आवेश संरक्षण का नियम लिखिए।

By Raj Vimal|Updated : September 6th, 2022

आवेश संरक्षण का नियम यह है कि न तो आवेश को पैदा किया जा सकता है और न ही इसे नष्ट किया जा सकता है। इसे बस एक वस्तु से दुसरे वस्तु में स्थानातरित किया जा सकता है।

उदाहरण के लिए अगर काँच की एक छड़ को रेशम के बने कपड़े से रगड़ा जाता है, तब वह काँच की छड़ धन आवेशित (Positive Charged) व रेशम से बना कपड़ा ऋण आवेशित (Negative Charged) हो जाता है|

इसके होने का कारण आवेश का संरक्षण नियम है जिसे Law of conservation of charge भी कहते हैं। वैज्ञानिक बेंजामिन फ्रैंकलिन ने ही आवेश के संरक्षण नियम दिया था। इस नियम को 1912 में मिलिकन ने प्रायोग किया था। आवेश एक अदिश राशि है क्योंकि इसमें केवल दिशा ही होता है।

Summary

आवेश संरक्षण का नियम लिखिए।

किसी वस्तु का कुल आवेश नियत रहता है, इसे पैदा या नष्ट नहीं किया जा सकता है, यही न्यूलैंड का अष्टक नियम है। उदाहरण के लिए जब आप बालों में कंघा घिसते हैं तो कंघे पर आवेश आ जाता है और वह छोटे कागज के टुकड़े आकर्षित करता है।

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