Know all about Carbon Neutrality

By Sudheer Kumar K|Updated : July 25th, 2021

The Non-Profit Energy and Climate Intelligence Unit -ECIU has reported that recently 32 countries have targeted to achieve carbon-neutral status in or around mid-century, Read Further for Details.

General studies Paper: III(Environment and Ecology)

जानिये क्या है कार्बन न्यूट्रैलिटी

 

संदर्भ

  • गैर-लाभकारी ऊर्जा और जलवायु खुफिया इकाई ने जानकारी दी है कि हाल ही में 32 देशों ने मध्य शताब्दी या उसके आस पास कार्बन न्यूट्रैलिटी प्राप्त करने का लक्ष्य रखा है ।
  • प्रमुख बिन्दु
  • हाल ही में 32 देशों ने मध्य शताब्दी या उसके आस पास कार्बन न्यूट्रैलिटी प्राप्त करने का लक्ष्य जरूर रखा है । किन्तु विशेषज्ञों का कहना है कि वर्ष 2050 तक कार्बन तटस्थता (नैट कार्बन उत्सर्जन शून्य) हासिल करने के लिये संकल्पित देशों की सरकारों और व्यवसायों की संख्या तो बढ़ रही है, लेकिन दुनिया अब भी उस लक्ष्य की प्राप्ति से दूर है।
  • हालांकि संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुटेरेश ने स्वच्छ और हरित भविष्य की दिशा में प्रयासों की पैरवी के लिये महत्वाकाँक्षी जलवायु कार्रवाई पर ज़ोर दिया है।

क्या है कार्बन न्यूट्रैलिटी?

  • कार्बन न्यूट्रैलिटी या नेट जीरो कार्बन उत्सर्जन का तात्पर्य है कि जितनी कार्बन डाईऑक्साइड उत्सर्जित की जाएगी, उतनी ही कार्बन डाईऑक्साइड वातावरण से हटाई जाएगी।
  • इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अर्थव्यवस्था के हर अहम सेक्टर को इको फ्रेंडली बनाना होता है।
  • विभिन्न देशों को अपनी अर्थव्यवस्था को प्रदूषण फैलाने वाले कोयले और गैस व तेल से चलने वाले बिजली स्टेशनों की जगह, पवन या सौर ऊर्जा फार्म जैसे अक्षय ऊर्जा स्रोतों के ज़रिये सशक्त करना होता है।

क्या है वर्तमान में वैश्विक स्तर पर कार्बन तटस्थता की स्थिति? 

  • विकसित देशों द्वारा कार्बन तटस्थता की घोषणाओं के बाद भी कार्बन के उत्सर्जन में अपेक्षाकृत कमी नहीं ला पा रहे हैं ।
  • संयुक्त राज्य अमेरिका और यूरोपीय संघ ने भूमि उपयोग और भूमि उपयोग परिवर्तन एवं वन संबंधित उत्सर्जन पर गंभीरता से विचार विचार नहीं किया है
  • यूरोपीय संघ (ईयू) द्वारा 2050 तक शून्य कार्बन उत्सर्जक बनने के लिए एक कानून बनाया गया है । यह सौदा यूरोपीय संघ के सभी सदस्यों पर कानूनी रूप से बाध्यकारी है। यह जलवायु कानून विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में ग्रीनहाउस उत्सर्जन को कम करने के लिए यूरोप की योजनाओं के लिए एक आधार तैयार करेगा।
  • वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम के मुताबिक़, कार्बन उत्सर्जन के मामले में चीन सबसे ऊपर है और इसके बाद अमरीका का नंबर आता है तथा तीसरे नंबर पर भारत मौजूद है।

क्या है इस पर भारत का संकल्प एवं प्रतिवद्धता?

  • विश्‍व सतत विकास शिखर सम्‍मेलन-2021 का उद्घाटन करने के बाद भारत ने कहा कि साझा प्रयासों से ही सतत विकास के लक्ष्यों को हासिल किया जा सकता है और इन लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में भारत अपनी भूमिका के लिए तैयार है।
  • भारत ने अप्रैल 2016 में औपचारिक रूप से पेरिस समझौते पर हस्ताक्षर किये थे। भारत का लक्ष्य 2005 के स्तर की तुलना में 2030 तक उत्सर्जन को 33-35 फीसद तक कम करना है।
  • इसके साथ ही भारत का लक्ष्य 2030 तक अतिरिक्त वनों के माध्यम से 2.5-3 अरब टन कार्बन डाई ऑक्साइड के बराबर कार्बन में कमी लाना है। भारत अपने लक्ष्यों की ओर तेजी से बढ़ रहा है।

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