भारत का पहला 5G टेस्टबेड

By Brajendra|Updated : July 26th, 2022

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने May 17 2022, मंगलवार को देश के पहले 5G टेस्‍टबेड का उद्घाटन किया। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) के रजत जयंती समारोह में प्रधानमंत्री ने कहा कि 5G टेस्‍टबेड मॉडर्न टेक्‍नॉलजीज की दिशा में आत्मनिर्भर होने की तरफ एक महत्वपूर्ण कदम है। पीएम मोदी ने कहा कि मैं युवा दोस्‍तो, रिसर्चर्स और कंपनियों को टेस्टिंग फैसिल‍िटीज का इस्‍तेमाल करने के लिए आमंत्रित करता हूं। इस 5G टेस्टबेड को IIT मद्रास के नेतृत्व में 8 संस्थानों द्वारा एक मल्‍टी-इंस्टिट्यूट सहयोगी परियोजना के रूप में विकसित किया गया है। अभी तक 5G टेस्टबेड नहीं होने की वजह से स्टार्टअप्‍स और इंडस्‍ट्री प्‍लेयर्स को अपने प्रोडक्‍ट्स की टेस्टिंग और उन्‍हें वैलिडेट करने के लिए विदेश जाना पड़ता था।

भारत का पहला 5G टेस्टबेड

देश का पहला 5G टेस्टबेड हाल ही में प्रधान मंत्री द्वारा लॉन्च किया गया है। यह स्टार्टअप और व्यवसायियों  को स्थानीय स्तर पर अपने उत्पादों का परीक्षण करने और देश के बाहर के बुनियादी ढांचे पर निर्भरता कम करने में सक्षम बनाएगा।

5G टेस्टबेड पहल का महत्त्व:

  • समकालीन दूरसंचार प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में स्वतंत्रता प्राप्त करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
  • 5G टेस्टबेड के लिए सेटअप की लागत 220 करोड़ रुपये से अधिक है।
  • स्टार्टअप्स और अन्य व्यवसायों को 5G टेस्टबेड की कमी के कारण विदेशी निर्भरता पर भरोसा करने के लिए मजबूर किया गया था ताकि 5G नेटवर्क स्थापित किया जा सके और उनके सामान का परीक्षण और सत्यापन किया जा सके।
  • भारत का 5G मानक, जिसे 5Gi के नाम से जाना जाता है, इस तरह से बनाया गया है जो पूरे देश के ग्रामीण क्षेत्रों में 5G तकनीक के प्रसार में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
  • IIT हैदराबाद और मद्रास ने 5G मानक विकसित करने के लिए सहयोग किया, जो अनिवार्य रूप से एक भारतीय निर्मित 5G मानक (चेन्नई) है।

5जी तकनीक क्या है - 5G Technique Kya Hai

  • मोबाइल नेटवर्क की पांचवीं पीढ़ी, या 5G। यह 1G, 2G, 3G और 4G नेटवर्क का अनुसरण करते हुए विश्व स्तर पर उपयोग की जाने वाली एक नई वायरलेस तकनीक है।
  • इंटरकनेक्टेड नेटवर्क के माध्यम से उन्हें जोड़कर, यह एक ऐसी प्रणाली बनाना संभव बनाता है जिसमें मशीनों, चीजों और उपकरणों को नियंत्रित और समन्वित किया जा सके।
  • जबकि अधिकांश परिस्थितियों में 4G के लिए अधिकतम इंटरनेट डेटा गति केवल 1Gbps पर ही मापी गई है, 5G के हाई-बैंड स्पेक्ट्रम में 20 Gbps (गीगाबाइट प्रति सेकंड) इंटरनेट स्पीड का परीक्षण किया गया है।
  • 5G स्पेक्ट्रम नीलामी में मिलीमीटर वेव बैंड को शामिल करने की सरकार की मंशा ने भारत में सैटकॉम इंडस्ट्री एसोसिएशन-इंडिया (SIA) की आलोचना की है।

5G टेस्टबेड महत्त्व:

  • 5जी तकनीक के इस्तेमाल से देश के शासन, जीवन की गुणवत्ता और कारोबार करने में आसानी होगी।
  • इसके परिणामस्वरूप कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और रसद जैसे क्षेत्रों में वृद्धि का अनुभव होगा।
  • इसके अतिरिक्त, यह सुविधाओं का विस्तार करेगा और बड़ी संख्या में रोजगार की संभावनाएं पैदा करेगा।

