चिपको आंदोलन के प्रवर्तक कौन थे?

By K Balaji|Updated : December 29th, 2022

चिपको आन्दोलन के प्रवर्तक सुन्दरलाल बहुगुणा थे। इनके अलावा गोविन्द सिंह रावत, चंडी प्रसाद भट्ट और गौरा देवी ने भी इस आन्दोलन में अपना सहयोग दिया था। चिपको आन्दोलन वृक्षों की कटाई और जंगल संरक्ष्ण के लिए शुरू किया गया अभियान था। वर्ष 1973 में यह आन्दोलन भारत के उत्तराखंड राज्य में शुरू हुआ था। तब उत्तराखंड, भारत के सबसे बड़े राज्य, उत्तरप्रदेश का ही भू-भाग था। 

चिपको आन्दोलन में महिलाओं की भूमिका

सभी जानते हैं कि पेड़-पौधे हमारे अस्तित्व के लिए कितने जरूरी हैं। पेड़ों की कटाई को रोकने और जंगलों को बचाने के लिए सुंदर लाल बहुगुणा ने उस समय चिपको आंदोलन शुरू किया था। संभवतः यह वन संरक्षण के लिए पहला वैश्विक आंदोलन था।

चिपको आंदोलन के नाम से जाना जाने वाला एक आंदोलन उत्तराखंड में लगभग 45 साल पहले शुरू हुआ था। इस आंदोलन की शुरुआत चंडीप्रसाद भट्ट और गौरा देवी ने की थी और इसका नेतृत्व भारत के जाने-माने सुंदरलाल बहुगुणा ने किया था।

जंगलों की अंधाधुंध और अवैध कटाई को रोकने के लिए 1973 में उत्तरांचल (अब उत्तराखंड) के चमोली जिले के गोपेश्वर में चिपको आंदोलन शुरू हुआ। इस आन्दोलन में महिलाओं का विशेष योगदान था।

  • चिपको आन्दोलन में महिलाओं की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण एवं सराहनीय रही।
  • उत्तरांचल की गौरा देवी और राजस्थान राज्य की अमृता देवी के साथ-साथ कई महिलाओं ने ढाल की तरह जंगलों की रक्षा की।
  • यह आंदोलन पूरे राज्य में जंगल की आग की तरह फैल गया।
  • सौभाग्य से इस दौरान केंद्र की राजनीति में भी पर्यावरण एक एजेंडा बन गया। इसलिए, वनों की कटाई को रोकने के लिए केंद्र सरकार द्वारा वन संरक्षण अधिनियम बनाया गया था।

Summary:

चिपको आंदोलन के प्रवर्तक कौन थे?

सुन्दरलाल बहुगुणा चिपको आन्दोलन के प्रवर्तक थे। गोविन्द सिंह रावत, चंडी प्रसाद भट्ट और गौरा देवी भी शामिल थे| यह आन्द्दोलन 1973 में शुरू हुआ जिसमे वनों की सुरक्षा प्रमुख उद्देश्य था। लोगों ने पेड़ों को गले लगाया ताकि उन्हें काटा न जा सके।

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