दैनिक समाचार विश्लेषण- 20- मई 2022

By Subject Expert (BYJU'S IAS)|Updated : May 20th, 2022

समाचार पत्र विश्लेषण में यूपीएससी/आईएएस परीक्षा के दृष्टिकोण से 'द हिंदू' के सभी महत्वपूर्ण लेख और संपादकीय को शामिल किया जाता हैं।

Table of Content

A. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 1 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

 

B. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

राजव्यवस्था:

केंद्र, राज्यों के पास GST से संबंधित कानून बनाने की समान शक्तियाँ हैं : SC

विषय: विभिन्न संवैधानिक पदों पर नियुक्ति, विभिन्न संवैधानिक निकायों की शक्तियां, कार्य और जिम्मेदारियां।

प्रारंभिक परीक्षा: वस्तु एवं सेवा कर (GST) और GST परिषद के बारे में जानकारी। 

मुख्य परीक्षा: GST परिषद का कामकाज और जीएसटी से संबंधित कानूनों पर केंद्र और राज्य सरकारों की शक्तियां।

प्रसंग:

  • वस्तु एवं सेवा कर (GST) (Goods and Services Tax (GST)) से संबंधित कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट का निर्णय।

विवरण:

  • गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले की पुष्टि करने वाले एक फैसले में,सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि केंद्र सरकार भारतीय आयातकों के समुद्री माल पर एकीकृत माल और सेवा कर (IGST) नहीं लगा सकती है।
  • सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले के माध्यम से रिवर्स चार्ज के आधार पर समुद्री माल पर IGST के कार्यान्वयन पर सरकार और कंपनियों के बीच लंबी लड़ाई को खत्म किया हैं।
  • इस फैसले से आयातकों को राहत मिली है क्योंकि वे समुद्री माल पर GST का भुगतान करने के लिए उत्तरदायी नहीं हैं और ऐसे पिछले भुगतानों के लिए रिफंड का दावा भी कर सकते हैं।
  • इसी फैसले में शीर्ष अदालत ने आगे कहा कि केंद्र और राज्य विधानसभाओं के पास GST से संबंधित कानूनों पर "समान, समकालिक और अद्वितीय शक्तियां" हैं,और GST परिषद (GST Council) की सिफारिशें उन पर बाध्यकारी नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट का फैसला:

  • SC की बेंच ने कहा हैं कि GST परिषद की सिफारिशें संघ और राज्यों के साथ हुई बातचीत का परिणाम हैं,और ये प्रकृति में केवल अनुशंसात्मक हैं और इन्हें बाध्यकारी बनाने से  यह राजकोषीय संघवाद के खिलाफ होगा क्योंकि केंद्र और राज्यों दोनों के पास GST पर कानून बनाने की समान शक्ति है।

फैसला सुनाते समय अदालत ने निम्न संवैधानिक अनुच्छेदों पर प्रकाश डाला :

  • अनुच्छेद 246A - राज्यों को GST पर कानून बनाने की शक्ति प्रदान करता है।
  • अदालत का मानना ​​​​हैं कि अनुच्छेद 246 के माध्यम से संविधान संघ और राज्यों को समान इकाई मानता है और केंद्र और राज्यों को GST पर कानून बनाने की सामान शक्ति प्रदान करता है।
  • अनुच्छेद 279 ए - यह प्रावधान करता है कि GST को नियंत्रित करने के लिए राष्ट्रपति द्वारा एक GST परिषद का गठन किया जायगा,एवं केंद्रीय वित्त मंत्री इसके अध्यक्ष होंगे और राज्य सरकारों के मंत्री इसके सदस्य होंगे।
  • परिषद GST से संबंधित सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर केंद्र और राज्य सरकारों को सिफारिशें करेंगी।
  • SC बेंच ने व्याख्या की कि अनुच्छेद में यह कहा गया है कि न तो संघ और न ही राज्य एक दूसरे पर निर्भर हैं।
  • कोर्ट ने आगे कहा कि GST कानूनों के संबंध में केंद्र और राज्य स्वायत्त, स्वतंत्र और प्रतिस्पर्धी इकाइयां हैं।
  • कोर्ट ने केंद्र और राज्यों से सौहार्दपूर्ण तरीके से काम करने का आग्रह किया क्योंकि यह राष्ट्र की भलाई के लिए आवश्यक है और सरकार के दो स्तरों के बीच सहयोग और प्रतिस्पर्धा से वित्तीय सुरक्षा प्राप्त की जा सकती है।

संघवाद पर न्यायालय के विचार:

