प्राकृतिक कृषि क्या है? - पर्यावरण विषय सम्बंधित महत्वपूर्ण स्टडी नोट्स PDF

By Abhishek Jain |Updated : April 8th, 2022

हाल ही में राष्ट्रीय कृषि विस्तार प्रबंधन संस्थान द्वारा आयोजित प्राकृतिक खेती पर व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम का कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा उद्घाटन किया गया, प्राकृतिक कृषि को "रसायन मुक्त कृषि और पशुधन आधारित" कृषि के रूप में परिभाषित किया जा सकता है, प्राकृतिक कृषि कृषि-पारिस्थितिकी के मानकों पर आधारित एक विविध कृषि प्रणाली है जो फसलों, पेड़ों और पशुधन को एकीकृत करती है, जिससे कार्यात्मक जैव विविधता का इष्टतम उपयोग सुनिश्चित किया जा सके।

लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में पर्यावरण विषय से कई प्रश्न पूछे जाते हैं। यहां, हम आपको सबसे महत्वपूर्ण पर्यावरण विषय प्राकृतिक कृषि पर एक महत्वपूर्ण लेख प्रदान कर रहे हैं, जो आगामी उत्तर प्रदेश राज्य परीक्षा जैसे UPPSC, UP Lekhpal, UPPSC RO ARO आदि परीक्षाओं में पूछे जा सकते हैं।

Table of Content

प्राकृतिक कृषि क्या है?

प्राकृतिक कृषि के दृष्टिकोण को एक जापानी किसान और दार्शनिक मासानोबू फुकुओका  ने वर्ष 1975 में अपनी पुस्तक द वन-स्ट्रॉ रेवोल्यूशन में पेश किया था। प्राकृतिक कृषि पारंपरिक भारतीय पद्धतियों से उद्धृत रासायनिक मुक्त कृषि की एक विधि है, हालाँकि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर प्राकृतिक खेती को पुनर्योजी कृषि का एक रूप माना जाता है, जो ग्रह को बचाने के लिये एक प्रमुख रणनीति है। प्राकृतिक कृषि, कृषि पद्वति का एक अनूठा मॉडल है जो कृषि-पारिस्थितिकी पर निर्भर करता है, प्राकृतिक कृषि का उद्देश्य उत्पादन की लागत को कम करना और एक स्थायी स्तर पर वापसी को बढ़ावा देना है, प्राकृतिक कृषि मे उर्वरक, कीटनाशक और गहन सिंचाई जैसे महंगे इनपुट की कोई आवश्यकता नहीं है, प्राकृतिक कृषि मिट्टी की सतह पर सूक्ष्मजीवों और केंचुओं द्वारा कार्बनिक पदार्थों के विखंडन को प्रोत्साहित करती है, धीरे-धीरे समय के साथ मिट्टी में पोषक तत्वों को जोड़ती है।

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प्राकृतिक कृषि का क्या महत्व है?

प्राकृतिक कृषि का आशय पद्धति, प्रथाओं और उपज में वृद्धि संबंधी प्राकृतिक विज्ञान से है ताकि कम साधनों में अधिक उत्पादन किया जा सके वर्तमान स्थिति में प्राकृतिक कृषि अत्यंत महत्वपूर्ण है प्राकृतिक कृषि के निम्नलिखित महत्व है-

  • प्राकृतिक कृषि उत्पादन की लागत को न्यूनतम करता है।
  • प्राकृतिक कृषि में किसी भी प्रकार के सिंथेटिक रसायन का उपयोग नहीं किया जाता है, इसलिये प्राकृतिक कृषि बेहतर स्वास्थ्य को सुनिश्चित करती है।
  • प्राकृतिक कृषि के माध्यम से जल की खपत को न्यूनतम किया जा सकता है।
  • प्राकृतिक कृषि मृदा स्वास्थ्य को पुनर्जीवित करने में काफी सहायक है।
  • प्राकृतिक कृषि पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देती है।

प्राकृतिक कृषि: जीरो बजट प्राकृतिक कृषि

सुभाष पालेकर ने 1990 के दशक के दौरान महाराष्ट्र के सूखाग्रस्त क्षेत्र अमरावती जिले में अपने खेत में जीरो बजट प्राकृतिक कृषि का प्रयोग कर सफलता प्राप्त की थी, जीरो बजट प्राकृतिक कृषि प्राकृतिक कृषि के तरीकों का एक समूह तथा एक जमीनी किसान आंदोलन भी है, जो भारत के विभिन्न राज्यों में फैल गया है, जीरो बजट प्राकृतिक कृषि में "शून्य बजट" अवधारणा के अनुसार, किसानों को उर्वरकों और अन्य कृषि कार्यों पर कोई पैसा खर्च नहीं करना पड़ेगा, जीरो बजट प्राकृतिक कृषि अवधारणा के अनुसार 98% से अधिक पोषक तत्व जिनकी फसलों को आवश्यकता होती है पहले से ही प्रकृति में मौजूद हैं, तथा शेष 1.5-2% मिट्टी से लिए जाते हैं।

