आदर्श अमीटर का प्रतिरोध क्या होना चाहिए?

By Raj Vimal|Updated : September 6th, 2022

हमारे घरों में लगा बिजली मीटर, अमीटर कहते हैं। परिपथ के द्वारा प्रवाहित हो रही विद्युत धारा को मापने के लिए अमीटर लगाया जाता है। एक आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य होना चाहिए। अमीटर की  कुंडली में भी कुछ प्रतिरोध जरुरी होता है और अमीटर के परिपथ में जुड़ते ही उस विद्युत परिपथ का प्रतिरोध बढ़ जाता है।

इस प्रतिरोध के कारण उस परिपथ में बहने वाली धारा का मान कुछ कम हो जाता है। यही कारण है कि अमीटर में उसकी रीडिंग में फर्क हो जाता है। यही कारण है कि अमीटर का प्रतिरोध कम रखा जाता है। अमीटर का प्रतिरोध कम रखने के लिए उसकी कुंडली के समांतर क्रम में एक शंट जोड़ देते हैं।

यहाँ स्टूडेंट का यह जानना जरुरी है कि अमीटर और वोल्टमीटर में अंतर होता है। वोल्टमीटर का उपयोग दो बिन्दुओं के बीच विभवान्तर मापने के लिए किया जाता है।

Summary

आदर्श अमीटर का प्रतिरोध क्या होना चाहिए?

आदर्श अमीटर का प्रतिरोध शून्य होना चाहिए। इसका शून्य होना विद्युत् परिपथ में उसकी धारा को कम नहीं करेगा। मीटर में प्रतिरोध का मान कम करने के लिए उसकी कुंडली में कम प्रतिरोधक का शंट जोड़ा जाता है।

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