यूपीएससी राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध पाठ्यक्रम 2022 - यूपीएससी पीएसआईआर (PSIR) वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम पीडीएफ

By Shubhra Anand Jain|Updated : August 30th, 2022

राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध या पीएसआईआर यूपीएससी के सबसे लोकप्रिय वैकल्पिक विषयों में से एक है क्योंकि यूपीएससी पीएसआईआर (PSIR) वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम में सामान्य अध्ययन (GS) पाठ्यक्रम का एक बड़ा भाग होता है। जिन अभ्यर्थियों ने पीएसआईआर के साथ यूपीएससी परीक्षा में शामिल होने का निर्णय लिया है, उन्हें कवर किए जाने वाले विषयों को समझने के लिए राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध के विस्तृत पाठ्यक्रम को समझना होगा।

इस वैकल्पिक विषय के साथ तैयारी प्रारंभ करने के लिए यूपीएससी पीएसआईआर (PSIR) पाठ्यक्रम डाउनलोड करें क्योंकि इससे आपको अपनी तैयारी को मूर्त रूप देने में मदद मिलेगी। यूपीएससी राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम (वैकल्पिक) में बड़े पैमाने पर राजनीतिक सिद्धांत, अंतरराष्ट्रीय संबंध, भारतीय राजनीति, तुलनात्मक राजनीति और बहुत से संबंधित विषयों को शामिल किया गया है।

Table of Content

राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध (PSIR) वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम का विहगावलोकन

यूपीएससी पीएसआईआर वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम को प्रश्नपत्र 1 और प्रश्नपत्र 2 नामक दो प्रश्नपत्रों में विभाजित किया गया है। प्रत्येक प्रश्नपत्र 250 अंक का होता है और प्रकृति में वर्णनात्मक होता है।

यूपीएससी राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम

उप-विषय

यूपीएससी आईएएस राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध वैकल्पिक विषय प्रश्नपत्र 1

खंड क : राजनीतिक सिद्धांत और भारतीय राजनीति

खंड ख : भारत सरकार और राजनीति

यूपीएससी आईएएस राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध वैकल्पिक विषय प्रश्नपत्र 2

खंड क : तुलनात्मक राजनीतिक विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय राजनीति

खंड ख : भारत और विश्व

पीएसआईआर (PSIR) वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम आईएएस परीक्षा पास करने के बाद भी बेहद फायदेमंद है क्योंकि आपकी नौकरी में पर्याप्त रूप से यह विषय उपयोगी हो सकता है।

बहुत से लोग सोचते हैं कि यूपीएससी (UPSC) राजनीति विज्ञान वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम बहुत विस्तृत और उबाऊ है, हालांकि, किसी भी संभावित सरकारी कर्मचारी के लिए यह सबसे अधिक शिक्षाप्रद और महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। पीएसआईआर (PSIR) में देश के कानून, विचार और अवधारणाओं को शामिल किया जाता है जो किसी भी सरकार या राज्य के साथ-साथ भारतीय राष्ट्रवाद और अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था को रेखांकित करता है। अपने गैर-तकनीकी चरित्र के कारण, सामान्य अध्ययन राजनीति शास्त्र को तैयारी में आसानी से शामिल किया जा सकता है।

यूपीएससी (UPSC) राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम की पीडीएफ डाउनलोड करें

नीचे दिए गए सीधे लिंक का उपयोग करके यूपीएससी राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम पीडीएफ को अंग्रेजी और हिंदी दोनों में डाउनलोड करें।

यूपीएससी (UPSC) राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम प्रश्नपत्र- 1

