104वें संविधान संशोधन अधिनियम 2020 से पहले, भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के तहत एंग्लो इंडियन समुदाय के सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा के लिए नामित किया जाता है?

By Sakshi Yadav|Updated : September 6th, 2022

104वें संविधान संशोधन अधिनियम 2020 से पहले, भारत के संविधान के 331अनुच्छेद के तहत एंग्लो इंडियन समुदाय के सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा के लिए नामित किया जाता है। 104 वें संविधान संशोधन अधिनियम के अनुसार लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में एंग्लो-इंडियन के लिए सीटों के आरक्षण को खत्म कर दिया और वही एससी और एसटी जाति के लिए आरक्षण को दस साल तक बढ़ा दिया है।

एंग्लो इंडियन कौन है?

संविधान के अनुच्छेद 366 (2) के तहत आंग्ल-भारतीय या ऐंग्लो इंडियन(ऍङ्ग्लो-इण्डियन) एक जाति और भाषा से जुड़ा प्रयुक्त होता है। जाति के संबंध में यह उन अंग्रेजों की ओर संकेत करता है जो भारत में बस गए हैं और अपनी जीवनी के लिए कोई व्यवसाय या पदाधिकार हैं।

लोकसभा और राज्य विधान सभाओं में एंग्लो-इंडियन के लिए आरक्षण का क्या प्रावधान है?

संविधान के अनुच्छेद 331 के तहत एंग्लो इंडियन समुदाय को लोकसभा में और अनुच्छेद 333 के तहत राज्य विधानसभा में विशेष प्रतिनिधित्व दिया जाता था। हालांकि अब इसे समाप्त कर दिया गया है।

Summary

104वें संविधान संशोधन अधिनियम 2020 से पहले, भारत के संविधान के किस अनुच्छेद के तहत एंग्लो इंडियन समुदाय के सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा के लिए नामित किया जाता है

104वें संविधान संशोधन अधिनियम 2020 से पहले, भारत के संविधान के 331अनुच्छेद के तहत एंग्लो इंडियन समुदाय के सदस्यों को राष्ट्रपति द्वारा लोकसभा के लिए नामित किया जाता है। एंग्लो इंडियन ऐसे किसी व्यक्ति को माना जाता है जो भारत में रहता हो और जिसके पिता या कोई पुरुष पूर्वज यूरोपियन वंश के हों। 

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