  • घवाद के महत्व को दोहराते हुए न्यायालय ने कहा कि "संघीय प्रणाली एक बहुलवादी समाज की जरूरतों को लोकतांत्रिक तरीके से समायोजित करने का एक साधन है और लोकतंत्र और संघवाद एक दूसरे पर आश्रित हैं।
  • संघवाद केवल मजबूत लोकतंत्र में ही स्थिर रह सकता हैं।
  • एक संघीय राज्य व्यवस्था की घटक इकाइयाँ किसी समूह को प्रमुख शक्ति का प्रयोग करने से रोकने के लिए एक दूसरे की शक्तियों के प्रयोग की जाँच कर सकती हैं।
  • SC की बेंच ने यह भी माना कि "भारतीय संघवाद सहकारी/सहयोगी और असहयोगी संघवाद (cooperative and uncooperative federalism)के बीच एक संवाद है जहाँ संघीय इकाइयाँ सहयोग से लेकर प्रतियोगिता तक, अनुनय के विभिन्न साधनों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं"।
  • संघवाद के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Federalism

राज्य की प्रतिक्रिया:

  • केरल और तमिलनाडु जैसे राज्यों के मंत्रियों ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का स्वागत किया है और कहा है कि यह राज्यों के अधिकारों की रक्षा करता है और सहकारी/सहयोगी संघवाद को मजबूत करता है।
  • केरल के वित्त मंत्री ने कहा कि इस फैसले का देश के कर ढांचे और केंद्र-राज्य संबंधों पर बड़े पैमाने पर प्रभाव पड़ेगा।
  • तमिलनाडु के मंत्री ने आरोप लगाया कि केंद्र मनमाने ढंग से राज्यों पर अपने फैसले थोप रहा है, जिससे राज्य का राजस्व प्रभावित हो रहा है,और  सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से राज्यों को अपने अधिकारों की रक्षा करने और वित्तीय स्थिरता सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

केंद्र की प्रतिक्रिया:

  • केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने कहा हैं कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले में GST व्यवस्था के कामकाज में किसी भी प्रकार कोई बदलाव करना अनिवार्य नहीं है।
  • मंत्रालय ने इस बात जोर देकर कहा कि SC द्वारा GST परिषद के संबंध में सहयोगी और सहकारी संघवाद को उल्लेखनीय उदाहरण के रूप में निर्दिष्ट कर अदालत ने केवल अपने कार्यात्मक तंत्र के बारे में विस्तार से बताया है।
  • मंत्री ने आगे बताया कि GST परिषद एक सहयोगी संस्थागत ढांचा हैं, तथा इसका गठन आम सहमति से किया गया हैं,तथा संघ और राज्यों द्वारा इसकी सिफारिशों का पालन किया जाता हैं।

सारांश:

  • सुप्रीम कोर्ट ने माना कि हालांकि कुछ मामलों में केंद्र के पास अधिक शक्तियां हैं ,लेकिन राज्य संविधान द्वारा दिए गए प्रावधानों का उपयोग कर सकते हैं। 
    • न्यायालय के इस अवलोकन ने इसलिए महत्व प्राप्त कर लिया है क्योंकि यह लोकतंत्र और सहकारी संघवाद के सिद्धांतों को कायम रखता है।

 

C. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

पर्यावरण:

भारत की इथेनॉल सम्मिश्रण नीति को समझना:

विषय: संरक्षण, पर्यावरण प्रदूषण और निम्नीकरण। 

प्रारंभिक परीक्षा: जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति, 2018 और भारत का इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम। 

मुख्य परीक्षा: भारत की इथेनॉल सम्मिश्रण नीति और इसके प्रभाव।

प्रसंग:

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जैव ईंधन, 2018 पर राष्ट्रीय नीति में संशोधन को मंजूरी दे दी हैं,जिसमे ईंधन कंपनियों को वर्ष 2025 तक पेट्रोल में इथेनॉल के प्रतिशत को 20% (E20) तक बढ़ाना होगा , पहले यह समय सीमा वर्ष 2030 तक थी।
  • जैव ईंधन पर राष्ट्रीय नीति, 2018 के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:National Policy on Biofuels, 2018

इथेनॉल सम्मिश्रण:

  • इथेनॉल एक कृषि आधारित उत्पाद है, जो मुख्य रूप से चीनी उद्योग के उप-उत्पाद, शीरा से प्राप्त किया जाता हैं।
  • एक इथेनॉल मिश्रण को मिश्रित मोटर ईंधन के रूप में परिभाषित किया जाता है जिसमें एथिल अल्कोहल होता है जो कम से कम 99% शुद्ध होता है,और कृषि उत्पादों से प्राप्त होता है एवं इसे विशेष रूप से पेट्रोल के साथ मिश्रित किया जाता है।
  • इथेनॉल सम्मिश्रण में इथेनॉल को मोटर ईंधन के साथ मिलाया जाता है जो प्रदूषण को कम करने, विदेशी मुद्रा के संरक्षण और चीनी उद्योग के  मूल्यवर्धन में मदद करता है,अंततः किसानों के लिए मददगार साबित हो सकता  है।
  • चूंकि इथेनॉल पेट्रोल की तुलना में पूरी तरह से जल जाता है,अतः यह कार्बन मोनोऑक्साइड के उत्सर्जन को कम करता  है।
  • हालांकि, अध्ययनों से पता चला है कि नाइट्रस ऑक्साइड के उत्सर्जन में कोई कमी नहीं आई है जो कि प्रमुख पर्यावरण प्रदूषकों में से एक है।

