नकारात्‍मक अंकन के बाद यूपीएससी प्रारंभिक परीक्षा के कुल अंकन की गणना कैसे करें

By Arpit Kumar Jain|Updated : May 23rd, 2017

यह आवश्‍यक है कि यूपीएससी आईएएस सिविल परीक्षा के अंकन पैटर्न के बारे में प्रत्‍येक छात्र को पता होना चाहिए। यह परीक्षा के बाद उनके संभावित अंकों की गणना करने में उनकी मदद करता है। साथ ही, इससे उम्‍मीदवारों को परीक्षा से पहले यह जानने में मदद मिलती है कि कुछ अंक प्राप्‍त करने के लिए कुल कितने प्रश्‍नों को हल करने की आवश्‍यकता है।   

प्रारंभिक परीक्षा में, प्रत्‍येक प्रश्‍न 2 अंकों का होता है। यदि छात्र एक प्रश्‍न का सही उत्‍तर देता है तो उसे 2 अंक प्राप्‍त होंगे। लेकिन गलत उत्‍तर देने पर दण्‍ड स्‍वरूप नकारात्‍मक अंकन भी है। प्रत्‍येक गलत उत्‍तर देने पर यूपीएससी प्रश्‍न के अंक का एक तिहाई अंक काट लेगा। चूंकि प्रत्‍येक प्रश्‍न के लिए 2 अंक हैं, तो प्रत्‍येक गलत उत्‍तर के लिए दण्‍ड स्‍वरूप 2/3 अर्थात् 0.67 अंक काटे जाएंगे। तो, मान लीजिए कि एक छात्र प्रारंभिक परीक्षा में 79 प्रश्‍नों को हल करता है। अब यदि वह 64 प्रश्‍नों को सही लेकिन 15 प्रश्‍नों को गलत हल करता है। तो उसके अपेक्षित अंक : 64(2) – 15(.67) = 128-10 = 118 अंक होंगे।

छात्रों को अंकों की गणना करने की इस पद्धति को सही से समझना चाहिए। चूंकि यह छात्रों को एक विशेष अंक प्राप्‍त करने के लिए कितने प्रश्‍नों को हल करने की आवश्‍यकता है यह जानने में मदद करेगा।  

उदाहरणार्थ, यदि एक छात्र का लक्ष्‍य यूपीएससी आईएएस प्रारंभिक परीक्षा में 120 अंक प्राप्‍त करना है तो वह उन अंकों को प्राप्‍त करने के लिए प्रश्‍नों में कईं क्रम परिवर्तन कर सकता है :

  • यदि वह 90 प्रश्‍नों को हल करने का प्रयास करता है तो वह लगभग 22 गलत प्रश्‍नों को बर्दाश्‍त कर सकता है : 68(2) – 22(.67) = 121.33 अंक ।
  • यदि वह 80 प्रश्‍नों को हल करने का प्रयास करता है तो वह लगभग 22 गलत प्रश्‍नों को बर्दाश्‍त कर सकता है : 65(2) – 15(.67) = 120 अंक।
  • यदि वह 70 प्रश्‍नों को हल करने का प्रयास करता है तो वह लगभग 8 गलत प्रश्‍नों को बर्दाश्‍त कर सकता है : 62(2) – 8(.67) = 118.67 अंक।

आमतौर पर यह देखा जाता है कि वे छात्र जो अनुमान लगाने का प्रयास नहीं करते हैं, कि एक विशेष अंक प्राप्‍त करने के लिए उन्‍हें कितने प्रश्‍नों को हल करने की आवश्‍यकता है, वे आमतौर पर प्रश्‍नों की अधिकतम संख्‍या को हल करते हैं जो बड़े नकारात्‍मक अंकन का कारण बनता है।   

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