प्रश्न पत्र 1 : राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध

राजनैतिक सिद्धांत एवं भारतीय राजनीति

  1. राजनैतिक सिद्धांत अर्थ एवं उपागम I
  2. राज्य के सिद्धांत उदारवादी, नवउदारवादी, मार्क्सवादी, बहुवादी पश्च-उपनिवेशी एवं नारी-अधिकारवादी ।
  3. न्याय: रॉल्स के न्याय के सिद्धांत के विशेष संदर्भ में न्याय के संप्रत्यय एवं इसके समुदायवादी समालोचक ।
  4. समानता सामाजिक, राजनैतिक एवं आर्थिक समानता एवं स्वतंत्रता के बीच संबंध, सकारात्मक कार्य।
  5. अधिकारः अर्थ एवं सिद्धांत, विभिन्न प्रकार के अधिकार, मानवाधिकार की संकल्पना ।
  6. लोकतंत्रः क्लासिकी एवं समकालीन सिद्धांत. लोकतंत्र के विभिन्न मॉडल प्रतिनिधिक, सहभागी एवं विमर्शी।
  7. शक्ति, प्राधान्य, विचारधारा एवं वैधता की संकल्पना ।
  8. राजनैतिक विचारधाराएँ - उदारवाद, समाजवाद, मार्क्सवाद, फासीवाद, गांधीवाद एवं नारी-अधिकारवाद।
  9. भारतीय राजनैतिक चिंतन: धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र एवं बौद्ध परंपराएं, सर सैयद अहमद खान, श्री अरविंद, एम. के. गांधी, बी आर अम्बेडकर, एम. एन. रॉय I
  10. पाश्चात्य राजनैतिक चिंतन: प्लेटो अरस्तु, मैकियावेली, हॉब्स लॉक, जॉन एस मिल, मार्क्स, ग्राम्स्की, हान्ना आरेन्ट I

भारतीय शासन एवं राजनीति

1. भारतीय राष्ट्रवाद:

  • भारत के स्वाधीनता संग्राम की राजनैतिक कार्यनीतियाँ संविधानवाद से जनःसत्याग्रह असहयोग सविनय अवज्ञा एवं भारत छोड़ो, उग्रवादी एवं क्रांतिकारी आंदोलन, किसान एवं कामगार आंदोलन।
  • भारतीय राष्ट्रीय आदोलन के परिप्रेक्ष्य उदारवादी, समाजवादी एवं मार्क्सवादी. उग्र मानवतावादी एवं दलित

2. भारत के संविधान का निर्माण: ब्रिटिश शासन का रिक्य, विभिन्न सामाजिक एवं राजनैतिक परिप्रेक्ष्य I

3. भारत के संविधान की प्रमुख विशेषताएं: प्रस्तावना, मौलिक अधिकार तथा कर्त्तव्य, नीति निर्देशक सिद्धांत, संसदीय प्रणाली एवं संशोधन प्रक्रिया, न्यायिक पुनर्विलोकन एवं मूल संरचना सिद्धांत।

4. (क) संघ सरकार के प्रधान अंग कार्यपालिका, विधायिका एवं सर्वोच्च न्यायालय की विचारित भूमिका एवं वास्तविक कार्यप्रणाली ।

(ख) राज्य सरकार के प्रधान अग कार्यपालिका, विधायिका एवं उच्च न्यायालयों की विचारित भूमिका एवं वास्तविक कार्यप्रणाली ।

5. आधारिक लोकतंत्र: पंचायती राज एवं नगर शासन 73वें एवं 74वें संशोधनों का महत्व, आधारिक आंदोलन |

6. नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक, वित्त आयोग, संघ लोक सेवा आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जातियां आयोग, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजातिया आयोग, राष्ट्रीय महिला आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय अल्पसख्यक आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग I

7. संघ राज्य पद्धति: सांविधानिक उपबंध केंद्र राज्य संबंध का बदलता स्वरूप, एकीकरणवादी प्रवृत्तिया एवं क्षेत्रीय आकांक्षाएं, अंतर-राज्य विवाद I

8. योजना एवं आर्थिक विकास: नेहरूवादी एवं गांधीवादी परिप्रेक्ष्य योजना की भूमिका एवं निजी क्षेत्र, हरित क्रांति, भूमि सुधार एवं कृषि संबंध, उदारीकरण एवं आर्थिक सुधार I

9. भारतीय राजनीति में जाति, धर्म एवं नृजातीयता I

10. दल प्रणाली: राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय राजनैतिक दल दलों के वैचारिक एवं सामाजिक आधार, बहुदलीय राजनीति के स्वरूप, दबाव समूह निर्वाचक आचरण की प्रवृत्तियां, विधायकों के बदलते सामाजिक-आर्थिक स्वरुप I