भारत में इथेनॉल-मिश्रण का इतिहास:

  • गत 20 वर्षों से भारत वाहनों के उपयोग के लिए पेट्रोल में अधिक इथेनॉल मिश्रित करने के लिए एक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करना चाहता है।
  • सरकारी रिपोर्टों के अनुसार, भारत के 22 करोड़ वाहनों में से लगभग 75% दोपहिया और 12% चार पहिया वाहन हैं।
  • भारत वर्ष 2001 से इथेनॉल-मिश्रित पेट्रोल का उपयोग करने की व्यवहार्यता की जांच कर रहा है, जिसमें 5% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (95% पेट्रोल-5% इथेनॉल) की आपूर्ति की गई थी।
  • वर्ष 2002 में, सरकार ने इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (ईबीपी) (Ethanol Blended Petrol (EBP) Programme)कार्यक्रम की घोषणा की और कुछ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 5% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल की बिक्री शुरू की।
  • हालांकि वर्ष 2013-14 तक, सम्मिश्रण का प्रतिशत 1.5% से अधिक नहीं था।
  • इसलिए वर्ष 2015 में, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने जारी किया कि E5 (5% इथेनॉल का सम्मिश्रण) पेट्रोल और 2008 से उत्पादित गैसोलीन वाहनों में उपयोग किए जाने वाले रबर और प्लास्टिक के घटक E10 ईंधन (10% इथेनॉल का सम्मिश्रण) के अनुकूल हैं। 
    • वर्ष 2019 में, मंत्रालय ने E10 ईंधन को अधिसूचित किया।
  • सरकार ने डिस्टिलरी और अन्य नीतिगत समर्थन के लिए वित्तीय प्रोत्साहन दिया है जिसके परिणामस्वरूप औसत मिश्रण 5% तक पहुंच गया है।
  • सरकार पहले ही E20, E85 और यहां तक ​​कि E100 ईंधन के लिए मानक निर्धारित कर चुकी है।
  • भारत वर्ष 2022 के अंत तक पेट्रोल में 10% सम्मिश्रण और 2030 तक 20% सम्मिश्रण प्राप्त करने का इरादा रखता है। सरकार की योजना वर्ष 2030 तक डीजल के साथ बायोडीजल के 5% सम्मिश्रण को प्राप्त करने की है।

E20 सम्मिश्रण को अपनाना:

  • भारत का पेट्रोलियम का शुद्ध आयात 185 मिलियन टन होने का अनुमान लगाया गया था, जिसकी लागत वर्ष 2020-21 में लगभग 55 बिलियन डॉलर थी।
  • भारत द्वारा किये गए अधिकांश पेट्रोलियम आयात का उपयोग ऑटोमोबाइल द्वारा किया जाता है, और इसलिए E20 कार्यक्रम के सफल कार्यान्वयन से प्रति वर्ष लगभग 30,000 करोड़ रुपये बचाने में मदद मिल सकती है।
  • नीति आयोग की एक रिपोर्ट ने इथेनॉल सम्मिश्रण का एक व्यापक ढांचा प्रदान किया है जिसमें चुनौतियां और एक रोडमैप शामिल है।
  • E20 सम्मिश्रण प्राप्त करने के लिए, समिति ने 1,016 करोड़ लीटर इथेनॉल की मांग का अनुमान लगाया है और इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या में वृद्धि को देखते हुए वर्ष 2025 में 722-921 करोड़ लीटर इथेनॉल की मांग होने की सम्भावना जताई हैं।
  • हालांकि, भारत का वर्तमान इथेनॉल उत्पादन शीरा-आधारित भट्टियों से लगभग 426 करोड़ लीटर और अनाज आधारित भट्टियों से 258 करोड़ लीटर है।
  • इसके बढ़कर क्रमशः 760 करोड़ लीटर और 740 करोड़ लीटर होने की उम्मीद है, जिसमें से 1016 करोड़ लीटर एथेनॉलसम्मिश्रणकी आवश्यकता सम्मिश्रण के लिए और 334 करोड़ लीटर अन्य उपयोगों के लिए होगी।
  • इसके लिए 2025 में प्रति वर्ष लगभग 6 मिलियन टन चीनी और 16.5 मिलियन टन अनाज की आवश्यकता होगी।

वाहनों पर E20 सम्मिश्रण का प्रभाव:

