भारत के प्रथम गवर्नर जनरल कौन थे?

By Manesh Singh|Updated : July 5th, 2022

31 दिसंबर, 1600 की ईस्ट इंडिया कंपनी ने रानी एलिज़ाबेथ l से एक रॉयल चार्टर प्राप्त हुआ जिसके बाद भारतवर्ष में एक व्यापारिक इकाई के रूप में ब्रिटिश शासन शुरू हो गया। इसके करीब 300 वर्ष पश्चात् देखते ही देखते वह एक व्यापारिक शक्ति से सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति तब्दील हो गया। 

इसी के चलते जो पदनाम पहले बंगाल के गवर्नर-जनरल (Governor-General of Bengal) के रूप में था, पूरे भारत पर स्थापत्य होने के बाद चार्टर एक्ट 1833 द्वारा बदलकर ‘भारत का गवर्नर-जनरल’ (Governor-General of India) हो गया और भारत का प्रथम गवर्नर जनरल विलियम बैंटिक (William Bentinck) बनाया गया। यह पद मुख्य रूप से प्रशासनिक उद्देश्यों के लिये था और इसे ईस्ट इंडिया कंपनी के कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स को रिपोर्ट करना था।

भारत के अन्य प्रथम पदाधिकारी

तत्कालीन भारत के अन्य मुख्य पदाधिकारी निम्न हैं

  • बंगाल का गवर्नर-जनरल (1773-1833)- सर्वप्रथम जब ब्रिटिश भारत में आए तो बंगाल पर अपना नियंत्रण स्थापित किया। इसके लिए उन्होंने ‘बंगाल के गवर्नर’ (Governor of Bengal) के रूप में ‘रॉबर्ट क्लाइव’ (Robert Clive) को नियुक्त किया। 
  • भारत का गवर्नर-जनरल (1833-58)- भारत के पहले गवर्नर-जनरल विलियम बैंटिक (William Bentinck) थे।
  • वायसराय (1858-1947) - लॉर्ड कैनिंग (Lord Canning) को ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के पहले वायसराय के रूप में चुना था।

Summary:

भारत के प्रथम गवर्नर जनरल कौन थे?

ब्रिटेन एक छोटा सा द्वीपीय देश था परन्तु इसके बावजूद उसने सम्पूर्ण दुनिया में अपने आप को सबसे साम्राज्य के रूप में स्थापित कर लिया था। उसे संसार की सबसे बड़ी राजनीतिक शक्ति कहा लगा। भारत में करीब 300 वर्षों ब्रिटिश शासन काल रहा। भारत में उसने ब्रिटिश गवर्नर-जनरल और वायसराय के माध्यम से नियंत्रण स्थापित किया। भारत के पहले गवर्नर-जनरल विलियम बैंटिक (William Bentinck) थे।

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भारत के प्रथम गवर्नर जनरल FAQs

  • भारत के सर्वप्रथम गवर्नर जनरल थे विलियम बैंटिक। इस पद का नाम पहले गवर्नर-जनरल (Governor-General of Bengal) थे परन्तु ब्रिटिश सरकार द्वारा चार्टर एक्ट 1833 के बाद यह पदनाम पुनः बदलकर ‘भारत का गवर्नर-जनरल’ (Governor-General of India) कर दिया गया और आगे भी इसी नाम से जाना गया।

  • लॉर्ड कैनिंग (Lord Canning) को ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के पहले वायसराय के रूप में चुना था। भारत सरकार अधिनियम 1858 (Government of India Act 1858) पारित हुआ जिसने भारत के गवर्नर जनरल का नाम बदलकर ‘भारत का वायसराय’ कर दिया।

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