पृथ्‍वी की आंतरिक संरचना एवं प्रक्रम, भूकंप

By Arpit Kumar Jain|Updated : March 8th, 2019

पृथ्‍वी की आंतरिक संरचना एवं प्रक्रम

आंतरिक संरचना

पृथ्‍वी की आंतरिक संरचना के बारे में जानकारी को प्रत्‍यक्ष प्रमाणों जैसे खनन, गहरे महासागरीय उत्‍खनन कार्यों, ज्‍वालामुखी विस्‍फोटों आदि और अप्रत्‍यक्ष प्रमाणों जैसे भूकंप तरंगे, जलवायु निरीक्षण, गुरुत्‍वाकर्षण बल, चुम्‍बकीय क्षेत्र आदि के माध्‍यम से प्राप्‍त किया जा सकता है। हाल के समय में, ज़ूनों (JUNO) जैसे अंतरग्रहीय अभियानों से पृथ्‍वी की आंतरिक संरचना को समझने में मदद मिली है।

पृथ्‍वी की आंतरिक संरचना

byjusexamprep

क्रस्‍ट (भूपर्पटी)

  • क्रस्‍ट पृथ्‍वी का सबसे बाहरी भंगुर क्षेत्र होता है और यह 5 - 70 कि.मी. तक फैला होता है।
  • क्रस्‍ट को निम्‍न भागों में विभाजित कर सकते हैं
    (a) महाद्वीपीय क्रस्‍ट - इसकी औसत मोटाई लगभग 30 कि.मी. है, यह मुख्‍यत: सियाल (सिलिका और एल्‍यूमीनियम) से मिलकर बनी है और यह महासागरीय क्रस्‍ट से अधिक मोटी है। महाद्वीपीय क्रस्‍ट का घनत्‍व कम है जो कि 2.7 ग्राम/सेमी3 है।
    (b) महासागरीय क्रस्‍ट - इसकी औसत मोटाई 5 किमी है और यह मुख्‍यत: सीमा (सिलिका और मैग्‍नेशियम) से मिलकर बनी है। महासागरीय क्रस्‍ट मूल में बेसाल्‍ट प्रकृति की है और य‍ह महाद्वीपीय क्रस्‍ट की तुलना में अधिक नई है। बेसाल्‍ट क्रस्‍ट का घनत्‍व 3.0 ग्राम/सेमी3 है।

मेंटल

क्रस्‍ट और ऊपरी मेंटल को लिथोस्‍फ़ीयर कहते हैं।

  • यह 2890 कि.मी. तक फैली है।
  • मेंटल के ऊपरी भाग को एस्‍थेनोस्‍फ़ीयर कहते हैं जो कि लगभग 400 कि.मी की दूरी तक फैला है। इसका मुख्‍य स्‍त्रोत मैग्‍मा है।
  • इसका घनत्‍व 3.4 ग्राम/सेमी3 है।
  • निचला मेंटल ठोस अवस्‍था में है जो कि कोर-मेंटल सीमा तक फैला है। इस पर्त को D” (डी-डबल-प्राइम) पर्त कहा जाता है।

कोर

  • कोर 2870 कि.मी. से 6370 कि.मी. तक फैला है। इसे विभाजित करते हैं
  1. तरल बाहरी कोर
  2. ठोस आंतरिक कोर : नाइफ़ – निकेल और फ़ेरस से बना है। आंतरिक कोर शेष ग्रह के घूर्णन से थोड़ा तेज घूमती है।
  • बाहरी कोर का घनत्‍व 5.5 ग्राम/सेमी3 है जो आंतरिक कोर तक 13.3 ग्राम/सेमी3 तक बढ़ जाता है।
  • डायनेमो अवधारणा बताती है कि बाहरी कोर में संवहनी धाराएं, कोरिओलिस प्रवाह के साथ मिलकर, पृथ्‍वी का चुम्‍बकीय प्रभाव उत्‍पन्‍न करती है।

पृथ्‍वी की व्‍यवस्थित संरचना:-

  • महाद्वीपीय क्रस्‍ट
  • महासागरीय क्रस्‍ट
  • ऊपरी मेंटल
  • निचला मेंटल
  • बाहरी कोर
  • आंतरिक कोर

