How to Start UPSC CSE (IAS) Preparation: A Beginner's Guide!

By Sudheer Kumar K|Updated : May 5th, 2020

A Beginner's Guide to Start the UPSC CSE (IAS) Preparation: Before beginning the preparation, a candidate must ask a few questions to oneself, such as 'What is Civil Services?', 'Why Civil Services?' 'Who is eligible for that?' What are the educational criteria for the UPSC CSE (IAS)?', 'What is the age limit?', 'What is the selection procedure?' 'What is the nature of the exam?' 'What is the syllabus?' How many subjects should study?' 'How to study?' 'What is the exam strategy?' 'Key factors ensuring success?' And then last but not the least, 'Why UPSC?' If you have these questions and are inquisitive to know them, then you are in the right place! We try and address all these answers through this article. Let us unfold one by one, and then we would discuss the strategy to be followed!

संघ लोक सेवा आयोग की सिविल सेवा परीक्षा (आईएएस) की तैयारी शुरू करने के लिए एक मार्गदर्शिका: तैयारी शुरू करने से पहले, एक उम्मीदवार को अपने आप से कुछ प्रश्न पूछने चाहिए, जैसे कि सिविल सेवा क्या है?, सिविल सेवा ही क्यों?, इसके लिए कौन पात्र है?, यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा (IAS) के लिए शैक्षणिक मानदंड क्या हैं?  इसके लिए आयु सीमा क्या है? इसकी चयन प्रक्रिया क्या है? परीक्षा का स्वरूप क्या है?पाठ्यक्रम क्या है? कितने विषयों की पढ़ाई करनी चाहिए? पढ़ाई कैसे करनी चाहिए? परीक्षा की रणनीति क्या है? सफलता सुनिश्चित करने वाले प्रमुख कारक कौन-से हैं? और फिर अंतिम लेकिन ज़रूरी प्रश्न, ' यूपीएससी क्यों?' यदि आपके समक्ष ये प्रश्न हैं और आप इनके उत्तर जानने के लिए जिज्ञासु हैं, तो आप सही जगह पर हैं! हम इस लेख के माध्यम से इन सभी उत्तरों को देने की कोशिश करते हैं और उन्हें संबोधित करते हैं। आइए हम एक-एक करके सभी प्रश्नों को लेते हैं और फिर हम आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे!

यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू करने हेतु मार्गदर्शिका

UPSC से तात्पर्य संघ लोक सेवा आयोग से है, यह “यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा अधिसूचना” में सूचीबद्ध विभिन्न परीक्षाओं को आयोजित करने के लिए अधिकृत है। यूपीएससी की तैयारी के बाद इसमें शामिल सेवाओं के समूह में से किसी एक में चयनित होने का अवसर मिलता है। सिविल सेवाओं में विभिन्न श्रेणियां शामिल हैं, जिनमें से सबसे प्रमुख है आई.ए.एस. या भारतीय प्रशासनिक सेवा, आई.पी.एस. या भारतीय पुलिस सेवा, आई.एफ.एस.या भारतीय विदेश सेवा, आई.आर.एस. या भारतीय राजस्व सेवा और भारतीय वन सेवा हैं। इसी तरह विभिन्न परीक्षाएं होती हैं और कई क्षेत्रों में काम करने का अवसर मिल जाता है। इन सभी को सिविल सेवाओं की तैयारी का एक हिस्सा माना जाता है!

सिविल सेवा क्यों?