जीरो बजट प्राकृतिक कृषि के स्तम्भ

जीरो बजट प्राकृतिक कृषि मुख्य रूप से 4 स्तंभों पर आधारित है जो इस प्रकार है-

  • जीवामृत गाय के गोबर और मूत्र (देसी नस्लों के), गुड़, दालों के आटे, पानी और खेत के बांध से मिट्टी का किण्वित मिश्रण।
  • बीजामृत देसी गाय के गोबर और मूत्र, पानी, बांध मिट्टी और चूने का मिश्रण।
  • मल्चिंग, या सूखे भूसे या गिरे हुए पत्तों की एक परत के साथ पौधों को ढंकना, मिट्टी की नमी को संरक्षित करने और जड़ों के आसपास के तापमान को 25-32 डिग्री सेल्सियस पर रखता है।
  • वाफासा, (आवश्यक नमी) वायु संतुलन बनाए रखने के लिए पानी उपलब्ध कराना।

प्राकृतिक कृषि और जैविक कृषि के मध्य अंतर

प्राकृतिक कृषि और जैविक कृषि, कृषि के दो अलग-अलग प्रकार हैं प्राकृतिक कृषि और जैविक कृषि के मध्य प्रमुख अंतर निम्नलिखित हैं-

  • प्राकृतिक कृषि में मिट्टी में न तो रासायनिक और न ही जैविक खाद का प्रयोग किया जाता है वहीं इसके विपरीत जैविक कृषि में जैविक उर्वरक और खाद का उपयोग किया जाता हैं।
  • प्राकृतिक कृषि में मिट्टी की सतह पर ही रोगाणुओं और केंचुओं द्वारा कार्बनिक पदार्थों के अपघटन को प्रोत्साहित किया जाता है वहीं जैविक कृषि के लिये अभी भी बुनियादी कृषि पद्धतियों जैसे- जुताई आदि की आवश्यकता होती है।
  • जैविक कृषि, प्राकृतिक कृषि की तुलना में अभी भी महँगी है।
  • प्राकृतिक कृषि परम्परागत तरीकों पर आधारित है वहीं इसके विपरीत जैविक कृषि पर आधुनिकीकरण का प्रभाव देखा जा सकता है।

प्राकृतिक कृषि स्टडी नोट्स पीडीफ़ डाउनलोड

लगभग सभी प्रतियोगी परीक्षाओं में, कई पर्यावरण विषय सम्बंधित करंट अफेयर्स प्रश्न पूछे जाते हैं इसलिए आपकी तैयारी को ध्यान में रखते हुए प्राकृतिक कृषि से सम्बंधित सभी महत्वपूर्ण जानकारी की पीडीएफ उपलब्ध करायी जा रही है जिसकी सहयता से आप अपनी तैयारी को और बेहतर कर सकते है।

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FAQs

  • भारत में जीरो बजट प्राकृतिक कृषि के जनक सुभाष पालेकर को माना जाता है जिन्होंने 1990 में अमरावती जिले में जीरो बजट प्राकृतिक कृषि का प्रयोग कर सफलता हासिल की।

  • हाँ, भारत में सरकार द्वारा परंपरागत कृषि विकास योजना (PKVY) के तहत प्राकृतिक कृषि को भारतीय प्राकृतिक कृषि पद्धति कार्यक्रम के रूप में बढ़ावा दिया जाता है।

  • प्राकृतिक कृषि का विचार एक जापानी किसान और दार्शनिक मासानोबू फुकुओका ने वर्ष 1975 में अपनी पुस्तक द वन-स्ट्रॉ रेवोल्यूशन में पेश किया था।

  • प्राकृतिक कृषि मिट्टी की उर्वरता और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को बढ़ाने तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को कम करने या न्यून करने जैसे कई अन्य लाभ प्रदान करते हुए किसानों की आय बढ़ाने में सहायक है।

  • प्राकृतिक कृषि का प्राथमिक उद्देश्य उत्पादन की लागत को कम करना और एक स्थायी स्तर पर किसानों की आय को बढ़ाना है।

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