11. सामाजिक आंदोलन: नागरिक स्वतंत्रताएं एवं मानवाधिकार आंदोलन, महिला आंदोलन पर्यावरण आंदोलन I

यूपीएससी (UPSC) राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम प्रश्नपत्र- 2

प्रश्न पत्र 2: तुलनात्मक राजनीति तथा अंतर्राष्ट्रीय संबंध - तुलनात्मक राजनैतिक विश्लेषण एवं अंतर्राष्ट्रीय राजनीति

1. तुलनात्मक राजनीति: स्वरूप एवं प्रमुख उपागम, राजनैतिक अर्थव्यवस्था एवं राजनैतिक समाजशास्त्रीय परिप्रेक्ष्य, तुलनात्मक प्रक्रिया की सीमाएँ ।

2. तुलनात्मक परिप्रेक्ष्य में राज्य: पूंजीवादी एवं समाजवादी अर्थव्यवस्थाओं में राज्य के बदलते स्वरूप एवं उनकी विशेषताएं तथा उन्नत औ‌द्योगिक एवं विकासशील समाज।

3. राजनैतिक प्रतिनिधान एवं सहभागिता: उन्नत औद्योगिक एवं विकासशील समाज में राजनैतिक दल, दबाव समूह एवं सामाजिक आंदोलन।

4. भूमंडलीकरण: विकसित एवं विकासशील समाजों से प्राप्त अनुक्रियाएं।

5. अंतर्राष्ट्रीय संबंधों के अध्ययन के उपागम: आदर्शवादी यथार्थवादी, मार्क्सवादी, प्रकार्यवादी एवं प्रणाली सिद्धांत।

6. अंतर्राष्ट्रीय संबंधों में आधारभूत संकल्पनाएँ: राष्ट्रीय हित सुरक्षा एवं शक्ति, शक्ति संतुलन एवं प्रतिरोध पर राष्ट्रीय कर्ता एवं सामूहिक सुरक्षा विश्व पूजीवादी अर्थव्यवस्था एवं भूमंडलीकरण I

7. बदलती अंतर्राष्ट्रीय राजनीति व्यवस्थाः महाशक्तियों का उदय, कार्यनीतिक एवं वैचारिक दद्विधुरीयता, शस्त्रीकरण की होड़ एवं शीत युद्ध. नाभिकीय खतरा ।

8. अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था का उद्भव: ब्रेटनवुड से विश्व व्यापार संगठन तक, समाजवादी अर्थव्यवस्थाएं तथा पारस्परिक आर्थिक सहायता परिषद (CMEA) ,नव अंतर्राष्ट्रीय आर्थिक व्यवस्था की तृतीय विश्व की मांग, विश्व अर्थव्यवस्था का भूमंडलीकरण।

9. संयुक्त राष्ट्र : विचारित भूमिका एव वास्तविक लेखा-जोखा, विशेषीकृत संयुक्त राष्ट्र अभिकरण लक्ष्य एवं कार्यकरण ,संयुक्त राष्ट्र सुधारों की आवश्यकता।

10. विश्व राजनीति का क्षेत्रीकरण: यूरोपीय संघ(EU) ,आसियान(ASEAN) ,एपेक(APEC) ,सार्क(SAARC) ,नाफ्टा(NAFTA) I

11. समकालीन वैश्विक सरोकार: लोकतंत्र, मानवाधिकार, पर्यावरण, लिंग न्याय ,आतंकवाद, नाभिकीय प्रसार I

भारत तथा विश्व

1. भारत की विदेश नीतिः विदेश नीति के निर्धारक, नीति निर्माण की संस्थाएं, निरंतरता एवं परिवर्तन I

2. गुट निरपेक्षता आंदोलन को भारत का योगदान: विभिन्न चरण, वर्तमान भूमिका I

3. भारत और दक्षिण एशिया:

  • क्षेत्रीय सहयोग: सार्क पिछले निष्पादन एवं भावी प्रत्याशाएं
  • दक्षिण एशिया मुक्त व्यापार क्षेत्र के रूप में
  • भारत की पूर्व अभिमुखन नीति
  • क्षेत्रीय सहयोग की बाधाएँ: नदी जल विवाद: अवैध सीमा पार उत्प्रवासन, नृजातीय द्वंद एवं उपप्लव, सीमा विवाद I

