हाइड्रोजन बम किसके सिद्धांत पर आधारित है?

By Raj Vimal|Updated : September 1st, 2022

हाइड्रोजन बम नाभिकीय संलयन सिद्धांत पर कार्य करता है। जब दो कम भार के नाभिक परस्पर संयुक्त होकर एक अधिक भार वाले तत्व के नाभिक की रचना करते हैं, तो विज्ञान की भाषा में यह नाभिकीय संलयन कहलाती हैं।

हाइड्रोजन बम कि प्रक्रिया 

यह प्रक्रिया पूरी होने के लिए यह आवश्यक है कि इसे एक तय ताप और दाब पर ही किया जाए। इसका मुख्य कारण नाभकीय विखंडन करवाना है। इस प्रक्रिया का सबसे बेहतर उदाहरण सूर्य है। सूरज से आ रही ऊष्मा उसके भीतर हो रहे नाभिकीय संलयन प्रक्रिया के कारण ही आ पाती है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार सबसे पहले मार्क ओलिफेंट ने कड़ी शोध के माध्यम से सौर मंडल के मुख्यत: तारों में होने वाली इस प्रक्रिया को साल 1932 में किया था। ऐसा कहा जाता है कि उनके बाद भी कई वैज्ञानिकों ने इस प्रक्रिया को करना चाहा लेकिन इसके ऊर्जा को नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। अगर वैज्ञानिक यह कर पाते हैं तो मानव जाति के पास ऊर्जा का एक बेहतरीन विकल्प होगा।

Summary

हाइड्रोजन बम किसके सिद्धांत पर आधारित है?

नाभिकीय संलयन सिद्धांत पर ही हाइड्रोजन बम कार्य करता है। इस सिद्धांत पर दुनिया भर के वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं और इससे प्रपात होने वाली ऊर्जा को नियंत्रित करने के भी प्रयास किये जा रहे हैं।

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