  • E20 सम्मिश्रण के साथ यह अपेक्षित है कि चार पहिया वाहनों में 6-7% ईंधन दक्षता का नुकसान होगा और E0 के लिए विकसित और E10 के लिए स्केल किए गए दोपहिया वाहनों को लगभग 3-4% का नुकसान होगा।  
  • हालांकि, वाहन निर्माताओं का मानना ​​है कि इंजनों में संशोधन से नुकसान की अक्षमता की भरपाई हो सकती है,और साथ ही सरकार को उपभोक्ताओं को दक्षता में गिरावट के लिए क्षतिपूर्ति करने और E10 और E20 ईंधन पर कर प्रोत्साहन का विस्तार करने के तरीकों पर भी गौर करना चाहिए।

अन्य देशों में इथेनॉल सम्मिश्रण का अनुभव:

  • फ्लेक्स फ्यूल इंजन टेक्नोलॉजी (FFE) जिसमें पूरी तरह से इथेनॉल पर चलने वाले वाहन शामिल हैं, को ब्राजील में सफलतापूर्वक शुरू किया गया है जो 2019 में नए वाहनों की कुल संख्या का लगभग 80% हिस्सा है।
  • अनुभव के आधार पर यह अनुमान लगाया गया है कि फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों (चार पहिया वाहनों) की लागत वर्तमान पीढ़ी के वाहनों की तुलना में लगभग ₹17,000 से ₹ 25,000 अधिक हो सकती है।
  • नियमित पेट्रोल वाहनों की तुलना में दोपहिया फ्लेक्स-ईंधन वाले वाहन ₹5,000 से ₹12,000 तक महंगे हो जायेंगे।
  • ईंधन इथेनॉल का वैश्विक उत्पादन वर्ष 2019 में 110 अरब लीटर तक पहुंच गया है।
  • यू.एस. और ब्राजील वैश्विक हिस्सेदारी का लगभग 84% उत्पादन करते हैं, जिसके बाद यूरोपीय संघ (EU), चीन, भारत, कनाडा और थाईलैंड का स्थान आता है।
  • भारत में उत्पादित इथेनॉल की कीमतें अमेरिका और ब्राजील की तुलना में ज्यादा हैं जो सरकार द्वारा प्रदान किए गए न्यूनतम समर्थन मूल्य के कारण है।

भारत के लिए भावी कदम:

  • इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी इकोनॉमिक्स एंड फाइनेंशियल एनालिसिस (आईईईएफए) की रिपोर्ट बताती है कि भारत को 2025 तक ई20 मिश्रण के अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए मक्का की खेती के तहत अतिरिक्त 30,000 वर्ग किमी भूमि शामिल करनी होगी।
  • आधी जमीन सौर ऊर्जा से कुशल बिजली पैदा करने के लिए पर्याप्त है।
  • भारत में, गन्ना इथेनॉल का सबसे सस्ता स्रोत है और औसतन एक टन गन्ना 100 किलो चीनी और 70 लीटर इथेनॉल का उत्पादन कर सकता है।
  • इसका मतलब है कि 1 किलो चीनी के उत्पादन के लिए लगभग 2,000 लीटर पानी की आवश्यकता होती है, और चीनी से एक लीटर इथेनॉल के लिए लगभग 2,860 लीटर पानी की आवश्यकता होती है।

सारांश:

  • ऐसे समय में जब ईंधन की कीमतें आसमान छू रही हैं,20 प्रतिशत एथेनॉल सम्मिश्रण के लक्ष्य को पांच वर्षों तक बढ़ाने का लक्ष्य कच्चे तेल के शुद्ध आयात को कम कर और नागरिकों के बीच पर्यावरण के अनुकूल व्यवहार को विकसित करना है।

 

D. सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 4 से संबंधित:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।

 

E. संपादकीय-द हिन्दू 

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 2 से संबंधित:

सामाजिक न्याय:

स्वास्थ्य नीति को अमल में लाने की खाई को पाटना:

विषय : स्वास्थ्य से संबंधित मुद्दे:

प्रारम्भिक परीक्षा : पब्लिक हेल्थ एंड मैनेजमेंट कैडर, एनएचपी 2017

मुख्य परीक्षा : देश में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं को सुनिश्चित करने के लिए स्वास्थ्य क्षेत्र में सुधार।

संदर्भ

  • केंद्र सरकार ने भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों के संशोधित संस्करणों के साथ एक सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रबंधन संवर्ग की स्थापना के लिए मार्गदर्शक दस्तावेज जारी किया है।

संक्षिप्त विवरण:

  • राष्ट्रीय स्वास्थ्य नीति ( (NHP)) 2017में  सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं के मानकों को बढ़ाने के लिए इसकी  सिफारिश की थी।
  • स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के निर्देशों के तहत स्वास्थ्य सेवाओं की एक बहु-विषयक प्रणाली बनाने के लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रबंधन संवर्ग की परिकल्पना की गई है।
  • केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण परिषद के 13वें सम्मेलन में राज्यों ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रबंधन संवर्ग के विचार का समर्थन कियाहै ।
  • विकसित मॉडल संरचनाएं, सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रबंधन संवर्ग के विचारको   राज्यों  से परामर्श के लिए को उनके सामने रखा गया ।
  • वर्तमान में, अधिकांश भारतीय राज्यों (तमिलनाडु और ओडिशा को छोड़कर) में मेडिकल कॉलेज के संकाय सदस्यों का एक शिक्षण संवर्ग है और नैदानिक ​​सेवाओं में शामिल डॉक्टरों का एक विशेषज्ञ संवर्ग है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों की इस मौजूदा संरचना में करियर के सीमित अवसर हैं जिसके लिए सार्वजनिक स्वास्थ्य को शायद ही कभी करियर पथ के रूप में चुनागया हो ।

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Image Source : nhsrcindia.org

प्रमुख चिताएं:

  • प्रशिक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यबल की कमी की सर्वोच्च चुनौती के साथ समाज के लिए उचित सार्वजनिक स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का अभावबहुत महंगा साबित हो  रहा  है।
  • सार्वजनिक स्वास्थ्य के प्रबंधन में बहुत बड़ा अंतर है।
  • रोगियों के साथ उचित संचार का अभाव।
  • नीति निर्माण स्तर पर लापरवाही।
  • स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में सुधार और देखभाल की गुणवत्ता में सुधार में काफी देरीहुई  है।

हस्तक्षेप करने वाले कदम:

  • प्रस्तावित सार्वजनिक स्वास्थ्य कैडर और स्वास्थ्य प्रबंधन संवर्ग को देश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रके मुद्दों के समाधान के लिए NHP 2017 की संभावित सिफारिश के रूप में माना गया है।
  • मार्गदर्शक दस्तावेजों के जारी होने से राज्यों को कार्य योजना तैयार करने, कैडर की ताकत की पहचान करने और निर्धारित समय सीमा (6 महीने से 1 वर्ष) में  रिक्तियों को भरने के लिए प्रोत्साहित और निर्देशित किया गया है।
  • भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानकों के नियमित संशोधन के साथ, स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं की गुणवत्ता पर अत्यधिक ध्यान दिया गया है।
  • भारत  में  हमेशा सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं में कार्यबल  का आभाव रहा  है और ऐसे परिदृश्य में  सार्वजनिक स्वास्थ्य संवर्ग स्थापित करने का निर्णय निश्चित रूप से कार्यबल को मजबूत   करेगा।
  • यह पर्याप्त, कुशल और प्रशिक्षित सार्वजनिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों के सहयोग से आगामी दिनों में महामारी जैसी स्थिति के प्रति लचीलापन बढ़ाने के लिए एक स्वागत योग्य कदम होगा।

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Image Source : nhsrcindia.org

अगामी सुधार:

  • यह आवश्यक है कि सार्वजनिक स्वास्थ्य से संबंधित किसी भी नीति में निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक और नैदानिक ​​सेवाओं के समग्र वितरण को सुनिश्चित करने वाले स्वास्थ्य विशेषज्ञों के प्रशिक्षण पर जोर दिया जाना चाहिए।
  • जन स्वास्थ्य विशेषज्ञ की भूमिकाओं और कार्यों और जिला व  उप-जिला स्तरों पर ऐसे संवर्गों की प्रासंगिकता की सटीक समझ होनी चाहिए।
  • यह दृष्टिकोण एक महामारी विज्ञानी और सार्वजनिक स्वास्थ्य पर एक विशेषज्ञ के कार्यों के संबंध में नीति निर्माण स्तर पर भ्रम को दूर  कर  सकता है।
  • COVID-19 संक्रमण अवधि के दौरान देखे गए किसी विशेष रोगजनन से निपटने के लिए उपचार की लाइन में उचित निर्णय लेने के लिए पेशेवरों को विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया जाना चाहिए।
  • संशोधित IPHS (भारतीय सार्वजनिक स्वास्थ्य मानक) एक महत्वपूर्ण विकास है लेकिन सभी समस्याओं का अंत नहीं है। IPHS के संशोधित संस्करण जारी होने के बावजूद, सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं का केवल एक छोटा हिस्सा मानकों को पूरा करता है। सार्वजनिक स्वास्थ्य प्रबंधन के गुणवत्ता मानकों को उन्नत करने के लिए इसे संबोधित करने की आवश्यकता है।
  • देश भर में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार लाने में इसकी प्रभावशीलता को निर्धारित करने के लिए IPHS में  संशोधन का स्वतंत्र रूप से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।
  • मौजूदा सुविधाओं में IPHS मानदंडों के आधार पर सार्वजनिक स्वास्थ्य और विशेषज्ञ संवर्ग दोनों में एक संरचना बनाने का सुझाव दिया गया है।
  • जैसे-जैसे राज्य सार्वजनिक स्वास्थ्य के कैडर स्थापित करने की योजनाएँ विकसित करते हैंवैसे वैसे सक्रिय कदमों के साथ एक प्रशिक्षित कार्यबल को सुरक्षित करने में सभी संभावित चुनौतियों की पहचान की जानी चाहिए।
  • राज्यों में सार्वजनिक स्वास्थ्य की गुणवत्ता का मानकीकरण एक समय लेने वाली प्रक्रिया  है जो केंद्र, राज्यों, केंद्र शासित प्रदेशों, प्रशासकों, चिकित्सा चिकित्सकों, स्वास्थ्य विशेषज्ञों और स्वास्थ्य क्षेत्र के अन्य हितधारकों के बीच एक निर्बाध सहयोग और समन्वय की मांग करती है। 