पृथ्‍वी के आंतरिक भाग की सीमाऐं

कोनराड असम्‍बद्धता: ऊपरी और निचले महाद्वीपीय क्रस्‍ट के मध्‍य

मोहोविसिस असम्‍बद्धता, ‘मोहो’: क्रस्‍ट–मेंटल सीमा

गुटेनबर्ग असम्‍बद्धता: कोर–मेंटल सीमा

लेहमैन असम्‍बद्धता: आंतरिक और बाहरी कोर के बीच सीमा

byjusexamprep

By Kelvinsong - Own work, CC BY-SA 3.0, https://commons.wikimedia.org/w/index.php?curid=23966175

महत्‍वपूर्ण तथ्‍य:

  • पृथ्‍वी की त्रिज्‍या 6370 कि.मी. है।
  • पृथ्‍वी का व्‍यास विषुवत रेखा पर लगभग 12,756 कि.मी और ध्रुवों पर लगभग 12,715 कि.मी. है।
  • पृथ्‍वी के कुल संघटन में क्रस्‍ट का 0.5%, मेंटल का 83% और कोर का 16% भाग शामिल है।
  • पृथ्‍वी की सतह से आंतरिक गहराई में जाने पर तापमान, दाब और घनत्‍व में वृद्धि होती है।
  • गुरुत्‍वाकर्षण बल का मान ध्रुवों पर विषुवत रेखा की तुलना में अधिक होता है।
  • गुरुत्‍व विसंगति पदार्थ के द्रव्‍यमान के अनुसार गुरुत्‍व मान का अंतर होती है।

भूकंप

भूकंप पृथ्‍वी का कंपन करना है जो कि एक भ्रंश रेखा पर ऊर्जा के निकलने के कारण उत्‍पन्‍न होता है। वह बिंदु जहां ऊर्जा मुक्‍त होती है, भूकंप का केन्‍द्र (फोकस) कहते हैं। अधिकेन्‍द्र केन्‍द्र के ठीक ऊपर दिशा में पृथ्‍वी पर स्थित बिंदु होता है, जो सर्वप्रथम तरंग का अनुभव करता है।

भूकंपीय तरंगों को दो भागों में बांटा जाता है –

  • भूगर्भि‍क तरंगे – ये केन्‍द्र पर ऊर्जा के मुक्‍त होने के कारण उत्‍पन्‍न होती है और यह पृथ्‍वी की सतह से सभी दिशाओं में घूमती हैं। भूगर्भीय तरंगों को बांटा जा सकता है
  1. P तरंगें: ये प्राथमिक तरंगे हैं। ये अधिक तीव्र वेग से चलती हैं और धरातल पर सबसे पहले पहुंचती हैं। ये ध्‍वनि तरंगों के समान हैं और ठोस, द्रव और गैस पदार्थों से होकर गुजर सकती हैं। P तरंगें तरंग की दिशा के समांतर कंपन करती है जिसके कारण पदार्थ में खिंचाव और दबाव पैदा होता है।
  2. S तरंगें: ये द्व‍ितीय तरंगें हैं जो प्राथमिक तरंगों के साथ कुछ समायंतराल में पहुंचती हैं। ये केवल ठोस पदार्थों से होकर गुजर सकती हैं। S तरंगें तरंग संचरण की दिशा के लंबवत कंपन करती हैं जिससे शिखर और गर्त पैदा होते हैं।

byjusexamprep

  • धरातलीय तरंगें: भूगर्भिक तरंगें सतही चट्टानों के साथ संपर्क में आती हैं और धरातलीय तरंगें उत्‍पन्‍न करती है जो धरातलीय चट्टानों के अनुदिश गमन करती है। ये सिस्‍मोग्राफ़ पर सबसे आखिरी में रिकॉर्ड होती हैं और ये सबसे विनाशकारी तरंगें हैं। इसके कारण चट्टानों में विस्‍थापन और संरचनात्‍मक विनाश होता है। धरातलीय तरंगें तरंग संचरण की दिशा के लंबवत कंपन करती हैं।

तरंगों का वेग संचरण माध्‍यम के घनत्‍व के अनुक्रमानुपाती होता है। घनत्‍व में अंतर होने पर भूकंपीय तरंगों में परावर्तन या अपवर्तन होता है।

 byjusexamprepछाया क्षेत्र

छाया क्षेत्र वे विशेष क्षेत्र हैं जहां भूकंपीय तरंगें रिकॉर्ड नहीं होती हैं। ये क्षेत्र P और S तरंगों से अलग हैं।