भारत में 5G रोलआउट के लिये चुनौतियाँ:

  • कम फाइबराइजेशन फुटप्रिंट: भारत की वर्तमान फाइबर कनेक्टिविटी, जो इसके केवल 30% दूरसंचार टावरों को जोड़ती है, को अपग्रेड करना होगा।
  • 5G के सफल प्रक्षेपण के लिए इस संख्या को दोगुना करना होगा।
  • हार्डवेयर "मेक इन इंडिया" चुनौती विशिष्ट विदेशी दूरसंचार ओईएम (मूल उपकरण निर्माता) पर प्रतिबंध अपने आप में एक बाधा है, जिस पर 5G तकनीक का अधिकांश विकास निर्भर करता है।
  • उच्च स्पेक्ट्रम लागत: वैश्विक औसत की तुलना में, भारत की 5G स्पेक्ट्रम लागत काफी अधिक है। इसका खामियाजा भारत में नकदी संकट से जूझ रहे दूरसंचार कारोबारों को भुगतना पड़ेगा।
  • सर्वश्रेष्ठ 5G प्रौद्योगिकी मानक चुनना: 5G प्रौद्योगिकी को अपनाने में तेजी लाने के लिए, घरेलू 5Gi मानक और अंतर्राष्ट्रीय 3GPP मानक के बीच के विवाद को सुलझाया जाना चाहिए।
  • हालांकि 5G के कई स्पष्ट फायदे हैं, लेकिन ऑपरेटरों को लॉन्च लागत और इंटरऑपरेबिलिटी कठिनाइयों पर भी विचार करना चाहिए।

5G टेस्टबेड और भविष्य

  • अगर भारत को 5जी लक्ष्य हासिल करना है तो उसे स्थानीय 5जी गियर के उत्पादन को अभूतपूर्व दर से समर्थन और बढ़ावा देने की जरूरत है।
  • इस स्पेक्ट्रम के लिए मूल्य निर्धारण को युक्तिसंगत बनाने की आवश्यकता है ताकि सरकार भारत की 5G रोलआउट योजनाओं को खतरे में डाले बिना नीलामी से पर्याप्त पैसा कमा सके।
  • 5G परिनियोजन के लिए निम्न बैंड स्पेक्ट्रम सहित स्पेक्ट्रम के विभिन्न बैंडों का उपयोग किया जा सकता है; यह रेंज बहुत लंबी है और ग्रामीण क्षेत्रों में भी उपयोगी हो सकती है।

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FAQs

  • मोबाइल नेटवर्क की पांचवीं पीढ़ी, या 5G। यह 1G, 2G, 3G और 4G नेटवर्क का अनुसरण करते हुए विश्व स्तर पर उपयोग की जाने वाली एक नई वायरलेस तकनीक है।


  • 5जी तकनीक के इस्तेमाल से देश के शासन, जीवन की गुणवत्ता और कारोबार करने में आसानी होगी। इसके परिणामस्वरूप कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा, बुनियादी ढांचे और रसद जैसे क्षेत्रों में वृद्धि का अनुभव होगा।


  • कम फाइबराइजेशन फुटप्रिंट: भारत की वर्तमान फाइबर कनेक्टिविटी, जो इसके केवल 30% दूरसंचार टावरों को जोड़ती है, को अपग्रेड करना होगा। 5G के सफल प्रक्षेपण के लिए इस संख्या को दोगुना करना होगा। हार्डवेयर "मेक इन इंडिया" चुनौती विशिष्ट विदेशी दूरसंचार ओईएम (मूल उपकरण निर्माता) पर प्रतिबंध अपने आप में एक बाधा है, जिस पर 5G तकनीक का अधिकांश विकास निर्भर करता है।


  • भारत का पहला 5G टेस्टबेड IIT मद्रास के नेतृत्व में 8 संस्थानों द्वारा एक मल्‍टी-इंस्टिट्यूट सहयोगी परियोजना के रूप में विकसित किया गया है। अभी तक 5G टेस्टबेड नहीं होने की वजह से स्टार्टअप्‍स और इंडस्‍ट्री प्‍लेयर्स को अपने प्रोडक्‍ट्स की टेस्टिंग और उन्‍हें वैलिडेट करने के लिए विदेश जाना पड़ता था।

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