मूल रूप से, नौकरशाहों के चयन की प्रणाली अंग्रेजों द्वारा शुरू की गयी थी और इसे 'आईसीएस परीक्षा' का नाम दिया गया था। प्रारंभ में, परीक्षा भारतीयों के लिए खुली नहीं थी, लेकिन बाद के चरण में, उन्होंने भारतीयों को इसमें शामिल होने की अनुमति दी। जब आप गहराई से अपनी तैयारी को शुरू करेंगे, तो इसके बारे में आपको और भी जानकारी मिलेगी। समकालीन समय में, सिविल सेवाएं अधिकारियों को काम करने के लिए एक व्यापक क्षेत्र प्रदान करती हैं। लोक सेवाओं के माध्यम से, किसी को नीति निर्माण मशीनरी का हिस्सा बनने का मौका मिलता है और वह उन्हें लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस परीक्षा के माध्यम से चुने गए अधिकारियों को 'लोक सेवक' माना जाता है। शीर्ष प्रबंधन स्तर (जब पदोन्नत किया जाता है) पर, वे मंत्रियों को नीति निर्धारण में सहायता करते हैं।

यदि आप एक प्रशासक के रूप में समाज में एक सार्थक योगदान लाने के लिए नौकरशाह बनने की इच्छा रखते हैं, तो आप सही जगह पर हैं। हम यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा के सभी पहलुओं की व्याख्या करेंगे। इस परीक्षा की तैयारी के लिए मूर्त वस्तुओं जैसे यूपीएससी आईएएस की पुस्तकों और अन्य संसाधनों के अलावा कुछ अमूर्त पहलु भी शामिल हैं, जैसे कि मानसिक धीरज, समय प्रबंधन इत्यादि। यदि आप उनके बारे में जानते हैं, तो यह सही रणनीति के साथ तैयारी की दिशा सुनिश्चित करने में मदद करेगा। आइए हम एक-एक करके उन पर चर्चा करते हैं।

लेख का उद्देश्य उन उम्मीदवारों की मदद करना है जो इस परीक्षा की तैयारी के बारे में सोच रहे हैं। यदि रणनीति सही नहीं है, तो इस परीक्षा को उत्तीर्ण करने में कई साल लग सकते हैं। कुछ पहले ही प्रयास में इस परीक्षा को उत्तीर्ण हो सकते हैं और कुछ कई प्रयासों के बाद भी इसमें उत्तीर्ण नहीं कर सकते।

ग्रेडअप प्लेटफ़ॉर्म के माध्यम से हम आपको तैयारी की एक रणनीति बनाने के लिए कुछ टिप्स और दिशानिर्देश देना चाहते हैं जो इसकी तैयारी में उत्कृष्टता प्राप्त करने में मदद करता है। रोडमैप और रणनीति पर सीधे चर्चा करने से पहले, हम अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्नों में से कुछ को संबोधित करते हैं।

  1. तैयारी कब शुरू करें?

कई प्रतिभागी अक्सर तैयारी शुरू करने के लिए सही समय के बारे में जिज्ञासा से पूछते हैं, यानी स्नातक स्तर की पढ़ाई करते समय, या स्नातक स्तर की पढ़ाई के बाद नौकरी करते हुए या दसवीं और बारहवीं में प्रारंभिक शिक्षा के दिनों में। यह सलाह दी जाती है कि स्नातक स्तर की पढ़ाई या स्कूल के दिनों में, इसके पाठ्यक्रम पर ध्यान देना चाहिए। वे व्यक्ति के व्यक्तित्व निर्माण के प्रारंभिक वर्ष होते हैं, इसलिए किसी व्यक्ति को उस पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए क्योंकि परीक्षा को उत्तीर्ण करने के लिए व्यक्तित्व और ज्ञान में वृद्धि आवश्यक है। इन वर्षों में जो ज्ञान प्राप्त होता है, वह अंततः परीक्षा को उत्तीर्ण करने में मदद करेगा। लक्ष्य पर व्यापक ध्यान देने के साथ स्नातक के पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित करने से अंततः सफलता मिलेगी।

  1. तैयारी कैसे शुरू करें?