सारांश : 

  • एक स्वस्थ समाज की स्थापना के लिए, भारतीय राज्यों को सार्वजनिक स्वास्थ्य और प्रबंधन कैडर की स्थापना में प्रभावी ढंग से कार्य करने की आवश्यकता है।

 

सामान्य अध्ययन प्रश्न पत्र 3 से संबंधित:

पर्यावरण:

आशा की किरणे , प्रकृति और मानवता को जोड़ने वाला:

विषय : पर्यावरण संरक्षण,प्रदूषण और निम्नीकरण। 

प्रारंभिक परीक्षा: भारत में बायोस्फीयर रिजर्व, पारिस्थितिकी तंत्र

मुख्य परीक्षा: प्रकृति के पारिस्थितिक ताने-बाने के संरक्षण और संरक्षण में बायोस्फीयर रिजर्व की भूमिका।

संदर्भ: लेखमें जैव विविधता के महत्व और पारिस्थितिक आपदाओं के जोखिमों को कम करने के लिए बायोस्फीयर रिजर्व की रक्षा और संरक्षण की आवश्यकता परजोर दिया गया   है।

परिदृश्य:

  • जैव विविधता को ग्रह का जीवित ताना-बाना माना जाता है और यह वर्तमान और भविष्य में मानव कल्याण का एक अनिवार्य घटक है।
  • हम एक ऐसे युग में हैं जिसमें प्रकृति को भारी नुकसान हुआ है जिसके परिणामस्वरूप जैव विविधता का महत्वपूर्ण विनाश हुआ है।
  • पेरिस में यूनेस्को (UNESCO) मुख्यालय में जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं (IPBES) पर अंतर-सरकारी विज्ञान-नीति मंच द्वारा जारी जैव विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं पर वैश्विक मूल्यांकन रिपोर्ट के अनुसार, जैव विविधता के नुकसान के प्रमुख कारणों में शामिल हैं:
    • जलवायु परिवर्तन
    • आक्रामक उपजाति
    • प्राकृतिक संसाधनों का अत्यधिक दोहन
    • प्रदूषण
    • अनियोजित शहरीकरण
  • पृथ्वी की पारिस्थितिक वहन क्षमता काफी हद तक मानवीय गतिविधियों के कारण सीमित सहनशीलता को पार कर गई है जो आर्थिक विकास के प्राथमिक लक्ष्य पर हावी हैं।
  • भारत में जैव विविधता हॉटस्पॉट के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए:Biodiversity Hotspots in India

वन्यजीवों के सामने आने वाली चुनौतियाँ:

  • वन प्रशासन की अक्षमता के साथ-साथ बुनियादी वन्यजीव संरक्षण क्षमता की उपेक्षा और पतन वन्यजीवों द्वारा सामना की जाने वाली अंतर्निहित समस्याएं हैं।
  • अवैध शिकार और शिकार से वन्यजीव प्रजातियों के लिए एक गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
  • राजमार्गों, खानों और बांधों के निर्माण सहित लापरवाह विकास परियोजनाओं का वन्यजीवों के आवासों पर हानिकारक प्रभाव पड़ता है।
  • वन्यजीवों का अवैध व्यापार होता  है जिसके परिणामस्वरूप जानवरों की बड़े पैमाने पर हत्या होती है। और मूक शिकार की प्रथा की पहचान करना मुश्किल है और स्थानीय समुदाय को अवैध शिकार के खिलाफ शिक्षित करना बेहद चुनौतीपूर्ण है।
  • संरक्षित क्षेत्रों में मानव बस्ती का एक बड़ा हिस्सा खतरनाक है जिसके कारण  आमतौर पर मानव-वन्यजीव संघर्ष  होता  है।human-wildlife conflict
  • गैर-लकड़ी वन उत्पादों के निष्कर्षण से वन्यजीवों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
  • नेचर जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन में  वन्यजीवों के सबसे बड़े खतरों को उजागर  किया, जिसमें पाया गया कि कृषि और संसाधनों का अत्यधिक दोहन प्रमुख खतरे हैं।
  • बिजली लाइन परियोजनाएं पक्षियों और उनके आवास के लिए एक बड़ा खतरा हैं। उदाहरण के लिए, ग्रेट इंडियन बस्टर्ड (Great Indian Bustard )जो कि उपमहाद्वीप की एक मूल प्रजाति है, विकासात्मक परियोजनाओं के कारण लगभग विलुप्त होने के कगार पर है।