4. भारत एवं वैश्विक दक्षिण: अफ्रीका एवं लातीनी अमेरिका के साथ संबंध NIEO (एनआईईओ) एवं विश्व व्यापार संगठन (WTO) वार्ताओं के लिए आवश्यक नेतृत्व की भूमिका I

5. भारत एवं वैश्विक शक्ति केंद्र: संयुक्त राज्य अमेरिका, यूरोपीय संघ (EU), जापान, चीन और रूस I

6. भारत एवं संयुक्त राष्ट्र प्रणाली: संयुक्त राष्ट्र शांति अनुरक्षण में भूमिका, सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग I

7. भारत एवं नाभिकीय प्रश्न: बदलते प्रत्यक्षण एवं नीति।

8. भारतीय विदेश नीति में हाल के विकास: अफगानिस्तान में हाल के सकट पर भारत की स्थिति, इराक एवं पश्चिम एशिया, संयुक्त राज्य अमेरिका एवं इजराइल के साथ बढ़ते संबंध, नई विश्व व्यवस्था की दृष्टि I

यूपीएससी राजनीति विज्ञान वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम के लिए तैयारी कैसे करें?

आपने देखा है कि राजनीति विज्ञान के वैकल्पिक विषय के पाठ्यक्रम को दो भागों में बांटा गया है और प्रत्येक खंड में दो भाग होते हैं। अब यह समझें कि निम्नलिखित में से प्रत्येक की तैयारी कैसे करें:-

प्रश्नपत्र 1 भाग क :

  • विषय के स्थैतिक या स्थिर भाग को पूरा करने पर ध्यान दें।
  • फिर, इस खंड की अपनी समझ को सुदृढ़ करने के लिए इसकी कई बार समीक्षा करें।

आप इस खंड को पूरा करने के लिए निम्नलिखित पुस्तकों की सहायता ले सकते हैं:-

  • पॉलिटिकल थॉट्स : ओ. पी. गौबा 
  • पॉलिटिकल थॉट्स ऑफ इंडिया : वी. आर. मेहता
  • वेस्टर्न पॉलिटिकल थॉट्स : ब्रायन नेल्सन (उत्कृष्ट पुस्तक)

इस खंड में बताया गया है कि यह विषय सामान्य अध्ययन (GS) I और II के साथ महत्वपूर्ण रूप से ओवरलैप करता है, लेकिन इसका अध्ययन वैकल्पिक विषय को ध्यान में रखते हुए करना चाहिए।

इस खंड में सफलता हासिल करने के लिए समसामायिकी (करेंट अफेयर्स) पर भी अच्छी पकड़ की जरूरत होती है।

आप निम्नलिखित पुस्तकों की सहायता ले सकते हैं:-

  • इंडियन नेशनल मूवमेंट – विपिन चंद्र + स्पेक्ट्रम
  • इंडियन पॉलिटी – बी. एल. फाडिआ (बेहद चयनात्मक) + लक्ष्मीकांत

प्रश्नपत्र 2 खंड क

यह भाग गतिशील (डॉयनामिक) और स्थिर (स्टेटिक) विषयों का संयोजन है।

स्थिर विषयों के लिए, आप इग्नू के नोट्स देख सकते हैं। हालाँकि, इग्नू के नोट्स पढ़ते समय बेहद चयनात्मक रहें। आपको शुरुआत से अंत तक पढ़ने की जरूरत नहीं है। पाठ्यक्रम की मांग के अनुसार पढ़ें।

प्रश्नपत्र 2 खंड ख

यह भाग काफी हद तक समसामयिकी (करेंट अफेयर्स) पर निर्भर है। प्रश्न आमतौर पर समसामयिक विषयों पर पूछे जाते हैं। इसलिए, सुनिश्चित करें कि आप करंट अफेयर्स से परिचित हैं।

पीएसआईआर (PSIR) वैकल्पिक विषय का पाठ्यक्रम - सर्वश्रेष्ठ पुस्तकें

नीचे उल्लिखित यूपीएससी पीएसआईआर पुस्तक सूची देखें ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि आप पाठ्यक्रम को संपूर्णत: पूरा कर रहे हैं।

