चक्रपाणि शब्द में कौन सा समास है?

By Raj Vimal|Updated : August 28th, 2022

चक्रपाणि शब्द में बहुव्रिही समास है। हिंदी व्याकरण में दिए परिभाषा के अनुसार, जो समास के दोनों पद प्रधान नहीं होते हैं और दोनों पद मिलकर किसी नए शब्द और उसके अर्थ का बोध करवाते हैं, वह बहुव्रिही समास कहलाता है। चक्र है पाणि में जिसके, चक्रपाणि शब्द समास विग्रह है।

बहुब्रिही समास का उदाहरण

नीचे हमने बहुब्रिही समास के कुछ महत्वपूर्ण उदहारण दिए हैं जो की काफी पूछे जाने प्रश्न होते हैं|

  • पंचामृत – पाँच प्रकार का अमृत।
  • विषधर - विष को धारण करने वाला।
  • दुधमुहा – जिसके मुँह में दूध है।
  • मुरलीधर - मुरली को धारण करने वाला।
  • देवराज – देवों के राजा है जो।
  • गजानन - गज के सामान आनन है जिसके।
  • नंदनंदन – वह जो नंद का नंदन यानि पुत्र है।
  • नीलकण्ठ – नीला है कण्ठ जिनका।
  • पंचानन – पंच हैं मुख जिसके।
  • दशानन - दस हैं मुख जिसके।

इसके अलावा भी कई ऐसे समास हैं जिनका समास विग्रह, यह बताता है कि वह बहुव्रिही समास के उदाहरण हैं।

Summary

चक्रपाणि शब्द में कौन सा समास है?

समास और उसके भेदों की परिभाषा के अनुसार, चक्रपाणि में बहुव्रिही समास है। चक्रपाणि का समास विग्रह है, चक्र है पाणि में जिसके। यहाँ भगवन विष्णु की बात के बारे में बोध करवाया जा रहा है।

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