इसका पाठ्यक्रम बहुत विशाल है। ग्रेडअप में, हम मार्गदर्शन करेंगे कि पाठ्यक्रम को कैसे कवर करें।

कुछ आवश्यक सुझाव हैं:

  • समयावधि: इस परीक्षा के लिए आवश्यक समयावधि से अवगत रहें। परीक्षा चक्र अपने आप में बहुत समय लेने वाला होता है, यानी सभी चरणों के माध्यम से गुजरने करने के लिए न्यूनतम एक वर्ष आवश्यक है: प्रारंभिक परीक्षा, मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार। इसलिए, तैयारी शुरू करने से लेकर परीक्षा के समय तक, एकेडमी जाने में लगभग दो साल लगते हैं। इस समयावधि के दौरान, यानी न्यूनतम दो वर्ष, जो 3-4 वर्ष तक जा सकती है, व्यक्ति को समर्पित प्रयास और गति बनाए रखने की जरूरत है। यदि आप इतने वर्षों के लिए तैयार हैं, तो केवल तभी तैयारी शुरू करें। मित्रों-संबंधियों के दबाव या सामाजिक दबाव (जैसे माता-पिता से) से प्रभावित न हों और तैयारी में न कूद जाएं। प्रेरणा भीतर से आनी चाहिए, तभी सफलता की संभावना सुनिश्चित की जा सकती है।
  • दृढ़ निश्चय: सभी जानते हैं कि परीक्षा की सफलता दर बहुत कम है, अर्थात 1%। हर साल लाखों उम्मीदवार इस परीक्षा में शामिल होते हैं, और कुछ ही चयनित होते हैं। तो, परीक्षा में सफल होने के लिए एक अटूट दृढ़ संकल्प की आवश्यकता होती है।
  • गलतियों के लिए कोई स्थान नहीं: रणनीति या तैयारी में गलतियाँ करने के लिए कोई जगह नहीं है, क्योंकि इससे आपका एक कीमती वर्ष खराब हो सकता है, जिसका उपयोग अधिक उत्पादकता के साथ से किया जा सकता है। ऐसे उदाहरण हैं, जहां एक उम्मीदवार साक्षात्कार के लिए उपस्थित हुआ और अर्हता प्राप्त नहीं करने पर उसी वर्ष की प्रारंभिक परीक्षा में शामिल होकर प्रारंभिक परीक्षा में सफल नहीं हो सका। तो इससे क्या सीख मिलती है? क्या अकेले ज्ञान चयनित होने में भूमिका निभाता है? नहीं, ज्ञान के अलावा, मानसिक सतर्कता और प्रत्येक चरण के लिए सही रणनीति महत्वपूर्ण है। हर चरण के लिए प्रत्‍युत्‍पन्‍नमतिस्‍व के साथ ईमानदारी से तैयारी, पुनरावृत्ति और एक मेहनती प्रयास की आवश्यकता होती है। परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए यह समझना महत्वपूर्ण है।
  • मानसिक धैर्य: यह परीक्षा एक लंबी प्रक्रिया है और कभी-कभी सर्वोत्तम प्रयासों के बावजूद, किसी को असफलता का सामना करना पड़ता है, इसलिए नहीं कि उसने अच्छी तैयारी नहीं की, बल्कि इसलिए कि किसी और ने बेहतर प्रदर्शन किया। इसलिए, यह ध्यान रखें कि यह एक प्रतियोगी परीक्षा है और किसी भी प्रमाण पत्र या डिग्री परीक्षा की तरह नहीं, जिसमें यदि न्यूनतम अंक प्राप्त किया जाता है, तो योग्य घोषित किया जाता है। सीटों की सीमित संख्या इसे चुनौतीपूर्ण बनाती है। इसके बिना, आप सभी चरणों में उत्कृष्ट प्रदर्शन नहीं कर सकते। याद रखें कि यह सिर्फ योग्यता के जरिये अपना नाम सुरक्षित कर लेना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वांछित सेवा और कैडर प्राप्त करने के लिए उच्च स्कोर हासिल करना ज़रूरी होता है। उम्मीदवार का पद निर्णायक कारक होता है। यदि स्कोर उचित नहीं है, तो वह किसी ऐसी सेवा और कैडर में फंस सकता है, जिसे उसने चुना नहीं है और वह शेष जीवन वहीं नहीं बिताना चाहता है।

3. यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा की एकीकृत तैयारी के लिए रणनीति:चरण-I:

    • एनसीईआरटी की किताबों को कवर करें: उन्हें पूरी तरह से कवर करना बहुत महत्वपूर्ण है क्योंकि वे परीक्षा में पूछे गए महत्वपूर्ण अवधारणाओं का आधार बनाते हैं। इतिहास, राजव्यवस्था, अर्थव्यवस्था, सामाजिक विज्ञान, आदि जैसे सभी विषयों को समझना प्रभावी शासन के लिए आवश्यक है। NCERT की किताबों को अच्छी तरह से पढ़ें, ताकि परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों को हल करते समय इसकी अवधारणाओं का इस्तेमाल किया जा सके।
    • कोचिंग संस्थानों की भूमिका: प्रारंभ में, कोचिंग तैयारी को दिशा देने में मदद करती है क्योंकि UPSC पाठ्यक्रम बहुत विशाल है। इस परीक्षा में, यह जानना आवश्यक है कि क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है! कर्मठ प्रयास और चयन समय, परीक्षा में उपस्थित होने की संख्या को बचाने में बहुत मदद करते हैं। लेकिन अगर किसी का संपर्क एक संरक्षक, मार्गदर्शक, वरिष्ठ, या पूर्व छात्र से है, जो इस प्रक्रिया को जानते हैं और महत्वपूर्ण समय और ऊर्जा बर्बाद किए बिना आपके प्रयासों को बचाने में मदद कर सकते हैं। इस परीक्षा में उत्तीर्ण होने के लिए सही मार्गदर्शन और रणनीति महत्वपूर्ण है।
    • वैकल्पिक विषय का चयन: यह बहुत महत्वपूर्ण कदम होता है! वैकल्पिक विषय के रूप से किसे चुनें? क्यों कि यह मेरिट सूची में चयनित होने के लिए सामान्य अध्ययन के पेपर के साथ वैकल्पिक में प्राप्त अंकों से तय होता है।
    • वैकल्पिक चुनने के पीछे मुख्य कारण उम्मीदवार का हित होना चाहिए। उम्मीदवारों को उन विषयों में से वैकल्पिक विषय चुनना चाहिए, जिनमें वे रुचि रखते हैं, और यूपीएससी ऐसा करते समय लचीलापन भी देता है। जैसा कि आयोग ने उम्मीदवार के स्नातक पाठ्यक्रम में शामिल विषयों का ही चयन करना अनिवार्य नहीं किया है।
    • नोट: प्रचलित रुझानों के बारे में चिंता न करें जैसे कि X, Y, Z वैकल्पिक अच्छा नहीं कर रहा है, या कितने उम्मीदवार इसके लिए और इतने वैकल्पिक विकल्प चुनते हैं, इसके चयन के विषय में किसी को अपनी रुचि पर ध्यान देना चाहिए और विषय परिचित और सहज महसूस होना चाहिए। फिर पिछले वर्षों में पूछे गए प्रश्नों का पर्याप्त अभ्यास करन चाहिए, ताकि विषय पर अच्छी पकड़ बन सके। इसलिए रूचि, पहले से जानकारी प्राप्त, सहजता और उपलब्ध संसाधनों का चयन करते समय प्राथमिकता दी जानी चाहिए। याद रखें कि एक उम्मीदवार को विषय के साथ तैयारी के वर्ष बिताने होंगे, इसलिए उसके अनुसार चयन करें।
    • एकीकृत अध्ययन: प्रारंभिक परीक्षा से पहले कुछ महीनों को छोड़कर कभी भी अलग-अलग अध्ययन नहीं करना चाहिए, जहाँ किसी को कई बार मॉक टेस्ट देने और पुनरावृत्ति करने की आवश्यकता होती है। प्रारंभिक के लिए पहले तैयारी करना और फिर मेन के लिए समय समर्पित करने की सोच एक बहुत ही गलत रणनीति है क्योंकि सभी 9 विषयों की तैयारी के लिए शायद ही पर्याप्त समय होता है जिसके लिए किसी को परीक्षा में लिखना होता है। यह निश्चित रूप से काम नहीं करता है!
    • जब एनसीईआरटी को कवर किया जाता है, तो वैकल्पिक विषय के लिए कोचिंग से जुड़ें। यदि स्व-अध्ययन के बारे में आश्वस्त हैं तो इसकी कोई ज़रूरत नहीं है। कम से कम चार महीने के लिए क्लब सामान्य अध्ययन और वैकल्पिक विषयों को समानांतर पढ़ें। सिलेबस और पिछले साल के प्रश्न पत्र बहुत महत्वपूर्ण हैं। लगभग 1-2 महीने के लिए, किसी को पिछले वर्ष के प्रश्नपत्रों और पाठ्यक्रम का विश्लेषण करना चाहिए। वे एक अनुमान प्रदान करेंगे, कि यूपीएससी क्या पूछ रहा है और यूपीएससी परीक्षा की मांग क्या है। एक उम्मीदवार के लिए यह समझना जितना आसान होगा, तैयारी की यात्रा उतनी ही आसान होगी।