भारत में वन्यजीवों के लिए कानूनी ढांचा:

  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 की धारा 2 (37) (Wildlife Protection Act, 1972)ने वन्यजीव को किसी भी जानवर, या तो जलीय या स्थलीय और वनस्पति को शामिल करने के लिए परिभाषित किया है जो किसी भी निवास स्थान का एक हिस्सा है।
  • वन्यजीव संरक्षण अधिनियम भारत में वन्यजीवों के संरक्षण और कानूनी सहायता प्रदान करता है।
  • भारत की पर्यावरण और पारिस्थितिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के उद्देश्य से जंगली जानवरों, पक्षियों और पौधों की रक्षा के लिए अधिनियम को लागू किया गया था।
  • वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो की स्थापना लुप्तप्राय प्रजातियों के साथ-साथ वन्यजीवों के अवैध व्यापार को खत्म करने के लिए की गई है।
    • वन्यजीव अपराध नियंत्रण ब्यूरो पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के तहत भारत सरकार द्वारा स्थापित एक वैधानिक बहु-अनुशासनात्मक निकाय है।
  • भारत का संविधान वन्यजीवों की रक्षा करना और जीवित प्राणियों के प्रति दया रखना नागरिकों का मौलिक कर्तव्य बनाता है।(Fundamental Duty)
  • अनुच्छेद 48A (a DPSP) के अनुसार, देश के वनों और वन्यजीवों के सुधार के लिए रक्षा, सुरक्षा और काम करना राज्य का कर्तव्य है।
  • वन्यजीव को संविधान की अनुसूची VII की समवर्ती सूची (सूची III) के तहत रखा गया है जो इसे राज्य और केंद्र दोनों सरकारों के दायरे में लाता है।
  • भारत उन  अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों का हिस्सा हैजो    वन्यजीवों के संरक्षण को प्रोहत्साहित  करते  हैं। इनमें से कुछ सम्मेलनों में जैव विविधता पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन, प्रवासी प्रजातियों पर सम्मेलन (CMS), लुप्तप्राय प्रजातियों में अंतर्राष्ट्रीय व्यापार पर सम्मेलन शामिल हैं।( UN Convention on Biological Diversity,)

 वर्तमान परिदृश्य:

  • संकटग्रस्त प्रजातियों की IUCN रेड लिस्ट (IUCN Red List )में अनुमान लगाया गया है कि जंगली जीवों और वनस्पतियों की 8400 से अधिक प्रजातियां गंभीर रूप से संकटग्रस्त हैं और 30,000 से अधिक के लुप्तप्राय और कमजोर होने का अनुमान है।
  • IUCN के आंकड़ों के अनुसार, भारत में 239 जीव प्रजातियों को लुप्तप्राय प्रजातियों के रूप में वर्गीकृत किया गया है, जिसमें स्तनधारियों की 45 प्रजातियाँ, पक्षियों की 23 प्रजातियाँ, सरीसृपों की 18 प्रजातियाँ, उभयचरों की 39 प्रजातियाँ और मछलियों की 114 प्रजातियाँ शामिल हैं।
  • भारत में 733 संरक्षित क्षेत्रों का एक नेटवर्क है जिसमें 103 राष्ट्रीय उद्यान, 537 वन्यजीव अभयारण्य, 67 संरक्षण भंडार और 26 सामुदायिक भंडार शामिल हैं।

तरीके अपनाने होंगे:

  • यह सरकारों, लोगों और हितधारकों की सामूहिक जिम्मेदारी होनी चाहिए कि वे स्वच्छ हवा, उच्च गुणवत्ता वाले पेयजल और पर्याप्त भोजन और स्वस्थ आवास की दिशा में काम करें ताकि प्राकृतिक पर्यावरण को गंभीर रूप से प्रभावित किए बिना मानव को लाभान्वित करने वाली पारिस्थितिकी तंत्र सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित हो सके।
  • संरक्षण क्षेत्रों और अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में गायन के माध्यम से बायोस्फीयर रिजर्व की रक्षा, प्रचार और विस्तार करना पारिस्थितिक संतुलन बनाए रखने और जैव विविधता के नुकसान को कम करने के लिए स्तंभों के रूप में काम करेगा।
  • 1971 में बायोस्फीयर रिजर्व के विश्व नेटवर्क के निर्माण में यूनेस्को द्वारा एक ऐतिहासिक पहल, समृद्ध जैव विविधता के क्षेत्रों की पहचान और संरक्षण में अनुकरणीय रही है। ऐसे कार्यक्रमों का विस्तार करने की आवश्यकता है।
  • दक्षिण एशिया भारत, भूटान और नेपाल के साथ जैव विविधता का केंद्र है।
  • यह  आरक्षित क्षेत्र आशा और प्रमाण का प्रतिनिधित्व करते हैं कि हम सक्रिय हस्तक्षेप के बिना पारिस्थितिक प्रलय के दिन की ओर बिल्कुल नहीं बढ़ रहे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना ​​है कि वन्यजीव और जैव विविधता की रक्षा करने वाले मौजूदा कानूनों की तर्ज पर अधिकारियों द्वारा उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
  • भारत में बायोस्फीयर रिजर्व के बारे में अधिक जानकारी के लिए इस लिंक पर क्लिक कीजिए: Biosphere Reserves in India

