UGC NET हिंदी नाटकों की संक्षिप्त व्याख्या- अंधेर नगरी,भारत दुर्दशा,स्कन्दगुप्त, चन्द्रगुप्त

By Mohit Choudhary|Updated : June 22nd, 2022

यूजीसी नेट परीक्षा के पेपर -2 हिंदी साहित्य में महत्वपूर्ण विषयों में से एक है हिंदी नाटक। इसे 4 युगो प्रसाद पूर्व, प्रसादयुगीन, प्रसादोत्तर स्वतन्त्रता पूर्व, स्वातन्त्र्योत्तर हिन्दी नाटक में बांटा गया है।  इस विषय की की प्रभावी तैयारी के लिए, यहां यूजीसी नेट पेपर- 2 के लिए हिंदी नाटक के आवश्यक नोट्स कई भागों में उपलब्ध कराए जाएंगे। इसमें से UGC NET के नाटकों से सम्बंधित नोट्स  इस लेख मे साझा किये जा रहे हैं। जो छात्र UGC NET 2022 की परीक्षा देने की योजना बना रहे हैं, उनके लिए ये नोट्स प्रभावकारी साबित होंगे।      

अंधेर नगरी - भारतेन्दु

  • भारतेन्दु द्वारा रचित 'अंधेर नगरी' अत्यन्त संक्षिप्त व हास्य व्यंग्य से परिपूर्ण है। इसमें सामाजिक और राजनीतिक परिवेश पर कटाक्ष किया गया है। इसका कथानक एक दृष्टान्त के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
  • इस नाटक के मूल स्वर में मूल्यहीन, अमानवीय और अराजक व्यवस्था प्रणाली को इस प्रकार प्रस्तुत किया गया है कि शासन की अन्य व्यवस्था सामने आ जाती है। विवेकहीन और मूर्ख राजा न केवल अपनी पूरी प्रजा के लिए कष्ट का कारण बनता है, बल्कि उसके नाश का भी आधार बन जाता है। इस नाटक के आधार पर लेखक ने जन चेतना को जाग्रत करने का प्रयास किया है।
  • 'अंधेर नगरी' नाटक की रचना बिहार के किसी रजवाड़े को आधार बनाकर की गई है। रजवाड़े का राजा आलसी व व्यसनी है, राजकाज व जनता की भलाई के बारे में कुछ नहीं सोचता। वह न्याय व अन्याय के भेद को भी नहीं जानता।
  • वह मूर्ख और विवेकहीन तथा अस्थिर है। वह परम्परा से प्राप्त धन-दौलत का आराम से उपभोग करता है तथा जनता का शोषण करता है। वह सभी को अंधे की लकड़ी से हाँकने का प्रयास करता है। नाटक के कुल छः अंक हैं। इसमें गद्य-पद्यात्मकता के मिश्रण से कथानक को गति प्रदान की गई है। इसमें अंक के बदले दृश्य शब्द का प्रयोग किया गया है।

नाटक के प्रमुख पात्र

  1. महंत एक साधू चरित्र में आस्था, निष्ठा और दूरदर्शिता है।
  2. गोवर्धन दास महन्त का लोभी शिष्य
  3. नारायणदास महन्त का दूसरा शिष्य
  4.  चौपट राजा (जो शराब में डूबा रहता है तथा न्याय में अन्याय में फर्क नहीं समझता)
  5. फरियादी राजा से न्याय माँगने वाला
  6. कल्लू बनिया जिसकी दीवार से फरियादी की बकरी मरी कोतवाल जिसे अन्यायी राजा ने फाँसी की सजा सुनाई थी, लेकिन फन्दा बड़ा बन जाने के कारण उसे फाँसी न हो सकी चार सिपाही राजा के सिपाही

भारत दुर्दशा- भारतेन्दु

  • भारत दुर्दशा नाटक की रचना 1875 ई. में भारतेन्दु हरिश्चन्द्र द्वारा की गई थी। इसमें भारतेन्दु ने प्रतीकों के माध्यम से भारत की तत्कालीन स्थिति का चित्रण किया है। यह नाटक अपनी युगीन समस्याओं को उजागर करता है तथा उनका समाधान करता है। वे भारतवासियों की दुर्दशा पर रोने तथा इस दुर्दशा का अन्त करने के प्रयास का आह्वान करते हैं।
  • 'भारत दुर्दशा' नाटक में भारतेन्दु जी ने भारत दुर्दशा के कारणों पर प्रकाश डालते हुए उचित समाधान प्रस्तुत किए हैं। वे ब्रिटिश राज तथा आपसी कलह को भारत दुर्दशा का मुख्य कारण मानते हैं। 
  • साथ ही उन्होंने भारत में फैली कुरीतियों, रोग, आलस्य, मदिरा, अहंकार, धर्म, असन्तोष, अपव्यय, फैशन, सिफारिश, लोभ, भय, स्वार्थपरता, अतिवृष्टि, अनावृष्टि, अकाल, बाढ़ आदि को भारत की दुर्दशा का कारण माना है, लेकिन उन्होंने भारत की दुर्दशा का मुख्य कारण अंग्रेजों की भारत लूटने की नीति को माना है।
  • अतः भारत दुर्दशा भारतेन्दु जी की सफल कृति है। इस नाटक ने नवजागरण के दौर में एक मशाल की भूमिका निभाई, जिसने भारतीयों की लक्ष्यहीन पतनोन्मुखी सोच को नई दिशा प्रदान की। इस प्रकार, यह एक दुखान्त नाटक है, जो प्रतीकात्मक शैली में रचा गया है। इस नाटक में छह अंक है।