करंट अफेयर्स या समसामयिकी कब शुरू करें?

  • प्रारंभिक चार महीनों के लिए, जब कोई तैयारी शुरू करता है तो उसे समाचार पत्रों या उत्तर लेखन पर ज्यादा ध्यान नहीं देना चाहिए। किसी को लंबे समय तक समाचार पत्र नहीं पढ़ना चाहिए, क्योंकि यह अधिक संभावना है कि समाचार पत्रों में समय बर्बाद होता है, बिना यह जाने कि किस टॉपिक पर अधिक जोर देना है। सिर्फ पढ़ने के लिए, सुर्खियों पर ध्यान देना चाहिए लेकिन कम से कम शुरुआती चार महीनों के लिए इसमें ज्यादा लिप्त नहीं होना चाहिए।
  • उम्मीदवार जब NCERT की किताबें + सामान्य अध्ययन + वैकल्पिक विषय को एक बार पढ़ लेता है, यानी उन्हें कवर करने के दौरान वह 4-5 महीने खर्च करने के बाद अब वह समय है जब तत्कालीन मामलों की जानकारी और समाचार पत्रों की भूमिका आवश्यक हो जाती है। तब तक, एक निष्पक्ष समझ विकसित हो जाती है कि क्या पढ़ना है और क्या नहीं पढ़ना है!
  • सामान्य अध्ययन और वैकल्पिक विषय को प्रथम पाठन के बाद, जो बहुत महत्वपूर्ण है, अन्य क्षेत्रों पर भी ध्यान दें। तो अगले चार महीने वैकल्पिक और सामान्य अध्ययन की दूसरी रीडिंग के साथ बिताए जा सकते हैं और करंट अफेयर्स भी अब पढ़ा जा सकता है। इसके अलावा, नीतिशास्त्र और निबंध के प्रश्नपत्रों पर भी ध्यान दें। कोई निबंध की मांग को तब समझेगा, जब उसे सामान्य अध्ययन और वैकल्पिक की उचित समझ प्राप्त हो जाएगी। इस अवधि में केवल सेकंड रीडिंग करना चाहिए, क्योंकि रिवीज़न बहुत महत्वपूर्ण है।
  • स्रोतों को नियंत्रित करना और अतिरिक्त पुस्तकों या पत्रिकाओं को न पढ़ना। एक उम्मीदवार को नोट्स को समझाने और उसे कई बार रिवाइज़ करने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। इस दौरान नोट्स बनाने की आदत विकसित करें, जो बहुत महत्वपूर्ण है। नोट्स बनाने से प्रारंभिक परीक्षा के साथ-साथ मुख्य परीक्षा में भी मदद मिलेगी।
  • संक्षेप में सामान्य अध्ययन + वैकल्पिक विषय का दूसरा रिवीज़न किया जाना चाहिए, और नीतिशास्त्र (केस स्टडी) और निबंध के प्रश्नपत्र का नियमित रूप से अभ्यास किया जाना चाहिए।

