पीताम्बर में कौन सा समास है?

By Raj Vimal|Updated : August 25th, 2022

पीताम्बर में बहुब्रिही समास है। इसका कारण है बहुब्रिही समास की परिभाषा। हिंदी व्याकरण में दिए परिभाषा के अनुसार, समास का वह शब्द जिसके कोई पद प्रधान न हो कर नए शब्द को प्रधान बनाते हैं, वह बहुब्रिही समास कहलाता है। 

बहुव्रीहि समास के उदहारण

नीचे दिए गए सभी उदाहरणों से आप यह समझ गए होंगे कि दो या अधिक शब्दों के मिलने पर जब वह अपनी प्रधानता खो देते हैं और नया समास बनाते हैं, वह बहुव्रीहि समास होता है।

  • त्रिनेत्र - तीन हैं नेत्र (आँख) जिनके अर्थात शिव
  • चंद्रमौली - चंद्र है मौली (सिर) पर जिसके अर्थात शंकर
  • तिरंगा = तीन है रंग जिसमें अर्थात तिरंगा
  • शाखामृग - शाखा पर दौड़ता है जो मृग अर्थात बंदर
  • वक्रोदर = वक्र है उदर (पेट) जिसका अर्थात गणेश
  • दशरथनंदन - वह जो दशरथ के नंदन (बेटे) हैं अर्थात राम
  • नीलकंठ - नीला है कंठ जिनका अर्थात शिव
  • हलधर - जो हल को धारण करता है अर्थात बलराम
  • सुर्यपुत्र - वह जो सूर्य के पुत्र हैं अर्थात कर्ण
  • विषधर - विष को धारण करने वाला अर्थात सांप

Summary

पीताम्बर में कौन सा समास है?

समास का पता लगाने के लिए समास विग्रह करना जरुरी है। पीला है अम्बर जिनका अर्थात पीताम्बर। यहाँ समास के किसी पद में प्रधानता न हो कर नए शब्द की प्रधानता है, अर्थात पीताम्बर में बहुब्रिही समास है

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