अनुच्छेद110: धन विधेयक

By Brajendra|Updated : October 20th, 2022

विधेयक किसी विधायी प्रस्ताव का प्रारूप होता है।अधिनियम बनने से पहले विधेयक को कई प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है। विधान संबंधी प्रक्रिया विधेयक के संसद की किसी भी सभा लोकसभा अथवा राज्यसभा में पुरःस्थापित किये जाने से शुरू होती हैं। संसद में प्रस्तुत होने वाले विधेयकों की चार प्रकार के होते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 110 में धन विधेयक को परिभाषित किया गया है।

अनुच्छेद 110: धन विधेयक

विधेयक' अंग्रेजी के बिल (Bill) का हिन्दी में परिवर्तित शब्द है। यहाँ 'बिल' शब्द का प्रयोग 'संसद द्वारा पारित विधि' के संबंध में किया गया है। ऐसे विधेयक जिनमें सरकार के खर्चों से सम्बंधित प्रावधान होते है, उन्हें धन विधेयक (Money Bill) कहा जाता है। धन विधेयक का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 110 में है। 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 110 के अंतर्गत धन विधेयक को परिभाषित किया गया है कि कोई विधेयक धन विधेयक कहलायेगा यदि:

  • कर लगाना, कम करना या बढ़ाना, उसको नियमित करना इसमें उसमें कोई परिवर्तन करना हो |
  • भारत सरकार की ओर से ऋण लेना, नियमित करना या किसी अधिभार में कोई परिवर्तन करना हो |
  • भारत की संचित निधि या आकस्मिकता निधि में कुछ धन डालना हो या निकालना हो |
  • भारत की संचित निधि में से किसी व्यय संबंध में धन दिया जाना हो |
  • भारत की जमा पूंजी में से किसी भी व्यक्ति किए जाने की घोषणा करना या ऐसे व्यय को बढ़ाना हो |
  • भारत की संचित निधि तथा सार्वजनिक लेखों में धन जमा करने या लेखों की जांच पड़ताल करनी हो तथा उपरोक्त उल्लेखित विषयों में से संबंधित विषय|
  • धन की आय तथा व्यय के प्रति अन्य किसी प्रकार का मामला हो|

कोई विधेयक धन विधेयक नहीं होगा यदि:

  • जुर्माने या अन्य धन संबंधी शास्तियों के अधीन अध्यारोपित हो।
    किसी स्थानीय प्राधिकारी या निकाय द्वारा स्थानीय प्रयोजनों के लिये किसी कर के अधिरोपण, उत्सादन, परिवर्तन या विनियमन, परिहार का उपबंध करता हो।
  • अनुज्ञप्तियों के लिये या की गई सेवाओं के लिये शुल्कों की मांग करता हो।

धन विधेयक के सम्बन्ध में संसदीय प्रावधान

  • धन विधेयक एक सरकारी विधेयक है, अतः इसे संसद केवल मंत्री द्वारा ही प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • कोई विधेयक धन विधेयक है अथवा नहीं, इसे लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा प्रमाणित किया जाता है।
  • धन विधेयक राष्ट्रपति की अनुसंशा पर केवल लोकसभा में प्रस्तुत किया जा सकता है।
  • धन विधेयक को पारित करने के लिए एक विशेष संसदीय प्रक्रिया है, जिसे भारतीय संविधान के अनुच्छेद 109 में वर्णित किया गया है।
  • लोकसभा में पारित होने के बाद धन विधेयक राज्यसभा में भेजा जाता है।
  • राज्यसभा को 14 दिनों के अंदर उस पर अनुमति देनी होती है अन्यथा इसे राज्यसभा द्वारा पारित माना जाता है।
  • धन विधेयक के संबंध में राज्यसभा के पास काम शक्तियाँ हैं। राज्यसभा धन विधेयक को अस्वीकृत या संशोधित नहीं कर सकती है। राज्यसभा केवल सिफारिश कर सकती है।
  • यदि लोकसभा राज्यसभा की सिफारिशों को मान लेती है तो फिर इस विधेयक को सदनों द्वारा संयुक्त रूप से पारित माना जाता है।
  • यदि लोकसभा कोई सिफारिश नहीं मानती है तो इसे मूल रूप से दोनों सदनों द्वारा पारित माना जाता है।
  • संसद के दोनों सदनों द्वारा पारित होने क बाद धन विधेयक को राष्ट्रपति के समक्ष प्रस्तुत किया जाता है। राष्ट्रपति धन विधेयक को सदन में पुनः विचार के लिये नहीं भेज सकता है। राष्ट्रपति या तो वह इस पर अपनी सहमति देता है या फिर इसे रोक कर रख सकता है।

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FAQs

  • ऐसे विधेयक जिनमें सरकार के खर्चों से सम्बंधित प्रावधान होते है, उन्हें धन विधेयक (Money Bill) कहा जाता है। धन विधेयक का उल्लेख भारतीय संविधान के अनुच्छेद 110 में है।

  • धन विधेयक धन विधेयक के रूप में कौन प्रमाणित करने का अधिकार लोकसभा अध्यक्ष को है। 

  • राज्यसभा धन विधेयक को अधिकतम 14 दिन रोक सकती है। राज्यसभा को 14 दिनों के अंदर उस पर अनुमति देनी होती है अन्यथा इसे राज्यसभा द्वारा पारित माना जाता है।

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