  • अधिकेन्‍द्र से 1050 तक के भाग में दोनों तरंगों की उपस्थिति रिकॉर्ड की जाती है।
  • अधिकेन्‍द्र से 105° - 145° के मध्‍य का भाग दोनों प्रकार की तरंगों के लिए छाया क्षेत्र के नाम से जाना जाता है।
  • 105° से बाहर के क्षेत्र में S तरंगें प्राप्‍त नहीं होती हैं। इस प्रकार S तरंग का छाया क्षेत्र P तरंग के छाया क्षेत्र से अधिक बड़ा होता है।
  • P तरंगें अधिकेन्‍द्र के 145° बाद दिखती हैं।

byjusexamprep

byjusexamprep

भूकंप के प्रकार

  • टेक्‍टोनिक: यह किसी भ्रंश प्‍लेट के अनुदिश फिसलती चट्टान के कारण उत्‍पन्‍न होते हैं।
  • ज्‍वालामुखी: ये सक्रीय ज्‍वालामुखी क्षेत्रों तक सीमित होते हैं। ये ज्‍वालामुखियों के विस्‍फोट और संगत टेक्‍टोनिक असंतुलन के कारण उत्‍पन्‍न होते है।
  • पतन: ये गहरे खनन कार्य क्षेत्रों में उत्‍पन्‍न होते हैं जहां जमीन के नीचे खानों की छतें हल्‍के-फुल्‍के झटकों के कारण ढह जाती हैं।
  • विस्‍फोट: ये रासायनिक अथवा नाभकीय विस्‍फ़ोट के विस्‍फोट के कारण उत्‍पन्‍न होते हैं।

महत्‍वपूर्ण तथ्‍य

  • सिस्‍मोग्राफ (भूकम्‍पमापी) एक उपकरण है जो सतह पर पहुंचने वाली तरंगों को रिकॉर्ड करता है।
  • रिक्‍टर पैमाना: इसे परिमाण पैमाना भी कहा जाता है क्‍योंकि यह भूकंप के दौरान मुक्‍त ऊर्जा की गणना करता है। इसे पूर्ण संख्‍या 0-10 में मापा जाता है।
  • मरकेली पैमाना: इसे तीव्रता पैमाना कहते हैं क्‍योंकि यह भूकंप के कारण हुए नुकसान की माप करता है। इसकी सीमा 1-12 है।

सुनामी

सुनामी लंबी तरंगदैर्ध्‍य और लंबी दूरी की समुद्री तरंगें हैं जो बड़ी समुद्री जलराशि के अचानक अथवा एकाएक गति जिसमें समुद्री भूकंप भी शामिल हैं, के कारण उत्‍पन्‍न होती है। भूकंप के कारण उत्‍पन्‍न हुए अधिकांश विनाशकारी भूकंप 7.5 या उससे अधिक परिमाण के होते हैं। सुनामी का प्रभाव केवल तभी होता है जब कंपन का अधिकेन्‍द्र महासागरीय जल के नीचे होता है और परिमाण बहुत अधिक होता है।

भूकंप के प्रभाव

  • भूमि का हिलना
  • धरातलीय विसंगति
  • भू-स्‍खलन
  • मृदा द्रवण
  • धरातल का एक तरफ झुकना
  • हिमस्‍खलन
  • धरातलीय विस्‍थापन
  • बांध व तटबंध के टूटने से बाढ़
  • आग लगना
  • इमारतों और ढांचों का ध्‍वस्‍त होना
  • वस्‍तुओं का गिरना
  • सुनामी।

वैश्विक तापमान और भूकंप

हाल के अध्‍ययन में, भूगर्भशास्त्रियों ने दावा किया है कि बढ़ी हुई भूंकप गतिविधि के लिए वैश्विक तापमान वृद्धि भी एक कारण है। इन अध्‍ययनों के अनुसार, पिघलते ग्‍लेशियर और बढ़ते समुद्री जलस्‍तर ने पृथ्‍वी के टेक्‍टोनिक प्‍लेटों पर दाब के संतुलन को बिगाड़ा है जिसके कारण भूकंपों की आवृत्ति और तीव्रता में वृद्धि हुई है।

Check other links also:

Previous Year Solved Papers

Monthly Current Affairs

UPSC Study Material

Gist of Yojana

UPSC Current Affairs (Daily Updated)

Comments

write a comment

Follow us for latest updates