भारत में सबसे पहले प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना किसने की?

By K Balaji|Updated : December 3rd, 2022

भारत की पहली प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना पुर्तगालियों ने गोवा में की थी। यह प्रिंटिंग प्रेस 1556 में ओल्ड गोवा के जेसुइट सेंट पॉल कॉलेज में स्थापित हुई थी। इस प्रेस पर छपने वाली पहली और सबसे प्रसिद्ध किताबों में से एक थी 'कैटिसमो दा डौट्रिना क्रिस्टो'। यह फ्रांसिस जेवियर द्वारा लिखी गई थी, लेकिन यह उनकी मृत्यु के पांच साल बाद तक नहीं छपा था। लोयोला फादर गैस्पर कैलेसा द्वारा सेंट इग्नाटियस को दिनांक 30 अप्रैल 1556 को लिखे गए एक पत्र के माध्यम से यह तथ्य सामने आया है कि गोवा में प्रिंटिंग प्रेस स्थापित किया गया था।

भारत के पहले प्रिंटिंग प्रेस का इतिहास

भारत का पहला प्रिंटिंग प्रेस 1556 में सेंट पॉल कॉलेज, गोवा में फादर गैस्पर कालेजा के द्वारा स्थापित किया गया था। 30 अप्रैल 1556 के एक पत्र के अनुसार, फादर गैस्पर कालेजा ने कहा कि एक जहाज एबिसिनिया में मिशनरी कार्य को बढ़ावा देने के लिए पुर्तगाल से एबिसिनिया (वर्तमान इथियोपिया) जाने के लिए एक प्रिंटिंग प्रेस ले जा रहा था। हालाँकि, प्रिटिंग प्रेस को भारत छोड़ने पर रोक लगा दी गई थी। इस प्रकार, तब से गोवा में छपाई का कार्य शुरू हो गया।

"कंक्लूषन फिलोसोपिक्स " पहली प्रकाशित पुस्तक थी। एक साल बाद, अपने कवि, सेंट फ्रांसिस जेवियर की मृत्यु के पांच साल बाद, प्रिंटिंग प्रेस ने अपनी दूसरी किताब, कैटिसिस्मो दा डॉक्ट्रिना क्रिस्टा प्रकाशित की। पहली पुस्तक जो भारतीय भाषा में प्रकाशित हुयी थी वह तमिल में थी|

Summary:

भारत में सबसे पहले प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना किसने की?

पुर्तगाली ने भारत में पहली बार प्रिंटिंग प्रेस की स्थापना की थी| 1674 तक इस प्रिंटिंग प्रेस में कोंकणी और कनारा भाषाओं की लगभग 50 पुस्तकें छपी थीं। कैथोलिक पादरियों ने 1579 में कोचीन में पहली तमिल किताब छापी और 1713 में उनके द्वारा पहली मलयालम किताब छापी गई।

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