के लिए विश्व नेताओं की एक बैठक है।

शिखर सम्मेलन का एक महत्वपूर्ण परिणाम जलवायु परिवर्तन सम्मेलन पर एक समझौता था, जिसके कारण क्योटो प्रोटोकॉल और पेरिस समझौता हुआ। एक अन्य समझौते में कहा गया है कि "स्वदेशी लोगों की भूमि पर ऐसी कोई भी गतिविधि नहीं की जाएगी जिससे पर्यावरण का क्षरण हो या जो सांस्कृतिक रूप से अनुपयुक्त हो"।

यह एक दीर्घकालिक योजना है, और इसमें बहुत सी विभिन्न चीज़ें शामिल हैं। रियो डी जनेरियो शिखर सम्मेलन के दौरान एजेंडा 21 को भी अपनाया गया था। एजेंडा 21 वैश्विक सहयोग के माध्यम से पर्यावरणीय क्षति, गरीबी, बीमारी आदि को रोकने के लिए विश्व नेताओं द्वारा हस्ताक्षरित एक घोषणा है। रियो सम्मलेन से जुड़े मुद्दे हमने नीचे लिखे हुए हैं| 

  • वाहनों से बढ़ते उत्सर्जन, प्रदूषित हवा और अन्य कारणों से होने वाले स्वास्थ्य समस्याओं को कम करना।
  • पेट्रोल के वैकल्पिक ईंधनों पर निर्भरता बढ़ाना
  • रासायनिक कचरों का उचित प्रबंधन करना
  • वनों और पर्यावरण का उचित संरक्षण
  • सभी देशों के नेतृत्त्व कर्ताओं ने बने कानून पर हस्ताक्षर किया।

Summary:

प्रथम अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी सम्मलेन कब और कहाँ हुआ था?

रियो डी जेनेरियो शहर में पहला अंतरराष्ट्रीय पृथ्वी सम्मलेन सन्न 1992 में 3 से 14 जून में हुआ था। इस शिखर सम्मेलन में भारत सहित 100 से अधिक देशों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया था। यह सम्मेलन वैश्विक पर्यावरणीय मुद्दों और सामाजिक आर्थिक विकास को संबोधित करने के लिए आयोजित किया गया था, और यह वह समय भी था जब एजेंडा 21 को अपनाया गया था।

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