भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद नागरिकता के अधिकारों की निरंतरता से सम्बंधित है?

By Sakshi Yadav|Updated : August 25th, 2022

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 10 नागरिकता के अधिकारों की निरंतरता से सम्बंधित है। अनुच्छेद 10 बताता है कि कोई भी व्यक्ति जिसे इस भाग के किसी भी प्रावधान के तहत भारत का नागरिक माना जाता है, वह नागरिक बना रहेगा और संसद द्वारा बनाए गए किसी भी कानून के अधीन भी होगा।

नागरिकता अधिनियम - 1955

भारत में, संविधान के अनुच्छेद 5-11 नागरिकता की अवधारणा से संबंधित हैं। सरल भाषा में नागरिकता अधिनियम, 1955 भारतीय नागरिकता के अधिग्रहण और निर्धारण का प्रावधान करता है। 

नागरिकता अधिनियम, 1955 

अनुच्छेद 5

जो जन्म से भारत का नागरिक हो उसको नागरिकता मिलना।

अनुच्छेद 6

जो व्यक्ति पाकिस्तान से भारत आए हैं, उन्हें ये नागरिकता के अधिकार प्रदान करता है।

अनुच्छेद 7

इसमें पाकिस्तान के कुछ प्रवासियों को नागरिकता के अधिकार प्रदान किए गए है। 

अनुच्छेद 8

यदि कोई व्यक्ति भारत में जन्मा हो परन्तु विदेश में रहता हो तो उसे नागरिकता मिलना।

अनुच्छेद 9

यदि किसी भारतीय के पास विदेशी नागरिकता है तो उसे भारत की नागरिकता नहीं मिलती। 

अनुच्छेद 10

नागरिकता के अधिकारों की निरंतरता

अनुच्छेद 11

संसद द्वारा नागरिकता के अधिकार को नियंत्रित करने के लिए कानून बना है। 

Summary

भारतीय संविधान का कौन सा अनुच्छेद नागरिकता के अधिकारों की निरंतरता से सम्बंधित है?

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 10 नागरिकता के अधिकारों की निरंतरता से जुड़ा है, जिसके अनुसार प्रत्येक व्यक्ति जो इस भाग के पूर्वगामी प्रावधानों के तहत भारत के नागरिक है या किसी भी कानून के प्रावधानों के अधीन होगा जो संसद द्वारा तैयार किया जा सकता है।

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