Amboli declared a biodiversity heritage-site

By Sudheer Kumar K|Updated : July 13th, 2021

Recently the Maharashtra government has issued a notification declaring a temple at Amboli a biodiversity heritage site in Sindhudurg under the Biodiversity Act, 2002, Read further for Details.

General studies Paper: III(Environment and Ecology)

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Amboli declared a biodiversity heritage-site

संदर्भ

  • हाल ही में महाराष्ट्र सरकार ने सिंधुदुर्ग के अंबोली में एक मंदिर को जैव विविधता अधिनियम, 2002 के तहत जैव विविधता विरासत स्थल के रूप में घोषित करते हुए एक अधिसूचना जारी की है।
  • हाल ही में ठाकरे वाइल्डलाइफ फाउंडेशन के नेतृत्व में शोधकर्ताओं के एक कर्मचारी ने मंदिर के तालाब में ‘शिस्टुरा हिरण्यकेशी’ मछली की प्रजाति को पाया है।

इस विषय से जुड़े हुए तथ्य:

  • ‘शिस्टुरा हिरण्यकेशी’ मछली मीठे पानी में पायी जाने वाली प्रजाति है।
  • इसके निवास स्थान को जैव-विविधता विरासत स्थल घोषित करने का निर्णय इसलिए लिया गया क्योंकि यह एक दुर्लभ प्रजाति है और मछली पकड़ने की गतिविधियों के कारण, इसके विलुप्त होने का खतरा है।
  • महाराष्ट्र में अंबोली नामक स्थान देवी पार्वती के मंदिर तथा हिरण्यकेशी नदी के उद्गम स्थल के रूप में जाना जाता है।
  • भारत के पश्चिमी घाट क्षेत्र में एक अन्य मंदिर के तालाब में ‘शिस्टुरा हिरण्यकेशी’ प्रजाति पहले भी पाई गई है।
  • पूरे महाराष्ट्र में कई और क्षेत्रों को भी जैव विविधता विरासत साइटों के रूप में घोषित किया है। इसमें जलगांव में लैंडर खोरी पार्क, पुणे में गणेश खिंड, गढ़चिरौली में अल्लापल्ली और सिंधुदुर्ग की मिरिस्टिका दलदली वनस्पति क्षेत्र शामिल हैं।

क्या होते है जैव विविधता विरासत स्थल?

  • जैव विविधता विरासत स्थल भारत में जैव विविधता महत्व के अधिसूचित क्षेत्र हैं।
  • भारत के राज्यों की सरकारें 2002 के जैव विविधता अधिनियम की धारा 37 के तहत स्थानीय शासी निकायों के परामर्श से जैव विविधता विरासत स्थलों को अधिसूचित कर सकती हैं।
  • इन क्षेत्रों को अद्वितीय और संवेदनशील पारिस्थितिक तंत्र माना जाता है।
  • ये स्थलीय, तटीय और अंतर्देशीय जल या समुद्री पारिस्थितिक तंत्र हो सकते हैं।

क्या है जैव विविधता अधिनियम, 2002? 

  • जैव विविधता अधिनियम, 2002 जैविक विविधता के संरक्षण के लिए भारत की संसद द्वारा लागू एक अधिनियम है।
  • इस अधिनियम को जैव विविधता पर कन्वेंशन के तहत दायित्वों को पूरा करने के लिए लागू किया गया था।
  • इस अधिनियम के तहत राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण और राज्य जैव विविधता बोर्ड को स्थापित किया गया है।
  • राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण (एनबीए) एक वैधानिक स्वायत्त निकाय है, जिसका मुख्यालय चेन्नई में है। यह भारत सरकार के पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के अंतर्गत कार्य करता है।
  • राज्य जैव विविधता बोर्ड (एसबीबी) पूरे भारत में 31,574 जैविक प्रबंधन समितियों (प्रत्येक स्थानीय निकाय के लिए) के साथ सभी राज्यों में बनाए गए हैं।

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