खंड

पुस्तक का नाम

राजनीतिक सिद्धांत

ब्रायन नेल्सन, सुब्रत मुखर्जी एवं सुशीला रामास्वामी द्वारा लिखित वेस्टर्न पॉलिटिकल थॉट

खंड ख : भारत सरकार और राजनीति

ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ माडर्न इंडिया स्पेक्ट्रम

भारतीय संविधान

इंडियन कांस्टीट्यूशन – डी. डी. बासु

भारतीय राजनीति

भानु मेहता द्वारा लिखित दि ऑक्सफोर्ड कंपेनियन टु पॉलिटिक्स इन इंडिया

भारतीय विचारक

वी. आर. मेहता

तुलनात्मक राजनीति

जे. सी. जौहरी द्वारा लिखित कम्परेटिव पॉलिटिक्स

अंतरराष्ट्रीय राजनीति का सिद्धांत

जॉन बेलिस, पेट्रीसिया ओवेन्स, और स्टीव स्मिथ द्वारा लिखित ग्लोबलाइजेशन ऑफ वर्ल्ड पॉलिटिक्स

विश्व के राजनीतिक मुद्दे

एंड्रयू हेवुड द्वारा लिखित ग्लोबल पॉलिटिक्स

भारत और विश्व

सी. राजमोहन द्वारा संपादित दि ऑक्सफोर्ड हैंडबुक ऑफ इंडियन फॉरेन पॉलिसी

अंतरराष्ट्रीय संबंध यूपीएससी (UPSC) पाठ्यक्रम में पुस्तकों के साथ-साथ करंट अफेयर्स की भी निरंतर तैयारी की आवश्यकता होती है। समसामयिक घटनाओं को सिद्धांतों के साथ समझना और इनका आपसी संबंध जोड़ना आवश्यक है। मुद्दों की प्रकृति और पढ़े जाने वाले विषय की गहराई को समझने के लिए पीएसआईआर (PSIR) के कम से कम पिछले 3 वर्षों के के प्रश्नपत्रों को देखने की सलाह दी जाती है। इससे आपको यह निर्धारित करने में मदद मिलेगी कि आपको वैकल्पिक विषय में कितना और कब तक समय देने की आवश्यकता है।

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FAQs on यूपीएससी राजनीति विज्ञान और अंतरराष्ट्रीय संबंध पाठ्यक्रम 2022

  • यूपीएससी राजनीति विज्ञान एवं अंतर्राष्ट्रीय संबंध पाठ्यक्रम 2022 में प्रश्नपत्र 1 और प्रश्नपत्र 2 शामिल हैं। प्रश्नपत्र 1 में भारत सरकार और राजनीति के साथ-साथ राजनीतिक सिद्धांत और भारतीय राजनीति शामिल है। प्रश्नपत्र 2 में तुलनात्मक राजनीतिक विश्लेषण और अंतरराष्ट्रीय राजनीति और भारत और विश्व शामिल हैं।

  • यूपीएससी राजनीति विज्ञान वैकल्पिक पाठ्यक्रम अन्य वैकल्पिक विषयों के समान ही है। यदि योजनाबद्ध और रणनीतिक रूप से तैयारी की जाए तो पाठ्यक्रम को समय पर पूरा किया जा सकता है।

  • यदि कोई उम्मीदवार यूपीएससी राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम 2022 को समझने के लिए कई मानक पुस्तकों को पढ़े और समझे और स्वयं उत्तर लेखन का अभ्यास करे तो कोचिंग आवश्यक नहीं है। अभ्यर्थी उत्तर लेखन मॉक टेस्ट के लिए भुगतान कर सकते हैं ताकि विशेषज्ञों द्वारा उनके उत्तरों का मूल्यांकन किया जा सके और त्रुटियों को कम किया जा सके। 


  • यूपीएससी राजनीति विज्ञान पाठ्यक्रम के भारतीय राजनीति खंड के लिए अधिक वैचारिक स्पष्टता और जानकारी की आवश्यकता है।

  • हां, राजनीति और राजनीति विज्ञान अलग-अलग हैं। राजनीति विज्ञान में राजनीतिक शक्ति, अधिकार और जिम्मेदारियों की मौजूदा धारणाओं का अध्ययन, शोध किया जाता और इन पर पुनर्विचार किया जाता है। 

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