प्रारंभिक परीक्षा से 3 महीने पहले:

  • अब जब प्रारंभिक परीक्षा के लिए तीन महीने शेष हों। उन्हें केवल प्रारंभिक परीक्षा के लिए ही समर्पित करें। अब तक प्रारंभिक और मुख्य के लिए एक एकीकृत अध्ययन-केंद्रित किया जा रहा था, लेकिन अब प्रारंभिक परीक्षा पर गंभीरता से ध्यान देने की अनुशंसा की जाती है। उन किताबों पर ध्यान दें, जिनमें इतिहास के लिए स्पेक्ट्रम, राजव्यवस्था के लिए लक्ष्मीकांत जैसी किताबें हैं, जो प्रारंभिक परीक्षा में पूछे गए तथ्यों का भंडार हैं। उन्हें बार-बार रिवाइज करें।
  • क्वालीफाई करने के लिए CSAT पर अच्छी पकड़ बनाएं, लेकिन इसके प्रश्नों का स्तर ऐसा है कि कई उम्मीदवारों को इसे उत्तीर्ण करने में मुश्किल होती है।
  • जितना संभव हो उतने आईएएस टेस्ट सीरीज हल करें और कई बार अवधारणाओं, तथ्यों और समसामयिक मामलों का रिवीज़न करें। परीक्षा के पुराने प्रश्नपत्रों को हल करना बहुत मददगार होता है क्योंकि यह इस बात का अंदाजा लगाता है कि किस तरह के प्रश्न पूछे जाते हैं और कितने समय में इन प्रश्नों को हल करने का प्रयास किया जा सकता है। यह प्रभावी समय प्रबंधन और परीक्षा के दबाव में प्रदर्शन में एक अच्छी अंतर्दृष्टि प्रदान करता है। यह समझना ज़रूरी है कि परीक्षा हॉल में समय का प्रबंधन करना है।

स्टेज-II:

  • जब प्रारंभिक परीक्षा समाप्त हो जाती है, तो उम्मीदवारों को परीक्षा के अगले दिन से ही मुख्य तैयारी शुरू कर देनी चाहिए। प्रारंभिक परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा में समय बर्बाद न करें, क्योंकि यह कीमती समय होता है, जिसे खोना नहीं चाहिए। यूपीएससी को प्रारंभिक परीक्षा का परिणाम घोषित करने में लगभग एक महीने से 40 दिन तक का समय लगता है, यदि उसे उत्तीर्ण कर भी लिया, तो पहले से ही लगभग एक माह समय खो दिया गया होता है जिसका उपयोग मुख्य परीक्षा की तैयारी के लिए किया जा सकता था और अब ऐसे में नौ प्रश्न पत्रों को कवर करना मुश्किल हो जाता है।

इन महीनों में किस पर ध्यान देना चाहिए?

