नागरिकों के मूल अधिकारों का रक्षक कौन हैं?

By Raj Vimal|Updated : August 30th, 2022

भारत के नागरिकों को कुल 6 मौलिक अधिकार दिए गए था। नागरिकों के मूल अधिकारों का रक्षक भारत के सर्वोच्च न्यायालय है। संविधान के अनुसार हर नागरिक को दिए गए अधिकारों को जीने का हक है वहीँ कर्तव्यों को मानना भी होगा। किसी भी नागरिक को दिए अधिकारों की रक्षा भारत का सुप्रीम कोर्ट करता है।

भारत के नागरिकों के मूल अधिकार

  • समानता का अधिकार- संविधान के अनुच्छेद 14 से 18 तक भारत के नागरिकों को समानता से जीने का अधिकार देता है। 
  • स्वतंत्रता का अधिकार- संविधान के अनुच्छेद 19 से 22 तक नागरिकों के स्वतंत्रता से जीने का अधिकार को बताता है।
  • सम्पत्ति रखने का अधिकार- इस मौलिक अधिकार को अब समाप्त हो गया।
  • शोषण के विरूद्ध अधिकार का उल्लेख अनुच्छेद 23 और 24 में किया गया।
  • नगरिकों के धार्मिक स्वतंत्रता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 25 से 28 में बताया गया है।
  • भारत के लोगों को शिक्षा एवं संस्कृति का अधिकार देता है। इसका उल्लेख अनुच्छेद 29 एवं 30 में है।
  • संवैधानिक उपचारों का अधिकार अनुच्छेद 32 देता है।

Summary

नागरिकों के मूल अधिकारों का रक्षक कौन हैं?

भारत के सर्वोच्च न्यायालय को नागरिकों के मूल अधिकारों का रक्षक कहा गया है। उनके अधिकारों के हुए हनन के खिलाफ नागरिक देश के सुप्रीम कोर्ट में अपील कर सकते हैं।

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