बायोपायरेसी पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

By Raj Vimal|Updated : September 5th, 2022

जैव रासायनिक या अन्य संसाधन के व्यावसायिक शोषण की प्रथा बायोपाइरेसी (Bio-Piracy) कहलाती है। जो स्वाभाविक रूप से होती है। बायो-पायरेसी का एक उदाहरण यह है कि भारत में प्रचलित नीम और उससे बनी दवाईयों का पेटेंट यूरोप की एक कंपनी के पास है। इसके अलावा भी कई भारतीय संसाधनों का पेटेंट विदेशी कंपनी के पास हैं।

बायोपायरेसी क्या है 

असल में जैव-पायरेसी या बायो पाइरेसी का शाब्दिक अर्थ है जैविक संसाधनों का अनियंत्रित उपयोग है। इसके तहत, जैविक संसाधनों का उपयोग बिना किसी सूचना या अधिकार के किया जाता है। इनका उपयोग व्यवसायिक या व्यापारिक स्तर पर किया जाता है। 

इसमें कोई दो राय नहीं कि विकसित देश अपने ज्ञान का इस्तेमाल विकासशील देशों के जैविक संसाधन का इस्तेमाल करने में करते हैं। जब एक देश व्यापार करने या शोध करने के नाम पर उस देश के जैविक संसाधनों का इस्तेमाल अपने व्यापार के लिए करते हैं।

Summary

बायोपायरेसी पर एक संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

बायोपायरेसी (Bio-Piracy) का तात्पर्य किसी अन्य देश के जैविक संसाधनों का इस्तेमाल बिना पूर्व सूचना के करना। उदाहरण के लिए भारत में उपचार के लियी प्रचलित हल्दी का पेटेंट अमेरिकी कंपनी ने लिया हुआ है।

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