  • उम्मीदवार का मुख्य ध्यान उत्तर लेखन में होना चाहिए। यह समझें कि यदि कोई बिना समझे लिखता है, तो मुख्य परीक्षा के लिए वैचारिक स्पष्टता नहीं होगी। लेखन मुख्य परीक्षा का एक अनिवार्य हिस्सा है। हर दिन प्रश्नों की एक निर्धारित संख्या के उत्तर लिखें, एक 'मुख्य परीक्षा की टेस्ट सिरीज़' लिखें, बेहतर प्रदर्शन करने और स्कोर करने के लिए फीडबैक पर काम करें। एक सहपाठी समूह में चर्चा करने से करेंट के मुद्दों के बारे में दृष्टिकोण और राय विकसित करने में मदद मिलती है। याद रखें, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि कोई कितना जानता है, बल्कि इससे फर्क पड़ता है कि क्या और कैसे/ वह परीक्षा में व्यक्त करता है और यही निर्णायक कारक बन जाता है!
  • किसी को भी 'लेखन कार्यक्रम' में शामिल होना चाहिए, और दिए गए सवालों की संख्या के उत्तर लिखने में लिए गए समय के प्रबंधन में लगातार अपग्रेड करना चाहिए ताकि उत्तर की गुणवत्ता पर समझौता किए बिना पूरी मेहनत से प्रयास किया जा सके। दिए गए 20 प्रश्नों को समय को 3 घंटे में लिखा जाना है। तो कोई कैसे उन्हें समाप्त करता है, बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। लेखन की शैली उसकी मेरिट सुनिश्चित करेगी (प्रारंभिक परीक्षा के अंक नहीं गिने जाते हैं) और इसलिए सेवा और कैडर भी प्रभावित होंगे।
  • वर्तमान घटनायें और नोट्स: जो भी मुद्दा खबर में आ रहा है, उसे पाठ्यक्रम के साथ जोड़ना चाहिए और उस विषय पर नोट्स बनाने चाहिए। यह मुख्य परीक्षा की प्रभावी तैयारी में मदद करेगा। अच्छी तरह से अभ्यास करें; किसी ने टेस्ट सीरीज़ में या प्रचलित मुद्दों पर नोट्स बनाते समय उत्तर लिखे जाने चाहिए और फिर भी उत्तर लिखने के लिए तैयार रहें, यदि परीक्षा हॉल में कुछ आश्चर्यजनक प्रश्न पूछे जा रहे हों। ऐसी स्थितियों में, व्यक्ति को अल्प समय में ही उत्तर प्राप्त करने में सक्षम होना चाहिए। विदित हो कि परीक्षा में सोचने के लिए शायद ही कोई समय होता है और किसी को सोचने और उसे सही ढंग से अभिव्यक्त करने के लिए बढ़त मिलती है। इसलिए उत्तर लिखते समय से खुद को उत्तर पुस्तिका बेहतर तरीके से अभिव्यक्त करें।

संक्षेप में, स्टेज II के लिए, उत्तर लेखन, मुख्य परीक्षा टेस्ट सिरीज़ का अभ्यास, करंट अफेयर्स नोट्स और रिवीजन पर ध्यान दिया जाना चाहिए।

स्टेज-III

मुख्य परीक्षा समाप्त होने के बाद, मुख्य परीक्षा के परिणाम की प्रतीक्षा न करें। मुख्य परीक्षा के परिणाम घोषित करने में यूपीएससी को लगभग दो महीने लगते हैं। अब साक्षात्कार की तैयारी शुरू करनी चाहिए।

  • DAF या विस्तृत आवेदन फॉर्म की तैयारी: साक्षात्कारकर्ता मुख्य रूप से DAF से प्रश्न पूछता है। इसके जरिये किसी की शैक्षिक पृष्ठभूमि, काम की जगह, शौक आदि को अच्छी तरह से जाना जा कता है।
  • इस दौरान अखबार को अच्छी तरह से पढ़ें
  • विभिन्न मुद्दों पर विशेष रूप से बहस वाले मुद्दों पर अपनी एक राय बनाना चाहिए
  • मॉक साक्षात्कार के जरिये मौखिक और गैर-मौखिक पहलुओं पर हमारी प्रतिक्रिया को बेहतर बनाने में मदद करती है। ये किसी के व्यक्तित्व को निखारने में मदद करते हैं।

इस लेख के जरिये हमने बुनियादी तैयारी रणनीति के बारे में उचित मार्गदर्शन देने का प्रयास किया है। यह व्यक्ति की क्षमता पर निर्भर करता है कि वह उसका अधिकांश हिस्सा कैसे लागू कर पाता है।

किसी भी प्रश्न के लिए हमसे संपर्क करें, हमें आपकी सहायता करके प्रसन्नता होगी।

हमारी ओर से आपको बहुत-बहुत शुभकामनाएं!

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