नाटक के प्रमुख पात्र

  1. भारत नायक के रूप में है, जो अत्यन्त कमजोर चरित्र है तथा अपनी दीनहीन दशा पर रोता है।
  2. भारत दुर्दैव यह एक शक्तिशाली खलनायक या प्रतिनायक के रूप में है। सत्यनाश, आलस्य, मदिरा भारत दुर्देव के सहयोगी के रूप में भारत की जान निकालने हेतु उसे चारों ओर से घेर लेते हैं।
  3. भारत भाग्य भारत को बार-बार जगाने की चेष्टा करता है, पर वह सफल नहीं हो पाता। यह भारत का एक सहयोगी चरित्र है।

स्कन्दगुप्त - जयशंकर प्रसाद

  • जयशंकर प्रसाद हिन्दी के सुप्रसिद्ध नाटककार हैं, उन्होंने अधिकतर ऐतिहासिक नाटक लिखे हैं, जो सर्वाधिक सफल रहे। 
  • इन्होंने ऐतिहासिक सांस्कृतिक परम्पराओं एवं नए जातीय जीवन की जो प्रतिष्ठा की, उसमें हमारी अस्मिता को सृजनात्मक आकार मिला, प्रसाद ने अपने नाटकों के लिए प्रसिद्ध ऐतिहासिक उत्तों का चुनाव किया। उनके काव्य विकास की भाँति नाटक विकास भी धीरे-धीरे से हुआ।
  • स्कन्दगुप्त नाटक भारत के प्रसिद्ध साहित्यकार की एक प्रमुख रचना है। इस नाटक में इतिहास प्रसिद्ध स्कन्दगुप्त को नायक बनाया गया है। 
  • स्कन्दगुप्त एक स्वाभिमानी, नीतिज्ञ, देश प्रेमी, वीर तथा स्त्रियों के सम्मान की रक्षा करने वाले शासक हैं। भारत की बर्बर हूणों से रक्षा करने का श्रेय स्कन्दगुप्त को जाता है। 
  • स्कन्दगुप्त ने पुष्यमित्रों को परास्त कर अपने नेतृत्व की योग्यता और शौर्य को सिद्ध कर 'विक्रमादित्य' की उपाधि धारण की। स्कन्दगुप्त नाटक में पाँच अंक हैं।

नाटक के प्रमुख पात्र

  1. स्कन्दगुप्त नाटक का नायक है, जो स्वाभिमानी, नीतिज्ञ, देश प्रेमी, वीर तथा स्त्रियों का सम्मान करने वाला शासक है। यह युवराज विक्रमादित्य है। कुमारगुप्त मगध का सम्राट जो महादण्डनायक है।
  2. धातुसेन (कुमार दास) कुमार दास के प्रच्छन्न रूप में सिंहल का राजकुमार है। देवसेना बन्धुवर्मा की बहन, जो गरीबों व असहायों की सेवा में अपना जीवन अर्पित कर देती है।
  3. विजया मालव के धनकुबेर की कन्या
  4. मालिनी मातृगुप्त की प्रणयिनी

चन्द्रगुप्त - जयशंकर प्रसाद

  • वर्ष 1931 में प्रकाशित चन्द्रगुप्त नाट्य रचना प्रसाद की उत्तम रचनाओं में से एक है। यह नाटक चार अंकों में विभाजित है और इतिहास की तीन घटनाएं अलक्षेंद्र का आक्रमण, नन्दकुल की पराजय और सेल्यूकस का पराभव इस तर्क के आधार पर विभाजित हैं।

नाटक के प्रमुख पात्र

  1. अलका गान्धार नरेश की पुत्री और आम्भीक की बहन है। राजकुमारी अलका साहसी, राष्ट्रप्रेमी, दयालु, गुणज्ञ और प्रधान नारी पात्र है। मालविका प्रधान नारी पात्र है। सिन्धु देश की बालिका है। यह सामान्य व अशिक्षित होने पर भी स्वाभिमान, संघर्षशीलता व आत्मोत्सर्ग की क्षमता से परिपूर्ण है।
  2. कार्नेलिया यवन सेनापति सिल्यूकस की पुत्री के रूप में भारत भूमि पर अपना कदम रखती है।
  3. चन्द्रगुप्त नाटक का धीरोदात्त नायक है, जिसमें निर्भीकता, दृढ़ता, विनयशीलता, आत्मविश्वास आदि गुण हैं।
  4. चाणक्य नाटक का प्रमुख पात्र है। नाटक का सारा ढाँचा इसी पर मेरुदण्ड के समान खड़ा हुआ है।
  5. सिंहरण गौण पात्र है, परन्तु चाणक्य, चन्द्रगुप्त, अलका, आम्भीक आदि पात्रों पर इसका प्रभाव है तथा नाटक को प्रचालित करने में प्रधान कुंजी का कार्य करता है। 
  6. पर्वतेश्वर पंजाब का राजा जो पोरस के नाम से प्रसिद्ध है।

हमें आशा है कि आप सभी UGC NET परीक्षा 2022 के लिए पेपर -2 हिंदी, 'UGC NET के नाटकों' से संबंधित महत्वपूर्ण बिंदु समझ गए होंगे। 

Thank you

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