सारांश :

  • दक्षिण एशियाई क्षेत्र में बायोस्फीयर रिजर्व की संख्या में वृद्धि करना और उन्हें मानवीय गतिविधियों से बचाना आवश्यक है ताकि आगे के जोखिमों और पारिस्थितिक आपदाओं की संभावनाओं को रोका जा सके।

 

F. प्रीलिम्स तथ्य:

आज इससे संबंधित कुछ नहीं है।  

 

G. महत्वपूर्ण तथ्य:

1. पैंगोंग पुल का निर्माण 'कब्जे वाले क्षेत्र' में किया है: केंद्र

  • कहा जा रहा है कि पैंगोंग झील के दोनों किनारों को जोड़ने वाला एक चौड़ा पुल बनाया जा रहा हैं, जो पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) के लिए सैनिकों को स्थानांतरित करने में लगने वाले समय को कम कर देगा, जबकि मुख्य पुल के निर्माण का सहयोग करने के लिए एक छोटा पुल बनाया गया था।
  • इससे पहले, PLA को रुडोक काउंटी को पार करते हुए एक गोल चक्कर लगाना पड़ता था, लेकिन इस पुल से वहां सीधी पहुंच प्रदान करने की उम्मीद है।
  • विदेश मंत्रालय (MEA) ने कहा कि भारत पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग त्सो (झील) पर चीन द्वारा एक पुल के निर्माण की बारीकी से निगरानी कर रहा है, जो "कब्जे वाले क्षेत्र" में है।

 

2. टीबी के लिए 'मेड इन इंडिया' त्वचा परीक्षण शुरू किया जाएगा:

  • भारत 'सी-टीबी' नामक एक नया स्वीकृत "भारत में निर्मित" टीबी संक्रमण त्वचा परीक्षण शुरू करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
  • इसे एक लागत प्रभावी उपकरण कहा जाता है और यह अन्य उच्च बोझ वाले देशों के लिए भी फायदेमंद होगा।
  • स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि 2022 में 'एडॉप्ट पीपल विद टीबी' की शुरुआत की जाएगी।

 

3. 'तुर्की की चिंताओं पर चर्चा के लिए तैयार':

  • फ़िनलैंड के राष्ट्रपति ने कहा कि उनका देश उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन (NATO) में शामिल होने के लिए तुर्की के आवेदन के बारे में उसकी चिंताओं पर चर्चा करने के लिए तैयार है।
  • यूक्रेन पर रूस के आक्रमण के मद्देनजर फिनलैंड और स्वीडन ने औपचारिक रूप से संगठन में शामिल होने के लिए आवेदन किया हैं।
  • तुर्की ने फिनलैंड और स्वीडन के नाटो के आवेदन का विरोध किया था जिसमें देशों पर कुर्दिस्तान की वर्कर्स पार्टी (PKK) के आतंकवादियों को पनाह देने का आरोप लगाया गया था। 
  • फ़िनिश राष्ट्रपति ने कहा कि देश तुर्की की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध होगा, जैसे तुर्की नाटो सहयोगियों के हिस्से के रूप में उनकी सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध होगा।
  • स्वीडन की प्रधान मंत्री ने कहा कि उनका देश तुर्की सहित सभी नाटो सदस्यों के साथ किसी भी मुद्दे को हल करने के लिए चर्चा कर रहा है।

 

H. UPSC मुख्य परीक्षा के लिए अभ्यास प्रश्न :

प्रश्न 1.  "भारतीय संघवाद सहकारी और असहयोगी संघवाद के बीच एक संवाद है जहाँ संघीय इकाइयाँ सहयोग से लेकर प्रतियोगिता तक, अनुनय के विभिन्न साधनों का उपयोग करने के लिए स्वतंत्र हैं"। विस्तार से चर्चा कीजिए। (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस II - राजनीति) 

प्रश्न 2. भारत के इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम से जुड़ी चुनौतियों और अवसरों की पहचान कीजिए । (250 शब्द; 15 अंक) (जीएस III - पर्यावरण)

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